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दौड़ के फीडबैक ने दिखाया भाजपा को आईना
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
Updated Tue, 17 Dec 2013 08:53 PM IST
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रन फॉर यूनिटी के उत्तर प्रदेश से भेजे गए फीडबैक ने नरेंद्र मोदी व भाजपा नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी होगी।
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भले ही मोदी व भाजपा इस कार्यक्रम को गैर राजनीतिक करार देते रहे हों लेकिन व्यावहारिक रूप से पूरे आयोजन के पीछे भगवा टोली ही मुख्य भूमिका निभा रही थी।
इसलिए दौड़ को अगर ‘मोदी इफेक्ट’ की कसौटी या भाजपा के प्रभाव की बानगी माना जाए तो संकेत बहुत उत्साह बढ़ाने वाले नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी इस फीडबैक ने यूपी में जमीनी हकीकत से रू-ब-रू करा दिया होगा।
यह साफ कर दिया होगा कि उत्तर प्रदेश से ज्यादा से ज्यादा सीटें भाजपा की झोली में डालकर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा करने का सपना पूरा करने के लिए और मेहनत की जरूरत है।
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उन स्थानों पर भी बहुत मेहनत करनी होगी जहां पहले भाजपा का प्रभाव रहा है। लखनऊ का फीडबैक भी संघ या मोदी का बहुत उत्साह बढ़ाने वाला नहीं है।
राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव ने रन फॉर यूनिटी के दिन यहां कहा था कि दौड़ के लिए लखनऊ में पांच हजार लोगों का लक्ष्य था। उस लिहाज से दौड़ सफल रही।
राव जो भी दावा करके गए हों लेकिन सूत्र इसके उलट कहानी बता रहे हैं। इनके अनुसार, लखनऊ से जो फीडबैक भेजा गया है, उसमें राजधानी में 2000-2500 के बीच लोगों के ही दौड़ में शामिल होने की बात कही गई है।
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इसके साथ ही यह फीडबैक भाजपा के कुछ प्रमुख नेताओं की भूमिका पर सवालिया निशान लगाने वाला है। कारण जो भी हो लेकिन इन लोगों की दौड़ को लेकर उदासीनता रही। तैयारियों को लेकर भी अव्यवस्था रही।
सूबे का हाल
दौड़ में शामिल लोगों की संख्या को कसौटी मानें तो विरोधियों के गढ़ में पैठ बनाने के लिए भाजपा की चुनौती जस की तस है।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के क्षेत्र मैनपुरी में 500 लोग जुटे तो उनके गृह जिला इटावा में 800 और रालोद नेता अजित सिंह के बागपत में मात्र 200 लोग ही जुटे।
रामपुर में 400 लोगों के दौड़ में हिस्सा लेने की खबर है। अमेठी में 1000 लोग तो वरुण गांधी के पीलीभीत में 400-500 लोग ही शामिल हुए।
ऐसा ही हाल बरेली का भी रहा। कल्याण सिंह के एटा में लगभग 800 लोग दौड़े। अलबत्ता फिरोजाबाद ने जरूर भाजपा की बांछें खिला दी हैं। यहां लगभग 1600 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है।
फर्रुखाबाद में 1000, गाजियाबाद में 2500 और गोरखपुर में लगभग 1000 लोगों के दौड़ में भाग लेने की सूचना है।
बुंदेलखंड सबसे आगे
फीडबैक के अनुसार, बुंदेलखंड के जिले छोटे होने के बावजूद भीड़ के लिहाज से आगे रहे। झांसी में जिला व महानगर के कार्यक्रम अलग-अलग हुए।
यहां कुल 3000 लोगों के दौड़ने की खबर है। बांदा में 1200, हमीरपुर में 1400, चित्रकूट में 1400, महोबा में 1300 और ललितपुर में 800 लोगों ने दौड़ में हिस्सा लिया।
अभी मेहनत की जरूरत
एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने निजी बातचीत में स्वीकार किया कि इस दौड़ को अगर लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जाए तो अभी बहुत मेहनत करने की जरूरत है।
न सिर्फ लोगों के बीच बल्कि पार्टी नेताओं में भी तालमेल बैठाना जरूरी है। अलबत्ता दौड़ को लेकर आम आदमी का उत्साह और युवाओं की भागीदारी जरूर मनोबल बढ़ाने वाली है।
यह साफ हो गया है कि जनता भाजपा के समर्थन के मूड में है। पर, भाजपा के लोगों को जरूर ऐसा नेटवर्क तैयार करना होगा जो इस समर्थन को मतदान केंद्र तक ले जाकर वोट में बदल सके।
पार्टी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि इस कार्यक्रम को भाजपा या मोदी की लोकप्रियता की कसौटी मानना ठीक नहीं है।
यह आम जनता का कार्यक्रम था। इस लिहाज से काफी सकारात्मक संकेत हैं। जनता ने दौड़ में सक्रियता दिखाकर साफ कर दिया है कि वह मान रही है कि कांग्रेस के हाथ में देश सुरक्षित नहीं है।