दलितों-पिछड़ों को जोड़ने के लिए 'एक मंदिर एक श्मशान अभियान' चलाएगा संघ, ये है पूरा प्लान
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समग्र हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी दलितों और पिछड़ों को जोड़ने के लिए सक्रिय हो गया है। सामाजिक समरसता मंच के सहारे उसने इस वंचित तबके में पकड़ और पैठ बनाने का फैसला किया है। इसके तहत दलित और पिछड़ी जातियों की आस्था और श्रद्धा के केंद्रों को सरोकारी बनाने के साथ इस समाज के महापुरुषों की जयंतियों को भव्य तरीके से मनाया जाएगा।
कहीं मंदिर में प्रवेश को लेकर तो कहीं पानी लेने को लेकर उठ रहे विवादों के मद्देनजर संघ ने एक मंदिर, एक जलस्रोत और एक श्मशान को लेकर अभियान चलाने का भी फैसला किया है। इसको लेकर प्रदेश के सभी गांवों का सर्वे कराया जाएगा। जिन गांवों में इन स्थानों पर वंचित समाज के प्रवेश को लेकर कोई दिक्कत होगी, उसे दूर कराया जाएगा।
सामाजिक समरसता मंच के अखिल भारतीय संयोजक श्याम प्रसाद ने रविवार को यहां विश्व संवाद केंद्र में अवध प्रांत के सभी विभाग, जिलों और खंड संयोजकों की बैठक में इस रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के बीच संघ की पहुंच बढ़ाने के नजरिये से अगस्त के अंत में फैजाबाद के डॉ. राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय में होने जा रहे आयोजन की जानकारी भी दी।
महिलाओं की टोलियां भी बनेंगी
महिला स्वयंसेवकों की अलग से टोलियां बनाकर वंचित समाज की महिलाओं को जोड़ने के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। संघ ने किशोरी पूजन कार्यक्रम भी शुरू करने का फैसला किया है। महिलाएं किशोरियों को फल, नारियल, मिठाई देकर गोद भराई करेंगी। वंचित समाज की किशोरियों को मुफ्त सेनेटरी पैड भी उपहार में दिए जाएंगे।
सेवा कार्यों का होगा सम्मान
सेवा कार्यों से जुडे़ वंचित समाज के बुजुर्गों को सम्मानित करने की भी योजना बनाई गई है। हर जिले में मोची, दर्जी, धोबी, कहार, लोहार, पटवा, माली, दूधिया, वाल्मीकि, धानुक और सोनकर जैसी सेवा जातियों से जुड़े बुजुर्गों को सार्वजनिक आयोजन कर सम्मानित किया जाएगा।
त्योहारों व जयंतियों पर आयोजित किया जाएगा सामाजिक समरता भोज
त्योहारों और जयंतियों पर संघ वंचित समाज के साथ सामाजिक समरसता भोज करेगा। इसमें सार्वजनिक जीवन से जुड़े समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे। समरसता मंच के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक गांव में सामाजिक केंद्र बनाए जाएंगे।
इन केंद्रों पर साप्ताहिक व पाक्षिक मिलन और सहभोज के कार्यक्रम होंगे। संघ ने समरसता मंच को भी कुटुंब प्रबोधन के कार्यक्रमों में जुटाने का निर्णय किया है। संघ के पांच कार्यक्रमों में कुटुंब प्रबोधन के अलावा गो संवर्धन, धर्म जागरण, ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता शामिल हैं।