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रिटायरमेंट पर IAS ने किए कई खुलासे, ‘जमीर बेचता तो मैं भी वजीर बन जाता’

Sat, 01 Oct 2016 04:33 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 01 Oct 2016 04:33 PM IST
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retired ias anil kumar gupta interview
अन‌िल कुमार गुप्ता - फोटो : amar ujala
सूबे के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी, राजस्व परिषद के अध्यक्ष, यूपी आईएएस एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल कुमार गुप्ता 37 साल लंबी प्रशासनिक सेवा पूरी कर शुक्रवार को रिटायर हो गए। सेवाकाल में तमाम उतार-चढ़ाव देखने वाले अनिल गुप्ता अफसरशाही की सबसे बड़ी कुर्सी मुख्य सचिव पद के स्वाभाविक दावेदार होने के बावजूद, वहां तक नहीं पहुंच सके। 
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उनसे जूनियर दो-दो अफसरों को मौका मिल गया। 1979 बैच के आईएएस अधिकारी गुप्ता रिटायरमेंट के दिन बेबाकी से बोले- ‘जमीर बेच देता तो मैं भी वजीर बन जाता।’ कभी सरकार के बेहद ‘क्लोज’ माने जाने वाले गुप्ता डेढ़ साल से साइडलाइन पोस्टिंग के तौर पर राजस्व परिषद में तैनात थे। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :
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लंबी प्रशासनिक सेवा पूरा करते हुए कैसा अनुभव कर रहे हैं?
भारतीय प्रशासनिक सेवा बहुत चुनौतीपूर्ण सेवा है। 37 साल लंबी सेवा के बावजूद दामन पर कोई दाग नहीं है। बेहद संतोष महसूस कर रहा हूं।

कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती किस घटना को मानते हैं?
वर्ष 2002 की बात है। मैं फैजाबाद का कमिश्नर था। विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में शिलापूजन का एलान कर दिया था। शीर्ष स्तर से संदेश दिया गया कि साइनाइड बुझी सुई का इस्तेमाल कर विहिप के वरिष्ठ नेताओं की हत्या की जा सकती है। 
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पैरामिलिट्री फोर्स के 10 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए थे। 65 एसएसपी, 25 डीआईजी व तमाम अन्य वरिष्ठ अधिकारी थे। पूरी दुनिया की मीडिया अयोध्या में थी। बिना एक लाठी फटकारे 50 हजार कारसेवकों को वापस उनके गंतव्य भेजने में सफलता मिली।

खराब ट्रांसफार्मर वाली फैक्ट्री को ब्लैकल‌िस्ट से हटाने का था दवाब

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सीएम ने द‌िखाया भरोसा - फोटो : amar ujala
2012 में जब सपा सरकार आई तो आपको तमाम अहम जिम्मेदारियां दी गईं।  एक साल के भीतर ही अचानक आपको हटाकर राजस्व परिषद भेज दिया गया?

सरकार ने मुझ पर भरोसा किया और मैंने औद्योगिक महकमे को नई निवेश नीति दी जिसके आधार पर आज भी काम हो रहा है। बिजली महकमे में नए सब स्टेशन लगाने का काम मेरे समय में ही एपी मिश्रा को सौंपा गया। मिश्रा को एमडी बनाने का काम मेरे समय में हुआ। 

शुरुआत में इंडस्ट्री व औद्योगिक विकास से हटाए जाने पर मैं भी हतप्रभ था। वजह, मुझे मुख्यमंत्री का पूरा विश्वास हासिल था। धीरे-धीरे कुछ बातें सामने आईं। पता चला कि मेरी कार्यप्रणाली, सीएम के प्रति निष्ठा व ईमानदारी से काम करने की शैली ऐसे तत्वों को पसंद नहीं आई थी जिनके अनुचित कार्यों को मैंने नहीं किया था। 

खराब ट्रांसफार्मर सप्लाई करने वाली फैक्ट्री ब्लैकलिस्ट की गई थी। मेरे ऊपर उसका  ब्लैकलिस्ट रद्द करने का दबाव था। सीएम के स्पष्ट निर्देश थे कि जब तक ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता ठीक नहीं होती, कोई उदारता नहीं दिखाई जानी है। मैंने ब्लैकलिस्ट का आदेश समाप्त नहीं किया। इस लॉबी ने कहां से तीर चलाया, किसे पकड़ लिया, मैं नहीं जानता। मेरे हटने के बाद उन सभी की ब्लैकलिस्टिंग रद्द कर दी गईं। इसके अलावा मेरे काम करने के तरीके से संवर्ग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी प्रतिस्पर्धा रखते थे। वे भी सक्रिय थे।

सीएम से कई बार पूछी गलती

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अन‌िल कुमार गुप्ता

तो क्या मुख्यमंत्री शुरुआती दौर में ही इस तरह दबाव में आ गए थे?
नहीं। ट्रांसफार्मर लॉबी खुद सीएम को प्रभावित नहीं कर सकती थी। हमें लगता है कि उन्होंने ऐसा माध्यम ढूंढा जो पॉलिटिकल मास्टर को प्रभावित करने में सफल रहा।  

क्या आपने मुख्यमंत्री से कभी खुद को हटाए जाने की वजह जानने की कोशिश की?
हां, मैंने कई बार मुख्यमंत्री जी से पूछा कि मेरी गलती क्या थी? हर बार उन्होंने कहा कि कोई गलती नहीं। आप अच्छा काम कर रहे हैं। हम आपके साथ हैं। मेरा अनुमान है कि कुछ औद्योगिक घरानों और राजनीतिक स्तर के लोगों (पॉलिटिकल मास्टर) ने उन्हें मुझे हटाने के लिए मजबूर किया। मुख्यमंत्री नाखुश होते तो फिर मुझे प्रमुख सचिव गृह न बनाते। वह भी तब जब लोकसभा चुनाव सिर पर हो।

वरिष्ठता के आधार पर आप मुख्य सचिव के स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे थे। न बन पाने की क्या वजहें रहीं?
हमें लगता है कि इसकी कोई विशेष वजह नहीं थी। आलोक रंजन जी जब रिटायर हुए, उसके बाद मेरा सिर्फ तीन महीने का कार्यकाल बचा था। कोई भी सरकार चाहेगी कि जो भी मुख्य सचिव बने, वह चुनाव तक रहे। सर्वोच्च स्तर पर सोचा गया होगा कि मुख्य सचिव उसे बनाया जाए जो कम से कम अप्रैल 2017 तक रहे।

अभी तक हाथों पर प्रत‌िबंध था अब जमकर करूंगा ट्वीट

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तलवे चाटने की आदत नहीं...
आपने समय-समय पर आईएएस संवर्ग को आईना दिखाया। आज इसे कहां खड़ा पाते हैं?
गुरुवार शाम आईएएस एसोसिएशन से विदाई समारोह किया था। मैंने वहां कहा कि आईएएस संवर्ग अपनी कर्मठता, बुद्धिमानी और कार्यकुशलता के लिए मशहूर था। आज लगता है कि आपसी द्वंद्व बहुत है। कुछ अधिकारियों में सत्यनिष्ठा का प्रारंभिक स्तर से अभाव नजर आता है। हमारा मानना है कि आईएएस अफसरों को ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए मूल सेवा के गुणों व शर्तों से समझौता नहीं करना चाहिए।

राजस्व परिषद को सजा का सेंटर कहा जाता है। आपको ज्यादा समय यहीं बिताना पड़ा?
राजस्व परिषद से बेहतर संस्थान कोई नहीं, पर इसका बुरा हाल था। अफसरों के लिए गाड़ियां तक नहीं थीं। बैठने लायक कमरे नहीं थे। जिनकी यहां पोस्टिंग होती, वे समय काटने के लिए आते थे। पिछले डेढ़ साल में राजस्व परिषद का चेहरा बदल गया है। सुंदर ऑफिस बन गए हैं। अच्छा माहौल है। सभी सुविधाएं हैं। अब कोई इसे सजा का सेंटर नहीं कह सकता।

आपने ट्वीट के जरिए खूब निशाने साधे...
अभी तक हाथ, पैर, जुबान पर प्रतिबंध था। अब कोई संकोच नहीं। खूब ट्वीट करूंगा। रचनात्मक काम करुंगा।
 

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अन‌िल कुमार गुप्ता - फोटो : amar ujala
आपने पिछले दिनों ट्वीट किए...तलवे चाटने की आदत नहीं...थोड़ी सी खुद्दारी...
(बात काटते हुए) मैं दो लाइन में अपनी बात कहना चाहता हूं। जमीर बेचता तो वजीर बन जाता। मैं ऐसा नहीं कर सकता था। मैं अपने जमीर का कैदी हूं।  

तमाम मुख्यमंत्रियों, सियासी लोगों से आपके संपर्क रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद क्या योजना है?
निश्चित रूप से मुख्यमंत्रियों व नेताओं से मेरे संबंध रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से कभी नहीं सोचा। किताबें लिखता रहा हूं, आगे भी लिखूंगा। मीडिया के डिबेट में शामिल होऊंगा।  

राजस्व परिषद कार्यकाल की खास उपलब्धियां

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अन‌िल कुमार गुप्ता - फोटो : amar ujala
  • सूबे की नई राजस्व संहिता बनाई गई। राजस्व परिषद लखनऊ व इलाहाबाद का विकास।
  • परिषद अध्यक्ष के रूप में राजस्व महकमे को एक झंडा दिया। फरवरी में राजस्व दिवस तय कराया।
  • मंडल स्तर पर हर साल एक डीएम, एक एडीएम, एक एसडीएम व एक तहसीलदार के सम्मान की शुरुआत।
  • 5000 लेखपालों की निष्पक्ष भर्ती। संभवत: पहली भर्ती जो हाईकोर्ट से रोकी नहीं गई।
  • 250 तहसीलों की खतौनी रियल टाइम अपडेट होनी शुरू। बाकी का काम 15 दिन में होगा पूरा।
  • 130 तहसीलों का जीर्णोद्धार कराया। मॉडल तहसीलों की स्थापना शुरू।
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