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संघ चलाएगा पर्यावरण व जल संरक्षण अभियान, ऐसे करें जनजागरण
Mon, 14 Sep 2020 05:21 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 14 Sep 2020 05:21 PM IST
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सरसंघचालक मोहन भागवत
- फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने प्रांतीय पदाधिकारियों से पर्यावरण व जल संरक्षण अभियान पूरी ताकत से चलाने का आग्रह किया है। उन्होंने लोगों में बढ़ रही हताशा व निराशा से उनको बाहर लाने के लिए परिवार प्रबोधन के काम में जुटने का आह्वान भी किया।
वह यहां सरोजनीनगर के आर्यकुल विद्यालय में संघ की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। भागवत ने कहा कि कोरोना काल में सरकारों और समाज ने निम्न आय वर्ग की मदद के लिए सराहनीय काम किए हैं लेकिन समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मध्यम वर्ग के रोजगार की भी चिंता करनी जरूरी है।
मध्यम वर्ग के सामने परिवार की अपेक्षाएं पूरी करने के साथ ही आय पर आए संकट के समाधान की भी चुनौती है। ऐसे में सरकार के साथ समाज के भी सहयोग की जरूरत है। कोरोना के कारण आई परेशानियों से परिवारों में एकाकीपन बढ़ा है। संघ कार्यकर्ता परिवारों में जाएं और उनका प्रबोधन कर आत्मबल बढ़ाएं।
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वह यहां सरोजनीनगर के आर्यकुल विद्यालय में संघ की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। भागवत ने कहा कि कोरोना काल में सरकारों और समाज ने निम्न आय वर्ग की मदद के लिए सराहनीय काम किए हैं लेकिन समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मध्यम वर्ग के रोजगार की भी चिंता करनी जरूरी है।
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मध्यम वर्ग के सामने परिवार की अपेक्षाएं पूरी करने के साथ ही आय पर आए संकट के समाधान की भी चुनौती है। ऐसे में सरकार के साथ समाज के भी सहयोग की जरूरत है। कोरोना के कारण आई परेशानियों से परिवारों में एकाकीपन बढ़ा है। संघ कार्यकर्ता परिवारों में जाएं और उनका प्रबोधन कर आत्मबल बढ़ाएं।
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तो समस्याओं का समाधान संभव
सरसंघ चालक ने कोरोना काल में संघ के स्वयंसेवकों की ओर से किए गए सेवाकार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि संघ के अलावा कई सामाजिक संगठनों, मठ-मंदिरों, गुरुद्वारों ने भी सेवा कार्य किए हैं। कोरोना काल में देश में एक बहुत बड़ी सज्जन शक्ति उभरकर सामने आई है। संघ के कार्यकर्ता इनसे मिलें और प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से काम की योजना बनाएं। शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों तथा ग्रामीण क्षेत्र में किसानों के लिए कार्य करके उनमें आत्मनिर्भरता का भाव पैदा करें।
सरसंघचालक ने प्रांतीय पदाधिकारियों से पेड़ों के संरक्षण के साथ पानी का दुरुपयोग रोकने और लोगों को प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं का कम से कम उपयोग करने के लिए जागरूक करने को कहा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता लोगों को घरों के इर्द-गिर्द पर्यावरण को साफ.-सुथरा रखने के लिए समझाएं।
उन्हें बताएं कि घर के पड़ोस में यदि जगह है तो उस पर पौधे लगाएं। जैविक कचरे से खाद बनाने, परिंदों के लिए घोंसले बनाने तथा पौधरोपण जैसे अभियान शुरू कर उनसे लोगों को इनसे जोड़ें। इन कार्यों से जहां लोगों में आत्मनिर्भरता का भाव पैदा होने के साथ ही संगठन के सरोकारों को भी विस्तार मिलेगा।
सरसंघचालक ने प्रांतीय पदाधिकारियों से पेड़ों के संरक्षण के साथ पानी का दुरुपयोग रोकने और लोगों को प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं का कम से कम उपयोग करने के लिए जागरूक करने को कहा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता लोगों को घरों के इर्द-गिर्द पर्यावरण को साफ.-सुथरा रखने के लिए समझाएं।
उन्हें बताएं कि घर के पड़ोस में यदि जगह है तो उस पर पौधे लगाएं। जैविक कचरे से खाद बनाने, परिंदों के लिए घोंसले बनाने तथा पौधरोपण जैसे अभियान शुरू कर उनसे लोगों को इनसे जोड़ें। इन कार्यों से जहां लोगों में आत्मनिर्भरता का भाव पैदा होने के साथ ही संगठन के सरोकारों को भी विस्तार मिलेगा।
कुटुंब संरचना को सुरक्षित रखना और उसका सरंक्षण करना भी हमारा दायित्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कुटुंब प्रबोधन के विषय में कहा कि कुटुंब संरचना प्रकृति प्रदत्त है इसलिये इसको सुरक्षित रखना व उसका सरंक्षण करना भी हमारा दायित्व है।
सरसंघचालक ने अवध प्रान्त के प्रवास के दूसरे दिन गतिविधियों से जुड़े हुये प्रान्त स्तर के पदाधिकारियों से कहा कि परिवार स्वयं बनाई गयी इकाई नहीं है, यह संरचना प्रकृति प्रदत्त है, इसलिये हमारी जिम्मेदारी उनकी देखभाल करने की भी है।
साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे समाज में परिवार की एक विस्तृत कल्पना है, इसमें केवल पति, पत्नी और बच्चे ही नहीं है बल्कि बुआ, काका, काकी, चाचा, चाची, दादी, दादा आदि यह सब भी प्राचीन काल से हमारी परिवार सकंल्पना में रहे हैं इसलिये परिवार में प्रारंभ काल से ही बच्चों के अंदर संस्कार निर्माण करने की योजना होनी चाहिए। उनके अंदर अतिथि देवो भवः का भाव उत्पन्न करना चाहिये और समय-समय पर उन्हें महापुरुषों की कहानियां व उनके संस्मरण भी सुनाये व सिखाये जाने चाहिये।
समाजिक समरसता के विषय में कहा कि कोई भी ऐसी जाति नहीं है जिसमें श्रेष्ठ, महान तथा देशभक्त लोगों ने जन्म नहीं लिया हो। मंदिर, शमशान और जलाशय पर सभी जातियों का समान अधिकार है। महापुरुष केवल अपने श्रेष्ठ कार्यों से महापुरुष हैं और उनको उसी दृष्टि से देखे जाने का भाव भी समाज में बनाये रखना बहुत आवश्यक है। कहा गौ आधारित व प्राकृतिक खेती के लिये भी समाज को जागृत व प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने पिछले दिनों पर्यावरण गतिविधि और हिन्दू आध्यात्मिक एंव सेवा फाउंडेशन द्वारा किये गये प्रकृति वंदन कार्यक्रम की सराहना की तथा कार्यकर्ताओं से समाज में देशहित, प्रकृति हित में किसी भी सामाजिक सगंठन,धार्मिक संगठन द्वारा किये जाने वाले कार्य में संघ के स्वयंसेवको को बढकर सहयोग करना चाहिये।
बैठक में कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, गौ सेवा, ग्राम विकास, पर्यावरण, धर्म जागरण, और सामाजिक सद्भाव गतिविधियों से जुड़े हुये कार्यकर्ता उपस्थिति थे।
सरसंघचालक ने अवध प्रान्त के प्रवास के दूसरे दिन गतिविधियों से जुड़े हुये प्रान्त स्तर के पदाधिकारियों से कहा कि परिवार स्वयं बनाई गयी इकाई नहीं है, यह संरचना प्रकृति प्रदत्त है, इसलिये हमारी जिम्मेदारी उनकी देखभाल करने की भी है।
साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे समाज में परिवार की एक विस्तृत कल्पना है, इसमें केवल पति, पत्नी और बच्चे ही नहीं है बल्कि बुआ, काका, काकी, चाचा, चाची, दादी, दादा आदि यह सब भी प्राचीन काल से हमारी परिवार सकंल्पना में रहे हैं इसलिये परिवार में प्रारंभ काल से ही बच्चों के अंदर संस्कार निर्माण करने की योजना होनी चाहिए। उनके अंदर अतिथि देवो भवः का भाव उत्पन्न करना चाहिये और समय-समय पर उन्हें महापुरुषों की कहानियां व उनके संस्मरण भी सुनाये व सिखाये जाने चाहिये।
समाजिक समरसता के विषय में कहा कि कोई भी ऐसी जाति नहीं है जिसमें श्रेष्ठ, महान तथा देशभक्त लोगों ने जन्म नहीं लिया हो। मंदिर, शमशान और जलाशय पर सभी जातियों का समान अधिकार है। महापुरुष केवल अपने श्रेष्ठ कार्यों से महापुरुष हैं और उनको उसी दृष्टि से देखे जाने का भाव भी समाज में बनाये रखना बहुत आवश्यक है। कहा गौ आधारित व प्राकृतिक खेती के लिये भी समाज को जागृत व प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने पिछले दिनों पर्यावरण गतिविधि और हिन्दू आध्यात्मिक एंव सेवा फाउंडेशन द्वारा किये गये प्रकृति वंदन कार्यक्रम की सराहना की तथा कार्यकर्ताओं से समाज में देशहित, प्रकृति हित में किसी भी सामाजिक सगंठन,धार्मिक संगठन द्वारा किये जाने वाले कार्य में संघ के स्वयंसेवको को बढकर सहयोग करना चाहिये।
बैठक में कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, गौ सेवा, ग्राम विकास, पर्यावरण, धर्म जागरण, और सामाजिक सद्भाव गतिविधियों से जुड़े हुये कार्यकर्ता उपस्थिति थे।