यूपी में 'वंदे मातरम' के अपमान पर बवाल
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एक तरफ जहां प्रदेश की वर्तमान सरकार ने बजट में
मंगलवार को प्रदेश की विधानसभा के शून्य प्रहर में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी ने भाजपा पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सदस्यों ने दरवाजे पर खड़े होकर वंदे मातरम का बहिष्कार किया जो इनका ट्रेडमार्क है। राष्ट्रगीत के अपमान के लिए भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
जिस पर भाजपा ने जवाब दिया कि वंदे मातरम का गान तो सदस्यों ने पूरे सम्मान के साथ खड़े होकर किया साथ ही यह भी कहा कि भारत माता को डायन कहने वालों को वंदे मातरम को लेकर आरोप नहीं लगाना चाहिए।
अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि छानबीन के बाद फैसला करेंगे।
कांग्रेस ने काला दिन करार दिया
कांग्रेस के प्रदीप माथुर ने 19 जून को काला दिन बताते हुए कहा कि क्या ये वंदे मातरम के ठेकेदार हैं। नई परंपरा शुरू कर रहे हैं। जीत के बाद उन्मादग्रस्त हो गए हैं।
इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा के सतीश महाना ने कहा कि 19 जून की घटना 24 जून को याद आई। व्यवस्था का प्रश्न तत्काल उठाया जाता है जब सदन संचालित होता है। तब याद नहीं आया कि वंदे मातरम का अपमान हुआ।
सदन को शर्मशार तो वह करते हैं जो समय-समय पर पीठ के निर्णय पर आपत्ति करते हैं और इशारा करके निर्देश देने का प्रयास करते हैं।
महाना का इशारा अंबिका चौधरी की ओर था। हमारा ऐसा कोई भाव न था और न हो सकता है। अंबिका ने इसका प्रतिवाद किया।
अध्यक्ष के अपमान का मामला भी उठा
बजट सत्र के पहले दिन 19 जून को अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय को सदन में आने से रोकने का मामला भी विधानसभा में उठा।
अंबिका चौधरी ने 19 जून को भाजपा सदस्यों द्वारा धरने पर बैठकर अध्यक्ष को सदन में आने से रोके जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह अध्यक्ष की अवमानना है।
पूरा परिसर अध्यक्ष का है और उनका किसी तरह से अपमान नहीं किया जा सकता। गंभीर बात यह है कि अध्यक्ष को दूसरे रास्ते से सदन में आकर अपनी पीठ पर बैठना पड़ा।
भाजपा ने दी सफाई
भाजपा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अध्यक्ष का अपमान करने की उसकी कोई मंशा नहीं थी।
अध्यक्ष के कमरे के बाहर सदस्य पहले भी धरने पर बैठ चुके हैं। यह कोई नई घटना नहीं थी और न ही हमारी ऐसी कोई मंशा थी।
इस पर नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जिस तरह से अध्यक्ष को रोकने का प्रयास किया गया, उससे अध्यक्ष व सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है।
इस अमर्यादित आचरण पर पीठ का निर्देश आना चाहिए ताकि पुनरावृत्ति न हो।