लखनऊ। सिंधी भाषा और संस्कृति ही समाज की पहचान है। इसे घर और समाज में जीवित रखने के साथ युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ना जरूरी है। संतों ने बृहस्पतिवार को वीआईपी रोड स्थित शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में चल रहे 66वें संत आसूदाराम निर्वाण महोत्सव में श्रद्धालुओं को यह संकल्प दिलाया। उल्लासनगर के वसणशाह दरबार के पीठाधीश्वर साई कालीराम, चकरभाटा के साई लालदास व साई किशनदास, अयोध्या के साई सुरेंद्र लाल और नागपुर के साई नानक राम ने सिंधी भाषा, तीज-त्योहार, खान-पान और संस्कृति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सिंधी महापुरुषों और शहीदों की जयंती-पुण्यतिथि में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की अपील की। बाबा साईं मोहन लाल और बाबा साईं हरीश लाल के सानिध्य में हो रहे चार दिवसीय महोत्सव में भजन हुए। गुरु माता दयाली देवी मंडल ने रक्तदान शिविर लगाया, जिसमें 25 लोगों ने रक्तदान किया। सेवादार ओमप्रकाश ओमी ने बताया कि समापन 26 सितंबर को अरदास और पल्लव की परंपरा से होगा। शाम को दो घंटे का सुखमनी साहब का पाठ हुआ। इसमें 500 महिलाओं ने एक वेशभूषा में शामिल होकर पाठ किया।

शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में 66वां संत आसूदाराम निर्वाण महोत्सव चल रहा है।