दिल्ली हार के बाद पार्टी को नहीं खुद को भी बदलेगा संघ!
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भाजपा की सेहत सुधारने से पहले अपने ढांचे को पूरी तरह दुरुस्त करने का फैसला किया है। तय किया गया है कि जमीनी सच्चाई को सामने रखकर उसके अनुसार समस्याओं के समाधान के उपाय तलाशे जाएं।
इसके तहत शाखाओं से लेकर संगठनात्मक कामकाज का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा और व्यावहारिक स्थिति को सामने रखकर कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसके लिए कानपुर में 14 फरवरी से शुरू हो रही संघ की बैठक में पूरी जानकारी जुटाने की तैयारी है। पांच दिन चलने वाली इस बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत खुद मौजूद रहेंगे।
बैठक में आने वाले लोगों से संघ के कामकाज की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। मसलन किस प्रांत में नियमित, साप्ताहिक, शाम में लगने वाली शाखाओं की संख्या कितनी है। ऐसी कितनी शाखाएं हैं, जिन पर प्रतिदिन कम से कम औसतन 50 लोग रहते हों।
शिक्षा, सेवा, सामाजिक चेतना, सामाजिक समस्याओं पर संघ से जुड़े प्रकल्पों के कामकाज की व्यावहारिक स्थिति क्या है। सहयोगी और संबद्ध संगठनों के कामकाज के बारे भी आंकड़ा जुटाया जाएगा।
शुक्रवार को उन्नाव में पूर्व प्रचारकों की बैठक बुलाने का मकसद भी इसी से जुड़ा है। इसमें भी सरसंघचालक अलग-अलग क्षेत्रों में संघ के कामकाज की सच्चाई समझने की कोशिश करेंगे।
...इसलिए सामने आ रही हैं समस्याएं
उसी आधार पर कानपुर में सामने आने वाली सूचनाओं का विश्लेषण होगा और इनके निष्कर्षों के आधार पर संगठन के कामकाज को दुरुस्त करने की कार्ययोजना का खाका खींचकर उस पर काम किया जाएगा।
संघ के एक क्षेत्र स्तर के पदाधिकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के कई पदाधिकारियों का मानना है कि संघ के कामकाज के आंकड़ों व जमीनी हकीकत में कहीं न कहीं गड़बड़ी है।
भले ही कागजों पर शाखाओं का आंकड़ा बढ़ता जा रहा हो, लेकिन समाज के बीच इनकी प्रभावी मौजूदगी नहीं दिख रही है। इसकी वजह से भी काफी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। संघ के समर्थकों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में परस्पर संवाद व संपर्क मजबूत नहीं है।
युवा पीढ़ी को जोड़े रखना बड़ी चुनौती
बदलते वक्त में युवाओं की सोच और मुद्दों को अलग तरह से देखने, समझने और विश्लेषण करने का नजरिया बदला है। ऐसे में इस पीढ़ी को संघ से जोड़ने के लिए भी बहुत सावधानी से काम करने की जरूरत है।
संघ के रणनीतिकारों का मानना है कि एक बार शाखाएं प्रभावी तरीके से व्यवस्थित हो गईं तो बाकी समस्याओं के समाधान में बहुत ज्यादा मगजमारी नहीं करनी पड़ेगी। भाजपा हो या अन्य संगठन, संघ का काम ठीक होने से बाकी काम स्वत: ठीक हो जाएंगे।