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ट्रॉमा केसेज में लड़कियों की मौत ज्यादा होने की क्या रही वजह, पढ़ें रिपोर्ट

Tue, 11 Apr 2017 03:49 PM IST
amarujala.com, written by अभिषेक यादव
amarujala.com, written by अभिषेक यादव Updated Tue, 11 Apr 2017 03:49 PM IST
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 report about death cases in kgmu
डेमो पिक
बच्चों और किशोरों की ट्रॉमा में होने वाली मौतों में सबसे बड़ी वजह रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट है। इसके बाद दम घुटने और यौन अपराधों से सर्वाधिक मौतें हुई हैं। ये खुलासा लखनऊ के केजीएमयू के फॉरेंसिक साइंस विभाग और पैथालॉजी विभाग ने छह वर्ष में ट्रॉमा सेंटर में हुई साढ़े तीन हजार मौतों पर किए अध्ययन के बाद किया है।
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इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि सबसे अधिक मौतें लड़कियों और बच्चियों की हुई, जिनमें करीब साढ़े छह सौ मौतें यौन अपराधों की शिकार होने की वजह से हुई। केजीएमयू के इन दोनों विभागों के रिसर्च के अनुसार इन छह वर्षों में 18 साल तक की उम्र के 9,160 बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिनमें से 7,747 बच्चों की मौत ट्रॉमा से संबंधित कारणों से हुई थी।
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इसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा थी और लड़कियां व लड़कों का अनुपात 1.3:1 रहा। अध्ययन कर्ताओं के अनुसार इसकी प्रमुख वजह उनके साथ होने वाले दुराचार भी रहे। इन बच्चों की मौतों में 65.8 प्रतिशत की उम्र 10 से 18 वर्ष थी, इनमें भी अधिकतर संख्या किशोरियों की थी। अध्ययन में फॉरेंसिक के डॉ. अनूप वर्मा और पैथालॉजी से डॉ. सचिल कुमार शामिल थे।
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61 प्रतिशत ने मौके पर ही दम तोड़
इन मौतों में से 4,725 बच्चों की मौत घटनास्थल पर ही हो चुकी थी और अस्पतालों में इन्हें मृत लाया गया। यह आंकड़ा 61 प्रतिशत है। वहीं 5.6 प्रतिशत ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ा, 26.2 प्रतिशत की मौत इलाज के 24 घंटे के दौरान ही हो चुकी थी।
 

यह तथ्य आए सामने

 report about death cases in kgmu
डेमो - फोटो : demo pic
सड़क हादसों में सर्वाधिक मौतें : सड़क हादसों यानी रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट में सर्वाधिक 3635 बच्चों और किशोरों की जान गई, जो कुल मौतों का 46.92 प्रतिशत था।

 

 दम घुटना : 1128 यानी 14.56 बच्चों की मौत दम घुटने से हुई। इनमें से अधिकतर मौतें एक साल से छोटे बच्चों की थी, जो इस उम्र में दम घुटने से हुई कुल मौतों का 31.96 प्रतिशत था।

कहीं आने जाने के दौरान मौतें : एक से चार वर्ष आयु वर्ग में 32.27 प्रतिशत और पांच से नौ वर्ष आयु वर्ग में 45.14 प्रतिशत मौतें इन बच्चों को कहीं लाने-ले जाने के दौरान हुए हादसों में हुई। अधिकतर मौतें स्कूल आते-जाते समय दर्ज की गईं।

यौन हमले : 649 बच्चों ने अपने पर हुए यौन हमलों में जान गंवाई जो कुल मौतों का 8.37 प्रतिशत है। इनमें अधिकतर लड़कियां थीं।
5. आत्महत्याएं : सामने आए मामलों में 16 प्रतिशत आत्महत्याओं के थे। यह भी एक बड़ा आंकड़ा था।

ट्रॉमा से मौतों में आयु और लिंग वर्ग
आयु वर्ग -       लड़के - लड़कियां  - कुल
1 कम वर्ष  -    162    - 326     - 488
1 से 4 वर्ष   -   433 - 481 -      914
5 से 9 वर्ष -     576 - 671 -     1247
10 से 14 वर्ष - 826 - 1092 -  1918
15 से 18 वर्ष - 1312 - 1868 - 3180
कुल -               3309 - 4438 - 7747

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