राम मंदिर के लिए हर संसदीय क्षेत्र में धर्मसभाएं करेगा संघ परिवार, हर हिंदू तक पहुंचने की कोशिश
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श्रीराम मंदिर निर्माण पर अयोध्या, नागपुर और बंगलुरू में एक साथ धर्मसभाएं कर चुके संघ परिवार ने अब गांव-गांव माहौल बनाने की तैयारी की है। दिल्ली में 9 दिसंबर को चौथी बड़ी धर्मसभा की तैयारियों के बीच हर संसदीय क्षेत्र में इसे आयोजित करने का फैसला किया गया है। इसकी शुरुआत लखनऊ से हो सकती है।
रणनीतिकारों की कोशिश गांव-गांव ही नहीं बल्कि हर हिंदू के घर तक पहुंचने की है। इसलिए संसदीय क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में लोगों को बुलाने के लिए संघ परिवार की टोलियां घर-घर जाकर आमंत्रण के रूप में अक्षत देंगी।
संसदीय क्षेत्रों में धर्मसभाएं करने के फैसले को मंदिर मुद्दे पर गांव-गांव हिंदुत्व की जमीन मजबूत बनाने की संघ परिवार की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी कोशिश है कि हिंदुत्व के एजेंडे को किसी न किसी तरह लोकसभा चुनाव तक धार दी जाती रहे ताकि लोगों को भाजपा सरकार के मंदिर निर्माण की तरफ बढ़ने का संदेश दिया जा सके। साथ ही इसके पक्ष में माहौल बनाकर सार्वजनिक रूप से बताया जा सके कि हिंदुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम मंदिर मुद्दे पर ज्यादा टालमटोल के नतीजे गंभीर हो सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक इन धर्मसभाओं की शुरुआत 2 दिसंबर को लखनऊ से हो सकती है। हालांकि, यह तारीख अभी अंतिम रूप से तय नहीं है। पर, ज्यादा संभावना इसी तारीख पर सभा होने की है। प्रदेश में 80 धर्मसभाएं होंगी।
दिल्ली में 9 दिसंबर की सभा की तैयारियां
विहिप ने दिल्ली में 9 दिसंबर को होने वाली धर्मसभा की तैयारियां तेज कर दी हैं। अयोध्या की की तर्ज पर पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तैयारियों की बागडोर पूरी तरह अपने हाथ में ले रखी है। जगह-जगह बैठकें हो रही हैं। यह भी फैसला किया गया है कि धर्मसभाएं पहले पूर्वी उप्र में हों ताकि पश्चिमी उप्र के कार्यकर्ताओं का पूरा ध्यान दिल्ली रैली पर केंद्रित रहे।
सभाओं के बाद सांसदों से करेंगे संपर्क
विश्व हिंदू परिषद अवध प्रांत के संगठन मंत्री भोलेन्द्र के मुताबिक, संसदीय क्षेत्रों में धर्मसभाओं के बाद सांसदों से संपर्क और उनसे कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह किया जाएगा।
हर स्थान पर किसी न किसी संत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल वहां के सांसद से मिलकर उसे संसद में कानून बनाने में सहयोग करने का आग्रह पत्र सौंपेगा। इस पर स्थानीय लोगों के हस्ताक्षर भी होंगे।
मठ-मंदिरों में होंगे अनुष्ठान
इसके बाद मठ-मंदिरों में सामूहिक अनुष्ठान का कार्यक्रम रखा गया है। ये अनुष्ठान गीता जयंती यानी 18 से 26 दिसंबर तक चलेंगे। सभी जगह अनुष्ठान में स्थानीय लोगों को बुलाकर उनके साथ पूजा-अर्चना करके मंदिर निर्माण की राह में खड़ी बाधाएं दूर करने की प्रार्थना की जाएगी।