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कैग रिपोर्ट में खुलासा : प्राधिकरणों ने नियम ताक पर रख बिल्डरों व ठेकेदारों को पहुंचाया लाभ
Fri, 20 Aug 2021 03:12 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 20 Aug 2021 03:12 PM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक हाईटेक टाउनशिप नीति-2003 के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. को 1765 एकड़ भूमि के अनुमोदित ले-आउट पर 34.92 करोड़ के नगरीय विकास शुल्क (सीडीसी) का भुगतान करने की छूट दी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद, लखनऊ और मेरठ विकास प्राधिकरणों ने हाईटेक सिटी के नाम पर विकासकर्ताओं (बिल्डरों) और ठेकेदारों को नियमों को ताक पर रखकर लाभ पहुंचाया। इससे प्राधिकरणों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इसका खुलासा बृहस्पतिवार को सदन में रखी गई वर्ष 2018-19 की कैग रिपोर्ट में हुआ है।
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रिपोर्ट के मुताबिक हाईटेक टाउनशिप नीति-2003 के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. को 1765 एकड़ भूमि के अनुमोदित ले-आउट पर 34.92 करोड़ के नगरीय विकास शुल्क (सीडीसी) का भुगतान करने की छूट दी। इसका आधार यह बताया कि 2007 में सीडीसी की दर लागू नहीं होती, क्योंकि बिल्डर और एलडीए के साथ एमओयू 2005 में किया गया था। उसी समय 216 एकड़ के ले-आउट पर 170 करोड़ रुपये पर शुल्क लिए बिना ही उच्चतर एफएआर को मंजूरी दे गई। इस तरह एलडीए को 170 करोड़ का नुकसान पहुंचा।
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एलडीए ने जानकीपुरम के सेक्टर जे योजना में सृष्टि और स्मृति अपार्टमेंट के निर्माण के लिए ठेकेदार से 82.84 करोड़ और 92.23 करोड़ के दो अनुबंध किए थे। इसमें ठेकेदार से 10 प्रतिशत के स्थान पर मात्र दो प्रतिशत ही जमानत राशि जमा करने की शर्त रखी। एलडीए के मानक के मुताबिक 10 के बजाय सिर्फ दो प्रतिशत जमानत राशि पर ही ब्याज मिला। यानी शेष 8 प्रतिशत जमानत राशि पर मिलने वाले करीब 2.40 करोड़ ब्याज का नुकसान उठाना पड़ा। इसी प्रकार जेपीएनआईसी के निर्माण में भी पाइल के निर्माण में ठेकेदार को 1.41 करोड़ रुपये अनुचित लाभ देने की बात कही गई। वहीं, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा बिल्डर को 2.51 करोड़ का लाभ दिया गया। अधिकारियों ने अग्रवाल एसोसिएट प्रमोटर्स लि. से वसूली नहीं की।
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एमडीए वीसी के बंगले पर 2.94 करोड़ खर्च
रिपोर्ट में मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के वीसी के आवास निर्माण पर 2.94 करोड़ रुपये खर्च करने को निरर्थक बताया गया। कहा गया कि वीसी टाइप-5 श्रेणी (2426 वर्ग फीट) का आवास पाने के पात्र हैं, लेकिन उन्होंने बोर्ड बैठक में अपने लिए 21,528 वर्ग फीट क्षेत्रफल में आवास बनाने का प्रस्ताव पारित कराया। दूसरी बोर्ड बैठक में शताब्दी नगर आवासीय योजना में 50,208 वर्ग फीट में आवास बनाने का प्रस्ताव पारित करा लिया। इसकी कीमत 5.36 करोड़ थी। प्रस्तावित आवास में मनोरंजन क्षेत्र में स्वीमिंग पुल, जिम, हेल्थ क्लब, स्टीम, सौना, स्नूकर व टेबल टेनिस जैसी सुविधाएं थीं। जबकि 20 हजार वर्ग फीट में एक तीन मंजिला आवास बनाने का आगणन तैयार किया गया था। बोर्ड की अगली बैठक में इतने मंहगे आवास पर आपत्ति जताते हुए आवास निर्माण को रोक दिया गया। तब तक इस पर 2.94 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। इस प्रकार प्राधिकरण कोष से खर्च यह धनराशि बेकार हो गई।
पीएसयूज ने उठाई 14 हजार 441 करोड़ की हानि
विधानमंडल में बृहस्पतिवार को रखी गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयूज) ने 14 हजार 441 करोड़ की हानि उठाई। 32 अकार्यरत पीएसयूज को बंद करने के संबंध में सरकार उचित निर्णय ले सकती है।
31 मार्च, 2019 तक यूपी में भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की लेखा परीक्षा के क्षेत्राधिकार में 114 पीएसयूज थे। 31 दिसंबर, 2019 तक के नवीनतम लेखाओं के आधार पर इनमें से 35 पीएसयूज के वित्तीय जांच में शामिल किया गया। इन्होंने 31 दिसंबर तक 71.473 करोड़ का टर्न ओवर दर्ज किया। जबकि 14 हजार 441.44 करोड़ की हानि उठाई। रिपोर्ट में यह भी आया कि 31 मार्च, 2019 को 46 राज्य पीएसयूज अकार्यरत थे। इनमें ऊर्जा के दो पीएसयूज का परिसमापन हो गया था। अन्य 12 परिसमापन के अधीन थे। कैग ने कहा है कि बाकी 32 पीसएयूज को बंद करने के संबंध में सरकार निर्णय ले सकती है।