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अंसल पर रेरा का शिकंजा: 6500 एकड़ की हाईटेक टॉउनशिप के ऑडिट का आदेश

Thu, 25 Oct 2018 08:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 25 Oct 2018 08:58 PM IST
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rera orders for financial audit of ansal hitech township project
डेमो पिक

सुशांत गोल्फ सिटी की 6500 एकड़ की हाइटेक टॉउनशिप का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने दिया है। अंसल एपीआई के साथ-साथ सहयोगी कंपनियों का भी फोरेंसिक ऑडिट किसी स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार एजेंसी से कराया जाएगा।

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दरअसल रेरा की ओर से कराई गई जांच और मिली शिकायतों में यह सामने आया था कि अंसल एपीआई ने ग्राहकों से जमा कराए पैसे को दूसरे प्रोजेक्ट में लगा दिया। 403 शिकायतों की सुनवाई के बाद रेरा की ओर से जारी आदेश में फोरेंसिक ऑडिट पूरा करने के लिए दो महीने की मोहलत दी गई है। इसमें यह जांच की जाएगी कि पैसा कहां से आया और कहां लगाया गया।
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रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार, सदस्य बलविंदर कुमार, भानुप्रताप सिंह और कल्पना मिश्रा ने संयुक्त आदेश में फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है। यह ऑडिट कंपनी के खर्च पर होगा।
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रेरा सचिव खुद अंसल एपीआई व सहयोगी कंपनियों के ऑडिट पर नजर रखेंगे। ऑडिट में देखा जाएगा कि अंसल एपीआई, सहयोगी कंपनियों या कंसोर्सियम के खाते से फंड कहां-कहां भेजा गया? इसके अलावा प्रोजेक्टों में हुई देरी और इसके लिए जिम्मेदार भी तय किए जाएंगे?

10 फीसदी से अधिक रकम खर्च करने को लेनी होगी अनुमति

रेरा के आदेश के मुताबिक, परियोजनाओं के एस्क्रो एकाउंट से 10 फीसदी से अधिक खर्च करने के लिए रेरा की अनुमति लेनी होगी। यह आदेश उन बिल्डर कंपनियों पर भी लागू होगा, जिन्होंने एफएसआई में भूखंड या प्रोजेक्ट अंसल एपीआई से लिए हैं। 

बिना बिकी संपत्तियों से जुटाएंगे रकम, लौटाएंगे आवंटियों का पैसा
रेरा सदस्य बलविंदर कुमार का कहना है कि सुशांत गोल्फ सिटी के फंड दूसरे प्रोजेक्टों में ट्रांसफर किए गए हैं। इस कारण प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसा बिल्डर के पास बचा ही नहीं। उनके अधिवक्ता ने खुद खाते में पैसा न होने की बात स्वीकार की है। एक ऑडिटर भी नियुक्त किया जा रहा है, जो हाईटेक सिटी में मौजूद बिना बिक्री वाली संपत्तियों को चिह्नित करेगा। ऐसी संपत्तियों की सूची तैयार करके उननी कीमत का आकलन किया जाएगा। उससे मिलने वाली रकम से आवंटियों का पैसा लौटाया जाएगा। अंसल एपीआई बिना रेरा की अनुमति के नई संपत्तियां भी नहीं बेच सकेगा। 

करी एंड ब्राउन को मिल सकता ऑडिट 

बलविंदर कुमार का कहना है कि यूके की कंपनी करी एंड ब्राउन के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इससे फोरेंसिक ऑडिट कराया जा सकता है। नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया के प्रमुख सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के वित्तीय ऑडिट का काम देखती है।

अंसल नहीं बता पाया कि कैसे पूरे होंगे प्रोजेक्ट
रेरा में बिल्डर की तरफ से कोई ठोस कार्ययोजना नहीं दी जा सकी है। अंसल एपीआई के अधिकारी रेरा को यह बताने में विफल रहे कि किस तरह अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा। कई मामलों में तो प्रोजेक्ट पूरा करने की पूर्व निर्धारित तारीख से भी चार-पांच साल बाद की डेडलाइन बताई गई है।

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