{"_id":"6ae8adbca0d06d5a0f095eef","slug":"religious-conversion-at-kgmu-preparations-underway-to-tighten-the-screws-on-13-doctors-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजीएमयू में धर्मांतरण: 13 डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी, विभागाध्यक्ष व प्रशासनिक पद से भी हटेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केजीएमयू में धर्मांतरण: 13 डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी, विभागाध्यक्ष व प्रशासनिक पद से भी हटेंगे
Mon, 02 Nov 2026 09:05 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 02 Nov 2026 09:05 PM IST
सार
आरोपी डॉक्टरों को विभागाध्यक्ष और प्रशासनिक पदों से भी हटाया जाएगा। इसका फैसला कार्यपरिषद की बैठक के बाद लिया जाएगा।
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केजीएमयू में धर्मांतरण से जुड़े मामले में 13 डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। एसटीएफ की सात पेज की रिपोर्ट में सभी डॉक्टरों की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है। आरोपों के घेरे में एक हिंदू डॉक्टर भी है, जिस पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने के आरोप हैं।
विज्ञापन
छह नवंबर को बुलाई गई कार्यपरिषद की आपात बैठक में आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कमेटी गठित करने पर फैसला हो सकता है। जांच के बाद विभागाध्यक्ष और अन्य प्रशासनिक पदों से भी हटाया जा सकता है।
विज्ञापन
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली है। कार्यपरिषद से कमेटी गठन की मंजूरी मिलने के बाद आरोपी डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। कमेटी को सभी पहलुओं की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद रिपोर्ट शासन और उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
जांच के दौरान एसटीएफ से भी जरूरी जानकारी जुटाई जाएगी। कार्रवाई की जद में आए कुछ डॉक्टरों को रिटायरमेंट के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना थी, लेकिन अब इस पर भी संकट मंडराने लगा है।
डेंटल विभाग तक नेटवर्क
एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू के डेंटल विभाग में भी धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों की आशंका जताई गई है। आरोप है कि विभाग के एक डॉक्टर हिंदू छात्रों को परीक्षा में पास कराने, रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में नौकरी दिलाने और भविष्य में स्थायी नियुक्ति कराने का भरोसा देकर प्रभावित करने की कोशिश करते थे। उन पर कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के आरोप भी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध करने वाली छात्राओं को परीक्षा में फेल करने और कॅरिअर बर्बाद करने की धमकी दी जाती थी। इससे वे मानसिक दबाव में आ जाती थीं और शिकायत करने से भी बचती थीं। एसटीएफ की रिपोर्ट में इन आरोपों और संबंधित डॉक्टरों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।