'देश को तोड़ना चाहते हैं आरएसएस प्रमुख'
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आरक्षण पर पुनर्विचार करने के लिए कमेटी बनाने के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सुझाव पर दलितों, पिछड़ों की नुमाइंदगी करने वाले नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। सामाजिक न्याय आंदोलन के संयोजक पूर्व सांसद इलियास आजमी, पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद, पूर्व कुलपति अनीस अंसारी और अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार मौर्य ने कहा कि संघ प्रमुख देश को तोड़ना चाहते हैं। इसीलिए वे जातीय युद्ध के बीज बो रहे हैं।
सामाजिक न्याय आंदोलन से जुड़े इन नेताओं ने दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों को आबादी के अनुरूप आरक्षण देने की मांग की। ये सभी बुधवार को यहां पत्रकारों से मुखातिब थे। आजमी ने कहा कि मोहन भागवत ने संघ का छिपा एजेंडा जल्दबाजी में जाहिर कर दिया है।
उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार को आरक्षण की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। वे पिछड़ों और दलितों को मौलिक अधिकारों से वंचित करना चाहते हैं। वे आरक्षण के नाम पर एक जाति को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का खतरनाक खेल खेल रहे हैं। यह देश को तोड़ने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से ही आरक्षण के खिलाफ है। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का असली मकसद मंडल कमीशन की मुखालफत था। वीपी सिंह सरकार को उन्होंने मंडल कमीशन के कारण ही गिराया था। भाजपा और कांग्रेस ने संसद में मंडल कमीशन की मुखालफत की थी। उन्होंने कहा कि संघ और भाजपा की साजिश के खिलाफ प्रदेश भर में अभियान चलाया जाएगा।
नौकरियों में 12 फीसदी दलित, 4.9 पीसदी पिछड़े
आजमी ने कहा कि आजादी के बाद अनुसूचित जाति, जनजातियों को नौकरियों में 23 प्रतिशत के मुकाबले मात्र 12 फीसदी प्रतिनिधित्व मिल सका है।
मंडल कमीशन की 25वीं वर्षगांठ पूरी होने को है, लेकिन ओबीसी को 27 फीसदी के विपरीत मात्र 4.9 प्रतिशत भागीदारी ही मिल पाई है। वीरेंद्र कुमार मौर्य ने कहा कि जनगणना के जातीय आंकड़े जारी कर दलितों, पिछड़ों का आरक्षण कोटा उनकी आबादी के बराबर किया जाए।
नौकरियों में आरक्षण की सीमा तय नहीं : दद्दू
पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने कहा कि दुष्प्रचार किया जाता है कि संविधान में नौकरियों में आरक्षण लागू होने की समय सीमा दस साल तय की गई थी। संसद और विधानमंडलों में समयबद्ध आरक्षण लागू किया गया था।
इस पर 10 साल बाद पुनर्विचार होना था लेकिन केंद्र सरकारें न केवल इसकी अवधि बढ़ा देती हैं, वरन 2011 की जनगणना के आधार पर एससी-एसटी लोकसभा सदस्यों की संख्या 119 से बढ़ाकर 131 कर दी। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था में समयबद्धता नहीं है। लिहाजा इसका समय बढ़ाने का मतलब ही नहीं है। यह दलितों, पिछड़ों का संवैधानिक अधिकार है।
दलित, पिछड़ी लीडरशिप सीबीआई के जरिये बंधक
दद्दू प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार ने कथित दलित और पिछड़ी लीडरशिप को सीबीआई के जरिये बंधक बना लिया है। मायावती और मुलायम सिंह ने उनके सामने सरेंडर कर दिया है। इलियास आजमी ने कहा कि बिहार चुनाव में सपा ने महागठबंधन से अलग होने का फैसला प्रधानमंत्री मोदी के दबाव में ही किया है।
पिछड़े मुस्लिम भी मुख्य धारा से दूर : अंसारी
सेवानिवृत्त आईएएस और पूर्व कुलपति अनीस अंसारी ने कहा कि मुसलमानों में 81 से 82 फीसदी पिछड़े, तीन प्रतिशत दलित और 15 फीसदी सवर्ण हैं। सत्ता में भागीदारी और नौकरियों में सवर्णों का दबदबा है।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं मुसलमानों के लिए 20 स्थान हों तो 17 पर पसमांदा समाज को लाभ मिलना चाहिए। अंसारी ने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने और दलित मुस्लिमों को भी रिजर्वेशन का लाभ देने की मांग की।