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खाकी में छिपे अपराधियों के दोस्तों और मुखबिरों पर कसा शिकंजा

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 01:46 AM IST
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relatives, informers are under radar
लखनऊ। कानपुर में दबिश से पहले कुख्यात विकास दुबे को खबर देने वाले खाकी के गद्दारों की तरह राजधानी में भी कई ऐसे पुलिसकर्मी हैं जो बदमाशों से दोस्ती निभाते हैं या उनके लिए मुखबिरी करते हैं। इन पर अधिकारियों ने नजरें गड़ा दी हैं और गोपनीय तरीके से इनका कच्चा चिट्ठा निकलवाया जा रहा है। खुफिया और सर्विलांस की भी मदद ली जा रही है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि सभी थाना प्रभारियों से दागी पुलिसकर्मियों का ब्यौरा मांगा गया है। पूर्व में अपराधियों से मिलीभगत के आरोपी पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की जा रही है। अगर इसमें कमी पाई गई तो उसे पूरा कराया जाएगा। खाकी और अपराधियों का सबसे घिनौना गठजोड़ दो फरवरी 2017 में तेल कारोबारी श्रवण साहू की हत्या में सामने आया था। श्रवण बेटे आयुष की हत्या के आरोपी हिस्ट्रीशीटर अकील को सजा दिलाने के लिए पैरवी कर रहे थे। वहीं, अकील ने तत्कालीन क्राइम ब्रांच के दरोगा धीरेंद्र शुक्ला और सिपाही अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव के साथ मिलकर उन्हें ही फर्जी मामले में फंसाने की साजिश रच डाली। एसटीएफ ने इस साजिश का खुलासा किया था। श्रवण साहू के खिलाफ साजिश रचने में अकील के साथ 16 पुलिसकर्मियों का नाम सामने आया था। सभी को निलंबित किया गया था। बाद में दरोगा धीरेंद्र शुक्ला, सिपाही अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई थी। हत्याकांड से हतप्रभ तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद ने कहा था कि हमारे बीच के भेड़ियों को बेनकाब करना जरूरी है। हालांकि, बर्खास्त पुलिसकर्मियों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई आज तक नहीं की जा सकी है। अपराधियों की मदद करने में पहले भी खाकी की फजीहत हो चुकी है। गोसाईंगंज स्थित ओमेक्स रेजिडेंसी अपार्टमेंट में कोयला कारोबारी अंकित अग्रहरि के फ्लैट में डकैती डालकर डेढ़ करोड़ से अधिक की रकम लूटने की साजिश रचने वाले वकील मधुकर मिश्रा के साथ दरोगा पवन मिश्रा और आशीष तिवारी के साथ तत्कालीन एएसपी क्राइम का गनर प्रदीप सिंह भदौरिया भी शामिल था। तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ आधी-अधूरी कार्रवाई ही हुई। 2013 में गुडंबा में मैग्नम कंपनी के मालिकों के लिए दबिश की सूचनाएं लीक करने में थाने के सिपाही रणधीर सिंह का नाम आया था। उसकी कंपनी के अधिकारी अरुण चतुर्वेदी से मोबाइल फोन पर हुई बातचीत वायरल हुई थी। इस सिपाही पर भी महकमे की तरफ से सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
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