अयोध्या की पौराणिक तमसा नदी को जीवनदान देने की कवायद शुरू, जानें- इसका पौराणिक महत्व
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अपनी पहचान खो चुकी जिले की त्रेतायुगीन तमसा नदी को फिर पुराने स्वरूप में लाने की कवायद में मनरेगा व राज्यवित्त योजना से कार्ययोजना तैयार की गई है। 23 करोड़ रुपये खर्च कर 150 किलोमीटर लंबी नदी की दो मीटर गहरी खोदाई कराकर दोनों ओर पौधे भी रोपे जाएंगे।
वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बुधवार को डीएम डॉ. अनिल कुमार व सीडीओ, डीसी मनरेगा ने पूजन-अर्चना कर शिलान्यास किया और फावड़ा चलाकर शुभारंभ किया। डीएम ने कहा कि सरकार की पहल यदि कामयाब हो गई तो नदी में पूरे साल पानी हिलोरें मारेगा और चारों ओर हरियाली लहराएगी।
आलम यह है कि लोगों ने जलस्तर के तीनों खंडों को नष्ट कर दिया है। अब जरूरत पानी को बचाने की आ चुकी है। इसलिए तमसा को संरक्षित करने के लिए पहल शुरू की गई है। अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग मनोज सिंह ने कहा कि नदी में चार किलोमीटर पर चेक डैम बनाए जाएंगे जिससे खेतों की सिंचाई हो सकेगी।
डीएफओ डॉ. रवि कुमार ने कहा कि नदी के किनारे या प्रवाह के मध्य आने वाले पेड़ों को काटने की अभी जरूरत नहीं है। नदी के दोनों किनारों पर और गांव में खाली पड़ी भूमि पर पौधरोपण कराया जाएगा।
15 सौ मजदूरों ने जीर्णोद्घार में किया सहयोग
सीडीओ अभिषेक आनंद ने कहा कि मजदूरों के भुगतान में कोई कमी नही आने दी जाएगी। सभी मजदूरों को गांव से ही मनरेगा योजना के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। पहले दिन 15 सौ मनरेगा मजदूरों ने डीएम के साथ मिलकर पौराणिक तमसा के जीर्णोद्धार में सहयोग किया।
ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व है तमसा नदी का
मवई ब्लॉक के बसौढ़ी के लखनीपुर गांव से निकली तमसा जिले की 83 ग्राम पंचायतों को छूते हुए 150 किमी. की लंबाई में अंबेडकर नगर जिले के भीटी विकास खंड में प्रवेश कर आगे की ओर निकल जाती है। यही नहीं कटेहरी विकास खंड क्षेत्र में पड़ने वाले धार्मिक स्थल श्रवण क्षेत्र के निकट तमसा का बिसुही से संगम होता है। गौराघाटए महादेवा घाट तथा सत्संग घाट इसी पवित्र नदी से जुड़े हैं।
ये मिलेगा लाभ
- जिन क्षेत्रों से नदी निकली है वहां का जलस्तर ऊपर आएगा
- पशु-पक्षी और जीव-जंतुओं को मुहैया होगा पानी
- दो हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की सिंचाई का बनेगा साधन
- नदी के दोनों ओर पौधरोपण होने से पर्यावरण को मिलेगा लाभ
- आसपास के किसानों की बढ़ेगी आमदनी, जमीन होगी मूल्यवान
- बारिश के मौसम में जलभराव की संभावनाएं होंगी कम।