{"_id":"6246034abbbee67d6b47734c","slug":"relief-to-contract-workers-of-homeopathic-medical-colleges-and-hospitals-of-up-order-of-termination-of-service-canceled","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी : होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों के संविदाकर्मियों को राहत, सेवा समाप्ति का आदेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी : होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों के संविदाकर्मियों को राहत, सेवा समाप्ति का आदेश रद्द
Fri, 01 Apr 2022 01:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 01 Apr 2022 01:08 AM IST
सार
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उनके सेवा समाप्ति के आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अक्तूबर 2020 से विभिन्न तिथियों पर जारी इन आदेशों को मनमाना करार दिया है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह अहम फैसला संविदाकर्मियों की ओर से दाखिल सात याचिकाओं पर दिया।
विज्ञापन
Lucknow High Court
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में संविदा पर तैनात कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए उनके सेवा समाप्ति के आदेशों को रद्द कर दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने अक्तूबर 2020 से विभिन्न तिथियों पर जारी इन आदेशों को मनमाना करार दिया है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह अहम फैसला संविदाकर्मियों की ओर से दाखिल सात याचिकाओं पर दिया।
विज्ञापन
याचिकाओं में कहा गया था कि 27 अक्तूबर 2017 को राज्य सरकार ने शासनादेश जारी किया। इसके तहत सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ व नॉन पैरा मेडिकल स्टाफ के पदों को संविदा के जरिए भरने का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन
इस क्रम में 15 दिसंबर 2017 को विज्ञापन भी जारी किया गया। याचियों ने आवेदन किया और चयनित होने पर नियुक्ति पाई। 26 मार्च 2019 को आयुष विभाग के सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी संविदाकर्मियों को उनकी सेवा अवधि समाप्त होने पर कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि आवश्यकता को देखते हुए 6 जुलाई 2019 को फिर याचियों की संविदाओं का नवीनीकरण कर दिया गया। मगर इस बार उनके संविदाओं की अवधि समाप्त होने पर अक्तूबर 2020 से अलग-अलग तिथियों पर आदेश जारी करते हुए उन्हें कार्य मुक्त कर दिया गया। इसे याची संविदाकर्मियों ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने उक्त आदेश के साथ याचिकाएं मंजूर कर लीं।