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KGMU: सांस चल रही थी, डॉक्टरों ने कहा- हो गई मौत, जमकर हुआ हंगामा

Mon, 06 Nov 2017 10:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 06 Nov 2017 10:52 AM IST
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Ruckus in KGMU when doctor say patient dead but he was alive.
सांस चलती मिली तो फिर भर्ती किया - फोटो : amar ujala

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में रविवार सुबह रेजीडेंट डॉक्टरों ने जिस महिला मरीज को मृत बताकर बाहर कर दिया, बाद में उसकी सांसें चलती मिलीं। रेजीडेंट डॉक्टरों की इस लापरवाही पर तीमारदारों ने जमकर हंगामा किया। वहीं इससे नाराज रेजीडेंट डॉक्टरों ने तीमारदारों से हाथापाई करते हुए बाहर खदेड़ दिया।  सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों को शांत कराया। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मरीज को भर्ती किया गया।

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तालकटोरा स्थित गढ़ी कनौरा की रहने वाली शमशुन निशां (52) पेट की समस्या समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। उनका पहले से केजीएमयू से इलाज चल रहा था। रविवार सुबह करीब सात बजे घर पर उनकी सांसें थमने-सी लगीं।
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परिवारीजन इमरान मरीज को लेकर सुबह करीब आठ बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। कैजुअल्टी में मरीज को देखने बाद डॉक्टरों ने उसे मेडिसिन विभाग में सेकंड फ्लोर पर भेज दिया। यहां डॉक्टरों ने ईसीजी व अन्य जांच करके उसे मृत घोषित कर दिया।
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मृत्यु प्रमाण पत्र लेने भेजा...पता चला जिंदा है
इसके बाद  मरीज को लेकर कैजुअल्टी में मृत्यु प्रमाण पत्र लेने पहुंचे, लेकिन यहां डॉक्टरों ने दोबारा मरीज को चेक किया तो सांसें चल रही थीं। डॉक्टरों ने मरीज को दोबारा मेडिसिन विभाग में भेजा।

...और बढ़ गया विवाद

Ruckus in KGMU when doctor say patient dead but he was alive.
ईसीजी दिखाते परिवारीजन। - फोटो : amar ujala

इमरान ने रेजीडेंट डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इससे नाराज डॉक्टर मरीज को बाहर खदेड़ने की धमकी देने लगे। दोनों पक्षों के बीच विभाग में विवाद बढ़ गया। रेजीडेंट डॉक्टरों ने महिला मरीज व परिवारीजनों को गार्ड बुलाकर विभाग से बाहर खदेड़ दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों को शांत कराया। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने बाद महिला मरीज को दोबारा भर्ती किया गया।

मशीन पर मढ़ दिया दोष
इमरान ने बताया कि डॉक्टरों ने सुबह करीब साढ़े आठ बजे मरीज की ईसीजी करने बाद उस पर ब्रॉट डेड लिखा था। मामले में लापरवाही उजागर होने बाद डॉक्टरों ने अपनी गलती मानने के बजाय ईसीजी मशीन के गड़बड़ रिपोर्ट देने की बात कही।

चार घंटे दौड़ाते रहे
परिवारीजनों का आरोप है कि सुबह आठ बजे मरीज को लेकर मेडिसिन विभाग में पहुंच गए थे। जहां से मृत घोषित करने बाद मरीज को कैजुअल्टी से विभाग के चक्कर लगाते रहे। मरीज के जिंदा होने पर लापरवाही का आरोप लगाने पर डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया। करीब चार घंटे दौड़ाने के बाद दोपहर करीब 12 बजे के बाद इलाज शुरू हो सका। इस बीच मरीज की हालत और भी बिगड़ गई।

...और मीडियाकर्मियों को भी धमकाया
ट्रॉमा सेंटर में रेंजीडेंट डॉक्टरों की लापरवाही सामने आने के बाद ट्रॉमा सेंटर में मीडियाकर्मियों को भी डॉक्टरों ने धमकाया। कई लोगों के नंबर पर कॉल करके उन्हें वार्ड में आने के लिए बुलाया गया। मना करने पर डॉक्टरों ने देख लेने तक की धमकी दी।

बोले जिम्मेदार- कराएंगे जांच
मामले पर मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. रवि मिश्रा का कहना है कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। मैं अभी बाहर हूं। ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कराई जाएगी। वहीं, मामले पर ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास का कहना है कि जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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