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आबादी क्षेत्र में घुस आने वाले बाघों के लिए बनेंगे सुधार गृह, कार्ययोजना तैयार, जल्द होगा अमल

Wed, 12 Aug 2020 12:15 PM IST
ishwar ashish अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 12 Aug 2020 12:15 PM IST
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reformatory homes will be built for tigers
- फोटो : pixabay

आए दिन जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में घुस आने वाले बाघों के लिए जंगल के भीतर ही रि-वाइल्डिंग सेंटर यानी सुधार गृह बनाए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ रही घटनाओं पर काबू पाने के लिए यह फैसला किया है। वन विभाग ने इसके लिए कार्ययोजना तैयार कर ली है।

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जल्द ही इस पर अमल किया जाएगा। इसके अनुसार खेतों या आबादी वाले इलाकों में पकड़े जाने वाले बाघों को एक से डेढ़ साल तक इन सुधार गृहों में रखा जाएगा। इस दौरान अगर ये बाघ सुधार गृह वाले क्षेत्र में पाए जाने वाले शिकार से संतुष्ट होंगे, तो उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा। ऐसे बाघों में ‘रेडियो कॉलर’ लगाया जाएगा।
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यह सैटेलाइट ट्रैप चिप होती है, जिससे बाघों की मूवमेंट का पता लगाया जाता है। प्रदेश में जंगल से सटे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अब तो बाघ और तेंदुए जंगल से दूर स्थित शहरों में भी आते हैं। आबादी क्षेत्र में पकड़े जाने वाले बाघों को चिड़ियाघरों में रखना भी अब मुश्किल हो गया है, क्योंकि वे पहले से ही भरे हुए हैं।
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चिड़ियाघर में रखे गए बाघों को आमतौर पर जंगल में नहीं छोड़ा जाता, क्योंकि उनके जीने के ढंग में बदलाव आ जाता है। वे जंगल की कठिन परिस्थितियों का सामना करने लायक नहीं रह जाते हैं। इस बारे में संपर्क किए जाने पर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव सुनील पांडेय ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए हरसंभव उपाय पर विचार किया जा रहा है। 

तीसरी आंख रखेगी बाघों पर नजर

सुधार गृह कम से कम 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होंगे। यह क्षेत्र चेन लिंक फेंसिंग (तार-बाड़) से घिरा होगा। यहां बाघों के प्रिय भोजन चीतल-हिरन आदि का पर्याप्त इंतजाम होगा। बाघों के व्यवहार पर नजर रखने के लिए विशेष कैमरे भी लगे होंगे। 

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बनेगा पहला बाघ सुधार गृह 
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही पहला बाघ सुधार गृह पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बनाया जाएगा। उस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की काफी घटनाएं सामने आ रही हैं। वहां से मिले अनुभवों से सीखते हुए अन्य स्थानों पर भी सुधार गृह बनाए जाएंगे। 

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