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ठीक से काम नहीं कर रही आरटीई की वेबसाइट, दाखिले के लिए आवेदन करने में अभिभावकों को हो रही परेशानी
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लखनऊ। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया तो शुरू हो गई है, लेकिन वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही। इसकी वजह से बच्चों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रयास के बाद पंजीकरण होता भी है तो अभिभावकों द्वारा भरे गए स्कूलों के विकल्प गायब हो जाते हैं। अभिभावकों का मोबाइल नंबर भी पंजीकृत नहीं हो पा रहा है।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों की कक्षा नर्सरी व एक में दाखिले होते हैं। पंजीकरण के लिए अभिभावकों का मोबाइल नंबर पंजीकृत होना जरूरी है। मोबाइल नंबर फीड करने के बाद जब आवेदन ऑनलाइन सबमिट करते हैं तो वह एरर बताकर बाहर आ जाता है। इसके बाद फिर से पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ रही है। ऐसे में परेशान अभिभावक अपना सारा ब्योरा साइबर कैफे वालों को दे रहे हैं ताकि वे बार-बार प्रयास करते रहें।
प्रिंट में स्कूलों का विकल्प हो रहा गायब
आवेदन के समय एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है। अभिभावकों को जिन विद्यालयों में बच्चों का दाखिला दिलाना होता है, उनका विकल्प भरना होता है। ज्यादा से ज्यादा विकल्प भरने के निर्देश हैं, ताकि लॉटरी में कोई एक स्कूल अलॉट हो सके। वार्ड वार ही स्कूलों का विकल्प आता है। अभिभावकों के अनुसार जब वे विकल्प भरते हैं तो प्रिंट में कई विकल्प गायब हो जा रहे हैं। वहीं बिना लॉगइन के जब विकल्प देखते हैं तो कई विद्यालय प्रदर्शित होता है और जब लॉगइन कर विकल्प देखते हैं तो विद्यालय की संख्या कम हो जाती है। इस तरह की व्यवहारिक समस्या से अभिभावक काफी परेशान हो चुके हैं। समन्वयक एके अवस्थी ने बताया कि वेबसाइट का संचालन एनआईसी कर रहा है। उनको भी लॉगइन करने की अनुमति नहीं है। शिकायतों को एनआईसी तक पहुंचा दिया जाएगा।
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आरटीई के तहत निजी स्कूलों की कक्षा नर्सरी व एक में दाखिले होते हैं। पंजीकरण के लिए अभिभावकों का मोबाइल नंबर पंजीकृत होना जरूरी है। मोबाइल नंबर फीड करने के बाद जब आवेदन ऑनलाइन सबमिट करते हैं तो वह एरर बताकर बाहर आ जाता है। इसके बाद फिर से पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ रही है। ऐसे में परेशान अभिभावक अपना सारा ब्योरा साइबर कैफे वालों को दे रहे हैं ताकि वे बार-बार प्रयास करते रहें।
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प्रिंट में स्कूलों का विकल्प हो रहा गायब
आवेदन के समय एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है। अभिभावकों को जिन विद्यालयों में बच्चों का दाखिला दिलाना होता है, उनका विकल्प भरना होता है। ज्यादा से ज्यादा विकल्प भरने के निर्देश हैं, ताकि लॉटरी में कोई एक स्कूल अलॉट हो सके। वार्ड वार ही स्कूलों का विकल्प आता है। अभिभावकों के अनुसार जब वे विकल्प भरते हैं तो प्रिंट में कई विकल्प गायब हो जा रहे हैं। वहीं बिना लॉगइन के जब विकल्प देखते हैं तो कई विद्यालय प्रदर्शित होता है और जब लॉगइन कर विकल्प देखते हैं तो विद्यालय की संख्या कम हो जाती है। इस तरह की व्यवहारिक समस्या से अभिभावक काफी परेशान हो चुके हैं। समन्वयक एके अवस्थी ने बताया कि वेबसाइट का संचालन एनआईसी कर रहा है। उनको भी लॉगइन करने की अनुमति नहीं है। शिकायतों को एनआईसी तक पहुंचा दिया जाएगा।
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