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यूपी: रालोद के प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव में टिकट बेचने का आरोप लगाकर पद से इस्तीफा दिया
Sun, 20 Mar 2022 02:04 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 20 Mar 2022 02:04 PM IST
सार
राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने कहा कि सपा गठबंधन अपनी गलतियों से जीता हुआ चुनाव हार गया।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद ने राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह को पत्र भेजकर विधानसभा चुनाव में टिकट बेचने और दलितों-अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कई सवाल उठाते हुए जयंत और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से जवाब मांगा है। कहा कि 21 मार्च को होने वाली बैठक में इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया तो इस पत्र को उनका पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा माना जाए। राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहें तो उन्हें पार्टी से निष्कासित भी कर सकते हैं।
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पत्र में मसूद ने कहा है कि संगठन के कार्यों को देखते हुए पश्चिम, पूरब, बुंदेलखंड और मध्य में भी सीटें देने का वादा किया गया था। 12 जनवरी को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात हुई, लेकिन उन्होंने सीटों पर वार्ता करने से मना कर दिया। बाद में पूरब के प्रत्याशियों से सपा कार्यालय में तीन से पांच करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा गया। रुधौली, पलिया, चुनार, हाटा आदि सीटों पर अच्छी तैयारी के बाद भी सपा अध्यक्ष ने टिकट नहीं दिया। ओम प्रकाश राजभर की ओछी भाषा से ध्रुवीकरण हुआ। शिवपाल का अपमान किया गया। गठबंधन में शामिल कृष्णा पटेल को भी अपमानित किया गया, जिससे पटेल वोट छिटक गया।
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पार्टी बेचने का आरोप
मसूद ने कहा कि जयंत ने आश्वासन दिया था कि 36 सीटों में पूरब में तीन, लखीमपुर में एक और बुंदेलखंड व प्रयागराज में एक-एक सीट दी जाएगी। गठबंधन के तहत करीब 10 सपा नेता रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़े, लेकिन सपा ने रालोद के एक भी नेता को अपने चुनाव चिह्न पर नहीं लड़ाया। उन्होंने जयंत चौधरी पर आरोप लगाया है कि मांट व सिवालखास में पार्टी ने सीट छोड़ने से मना कर दिया था, लेकिन आपके आदेश पर मांट में दावेदारी वापस ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह क्षेत्र की सीटें बेचने से जाट मत तत्काल आधे रह गए। इसकी आपको जानकारी दी गई। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मसूद ने आरोप लगाया कि धन संकलन के आगे पार्टी बेच दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश के सुप्रीमो कल्चर को अपनाते हुए संगठन को दर किनार किया गया।
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