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रिपोर्ट: सरकारी के साथ निजी स्कूल भी खराब, शिक्षा का स्तर गिरा

Sun, 28 Aug 2016 01:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 28 Aug 2016 01:07 PM IST
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 Report of a survey on Education.

यूपी में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे और उनकी शैक्षिक गुणवत्ता दोनों में बराबर कमी आ रही है। शिक्षा की गुणवत्ता में कमी निजी स्कूलों में भी दर्ज की गई है लेकिन यह गिरावट सरकारी स्कूलों से कम है।

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यही वजह है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। यह खुलासा एनुअल स्टैटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) में हुआ है। इस संस्था की ओर से पिछले 10 साल में किए गए सर्वे में ये तथ्य सामने आए हैं।
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असर की रिपोर्ट के अनुसार 2006 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का प्रतिशत 69.7 फीसदी था। निजी स्कूलों में उस समय केवल 30.3 फीसदी बच्चे ही पढ़ते थे। इसके बाद सर्व शिक्षा अभियान के तहत काफी स्कूल खोले गए लेकिन बच्चों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती चली गई।
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2014 में असर की रिपोर्ट के अनुसार कुल पंजीकृत बच्चों में सरकारी स्कूल के बच्चों की संख्या 48.3 फीसदी बची है जबकि निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 51.7 फीसदी पहुंच गई है।

93.4 फीसदी बच्चे नहीं हल कर सकते घटाने के सवाल

 Report of a survey on Education.

असर की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा तीन के महज 6.6 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो घटाने के सामान्य सवाल हल कर सकते हैं। बाकी 93.4 फीसदी बच्चे ये सवाल हल नहीं कर सकते। 2007 में स्थिति इससे थोड़ी बेहतर थी।

उस समय सरकारी स्कूलों के कक्षा तीन के 19.9 फीसदी बच्चे इस लायक थे जो घटाने के सामान्य सवाल हल कर सकें। भाग के सवालों में भी स्थिति इससे ज्यादा अलग नहीं है। 2007 में कक्षा तीन के 25.9 फीसदी बच्चे भाग के सामान्य सवाल हल करते थे। 2014 तक यह आंकड़ा घटकर 12.1 फीसदी रह गया।

पांचवीं के 73.2 फीसदी बच्चे नहीं पढ़ सकते कक्षा दो की किताब
गणित ही नहीं हिंदी में भी बच्चों का शैक्षिक स्तर बेहद खराब है। इस समय पांचवीं के 73.2 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो कक्षा दो की हिंदी की किताब नहीं पढ़ सकते। 2006 में सरकारी के 30.9 और निजी स्कूलों में पांचवीं के 52.6 फीसदी बच्चे ऐसे थे जो कक्षा दो की किताब पढ़ सकते थे।

निजी स्कूलों ने इसमें सुधार किया। इस समय उनके कक्षा पांच के 61.4 फीसदी बच्चे कक्षा दो किताब पढ़ सकते हैं, जबकि सरकारी स्कूल के बच्चों के शैक्षिक ज्ञान में बराबर कमी आ रही है।

निजी स्कूलों में भी शिक्षा की गुणवत्ता में आई गिरावट

 Report of a survey on Education.

पढ़ाई के स्तर में गिरावट केवल सरकारी स्कूलों में ही नहीं आई है। गणित के मामले में निजी स्कूलों के बच्चे भी पिछड़ रहे हैं। 2006 में यहां पढ़ने वाले कक्षा तीन के 41.5 फीसदी बच्चे ऐसे थे जो घटाने के सामान्य सवाल हल कर लेते थे लेकिन 2014 तक यह संख्या 38.5 फीसदी रह गई है। भाग के सवालों में भी यही स्थिति है। 2007 में कक्षा पांच के 41.4 फीसदी बच्चे भाग के सामान्य सवाल हल कर सकते थे। इस समय यह आंकड़ा 38.7 फीसदी है।

हर साल छह लाख बच्चों पर होता है सर्वे
असर के प्रतिनिधि सुनील कुमार ने बताया कि हर साल संस्था की ओर से करीब छह लाख बच्चों पर सर्वे किया जाता है। इसी के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस काम में करीब 30 हजार वालंटियर्स को लगाया जाता है।

2014 तक देश के 577 जिलों के 16 हजार गांवों में असर की टीम पहुंच चुकी है। सर्वे का काम 2005 से शुरू हुआ था, लेकिन काम का तरीका अलग होने की वजह से तुलना के लिए 2006 से आंकड़े लिए गए हैं। दस साल पूरे होने पर 2015 में सर्वे नहीं हुआ। अब 30 अगस्त से एक बार फिर सर्वे की शुरुआत लखनऊ से होगी।

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