किसके इशारे पर काम करती रही पुलिस
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पिछले दो दिनों में जिस तरह पुलिस अफसरों व कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर काम किया, उससे साफ था कि पुलिस जो कर रही है वह ऊपर से हो रहे इशारे का नतीजा है।
बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने जैसे ही सुब्रत रॉय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश जारी किए, इसकी सूचना पुलिस अफसरों को हो गई थी।
गुरुवार की सुबह ही लखनऊ के एसएसपी प्रवीण कुमार ने एएसपी ट्रांस गोमती हबीबुल हसन को अपने आवास बुलाया जहां इस मुद्दे को लेकर काफी देर तक चर्चा होती रही।
तीन घंटे तक क्या करती रही पुलिस
सूत्र बताते हैं कि कुछ फोन ऊपर तक किए गए जिसके बाद तय हुआ कि गोमतीनगर पुलिस सहारा शहर जाकर सर्वोच्च अदालत के आदेश की तामील कर दे।
इसी वजह से गुरुवार शाम को गोमतीनगर पुलिस जब सहारा शहर के अंदर घुसी तो तीन घंटे बाद ही बाहर निकली और उसने वही कहानी सुनाई जिसका लोगों को अंदेशा था। पुलिस का जवाब था कि परिसर में सुब्रत रॉय नहीं मिले।
पुलिस नहीं दे पाई इन सवालों के जवाब
जबकि सर्वोच्च अदालत में सहारा की ओर से जो अपील की गई थी, उसमें कहा गया था कि सुब्रत रॉय की मां का स्वास्थ्य खाफी खराब है और वह अपनी मां के पास मौजूद हैं, जिस वजह से बुलाए जाने पर भी अदालुत के समक्ष हाजिर न हो सके।
लेकिन पुलिस को सुब्रत रॉय अपनी मां के पास मौजूद नहीं मिले। पुलिस यह भी नहीं बता सकी थी कि सुब्रत रॉय कहां हैं अथवा उनके कहां होने की उसे जानकारी दी गई है।
चुप थे पुलिस अधिकारी
ऐसे ही पुलिस अधिकारी शुक्रवार को अजीबोगरीब बर्ताव करते रहे। कभी समर्पण की बात पर चुप रहे तो कभी गिरफ्तारी का दावा किया।
जब गिरफ्तारी का दावा किया जब गिरफ्तार किए गए आरोपी को अदालत के सामने ले जाने के बजाय सहारा शहर में ही कोई खिचड़ी पकाते रहे।
पुलिस इस गिरफ्तारी को लेकर क्या कदम उठा रही है, कितने बजे आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा?
आरोपी को लखनऊ जेल भेजा जाएगा या फिर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली भेजा जा रहा है? इन सवालों का सीधा जवाब किसी अधिकारी ने नहीं दिया।