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यूपी: दलबदलुओं को तरजीह से सपा विधायकों में खलबली, कई विधायकों के टिकट कटने की आशंका, नए ठौर की तलाश शुरू

Thu, 20 Jan 2022 03:04 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 20 Jan 2022 03:04 PM IST
सार

अलग-अलग पार्टियों से सपा में शामिल हो रहे नेताओं से सपा की ही मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब सपा के नेता खुद भी नए ठिकानों की तलाश में लग गए हैं।

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samajwadi party mlas are searching new place for tickets.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

समाजवादी पार्टी में विभिन्न दलों के विधायकों व अन्य नेताओं के आने से कार्यकर्ताओं में उत्साह है, लेकिन पार्टी के विधायकों में असमंजस है। जिनके टिकट कटने की आशंका है, उन्होंने नए ठौर की तलाश शुरू कर दी है। ऐसे में ये विधायक पार्टी की चुनौती बढ़ा सकते हैं। जलालाबाद विधायक के इस्तीफे के बाद टिकट कटने की आशंका से जूझने वाले विधायक गुणा-भाग में जुट गए हैं।

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समाजवादी पार्टी के कुल 47 विधायक हैं। सपा के टिकट पर सदन में पहुंचे हरदोई के नितिन अग्रवाल और सिरसागंज विधायक हरिओम यादव भाजपा में जा चुके हैं। सपा के साथ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठबंधन है। इसके चार विधायक हैं। पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि उनके विधायकों वाली सीटों के अलावा 10 अन्य सीटें भी मिलेंगी। इनमें चार सीटें वह हैं, जिन पर वे भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ चुके हैं। इसमें बांसडीह से नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी और शाहगंज से शैलेंद्र यादव ललई विधायक हैं। वह आजमगढ़ और बलिया की भी एक-एक सीट पर दावा कर रहे हैं। महान दल के केशवदेव मौर्य और जनवादी पार्टी के डॉ. संजय चौहान भी अलग-अलग सीटों पर दावा कर रहे हैं।
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भाजपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य, डॉ. धर्म सिंह सैनी, दारा सिंह चौहान सहित कुल 14 विधायकों ने सपा की सदस्यता ली है। स्वामी प्रसाद मौर्य खुद के साथ ही अपने बेटे व अन्य नजदीकी लोगों के लिए टिकट मांग रहे हैं। उनके खास नीरज मौर्य को जलालाबाद से सपा ने टिकट भी जारी कर दिया है, जिसके विरोध में सपा विधायक शरदवीर सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वह जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इसी तरह बसपा से 15 विधायक आए हैं।

इसमें कई उन सीटों पर टिकट का दावा कर रहे हैं, जहां से सपा के विधायक हैं। आंबेडकरनगर जिले में बसपा नेताओं के आने से पार्टी के अंदर सियासी धुआं उठने लगा है। विरोध की वजह से ही अलीगढ़ में टिकट बदलना पड़ा है। मथुरा की मांट सीट पर भी विवाद रहा। आगरा में फतेहाबाद सीट पर भी उम्मीदवार बदलना पड़ा।

नई रणनीति पर उठने लगे हैं सवाल

समाजवादी पार्टी की रणनीति है कि जो जिताऊ उम्मीदवार है, उसे हर हाल में मैदान में उतारा जाएगा। वह चाहे पार्टी के मूल काडर का हो या दूसरे दल से आया हो। पार्टी नेतृत्व की इस रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के अंदर कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा है। पर, पिछले चुनाव से सड़क पर संघर्ष करने वाले तमाम नेता असहज हैं। वे चुनौती देने को तैयार हैं।

उनका कहना है कि जिन नेताओं के खिलाफ साढ़े चार साल संघर्ष किया, अब उन्हीं के लिए वोट मांगना मंजूर नहीं है। यह समस्या उन सीटों पर ज्यादा है, जहां मौजूदा विधायकों ने बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज कराए हैं। पार्टी में शामिल करते वक्त संबंधित नेता से मुकदमे वापस लेने संबंधी कोई समझौता भी नहीं कराया गया।

ऐसे में वहां के दावेदार सवाल कर रहे हैं कि जिस नेता पर दूसरे दल के विधायक ने मुकदमे दर्ज कराए हैं, उसे किस मुंह से उसी व्यक्ति के चुनाव प्रचार में लगने के लिए कहा जाए। इसी तरह दूसरे दल से आए विधायकों को उनकी सीट के बजाय मनपसंद सीट पर उतारने की रणनीति की भी मुखालफत हो रही है।

गुपचुप बांटे जा रहे हैं चुनाव चिह्न
समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक खुले तौर पर सिर्फ 10 सीटों का एलान किया गया है। अन्य सीटों पर गुपचुप तरीके से चुनाव चिह्न थमाए जा रहे हैं। इस रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिवपाल खेमे में भी हलचल

समाजवादी पार्टी के गठबंधन में शामिल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में भी हलचल है। मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता भाजपा का दामन थामने को तैयार हैं। कई वरिष्ठ नेता भी विकल्प तलाश रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का साफ कहना है कि उन्होंने करीब 25 लोगों की सूची सौंपी है। जिस उम्मीदवार से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव संतुष्ट होंगे, उन्हें टिकट मिलेगा। ऐसे में पार्टी से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके कई वरिष्ठ नेता दूसरा ठौर तलाश रहे हैं। प्रसपा से कुल 240 लोगों ने आवेदन किया था। इनमें करीब 70 ऐसे उम्मीदवार थे, जिन्होंने हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी।

जो जिताऊ हैं उन्हें टिकट दिया जा रहा
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी टिकट उन्हें दे रही है, जो जिताऊ होंगे। जिसके पक्ष में जनता होगी। इसके लिए पार्टी की ओर से संबंधित लोगों के बारे में जनता की राय ली जा चुकी है। कई स्तरों पर सर्वे कराया है। जो समीकरण के हिसाब से फिट हैं। दूसरे दलों से जिन लोगों को जोड़ा गया है वे जनाधार वाले नेता हैं।

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