संघ के एजेंडे में पहले हिंदू, बाकी बाद में
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संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ‘भैयाजी’ ने सोमवार को कहा कि हमारा एजेंडा हिंदुओं के मान-सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा और हिंदू हितों की चिंता करना है। बाकी के लिए संघ बाद में सोचेगा।
संघ का मानना है कि जब तक हिंदू समाज शक्तिशाली व सामर्थ्यवान नहीं बनेगा, तब तक असली परिवर्तन नहीं आएगा। भैयाजी जोशी यहां शुक्रवार से रविवार तक चली संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
हिंदू कौन है? इस सवाल पर भैयाजी जोशी ने कहा कि जो खुद को हिंदू मानते हैं, संघ भी उन्हें हिंदू मानता है। हिंदुओं के अलावा अगर कोई अन्य आए तो?
उन्होंने कहा, जो आएंगे उनका स्वागत है। आए भी हैं और आ भी रहे हैं। पर, इस समय हमारा पूरा फोकस हिंदू समाज को मजबूत बनाने और उनमें सामाजिक समरसता पैदा करने पर है। इसके लिए काम किया जा रहा है।
आरोपों की परवाह नहीं करता संघ
इस सवाल पर कि संघ पर सांप्रदायिक संगठन होने का आरोप लगता है, उन्होंने कहा कि संघ प्रचार माध्यमों या अन्य लोगों के आरोपों का ध्यान करके कोई काम नहीं करता। कुछ तत्व हैं, जिन्हें हिंदू समाज का स्वाभिमान से जीना अच्छा नहीं लगता।
ऐसे ही तत्व निहित स्वार्थ में संघ पर मनगढ़ंत आरोप लगाते हैं, पर संघ इसकी परवाह नहीं करता। संघ का भरोसा समाज के समर्थन पर है। जिस तरह हमारा काम बढ़ रहा है, उससे यह बात साबित हो जाती है कि समाज ने हमारे ऊपर लगने वाले आरोपों पर भरोसा नहीं किया है।
एक साल के भीतर हमसे एक लाख से अधिक नए लोग जुड़े हैं। यह संख्या संघ पर आरोप लगाने वालों को जवाब है।
एक साल में संघ की 4500 शाखाएं बढ़ीं
सरकार्यवाह ने कहा कि दूसरे लोगों की तरह संघ की अपेक्षा है कि सरकार विदेशों में जमा देश का काला धन वापस लाए। यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। आम लोगों को इससे कोई वास्ता नहीं कि इसे वापस लाने या नाम बताने में कौन सी तकनीकी बाधाएं हैं।
आम लोगों को तो बस इससे मतलब है कि सरकार अपना वादा पूरा करे। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में पिछले तीन वर्षों के दौरान संघ के कार्य विस्तार के नतीजों की समीक्षा हुई। समीक्षा के दौरान निकले निष्कर्षों से संघ संतुष्ट है।
लगभग एक साल में पूरे देश में संघ की शाखाओं की संख्या लगभग 4500 बढ़ी है। गांव के जरिये गांव का विकास का प्रयोग देश के 250 गांवों तक पहुंचा है। सेवा कार्यों में जुटे स्वयंसेवकों की संख्या 60 हजार से ऊपर हो गई है।