फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Reason behind the anger of Mulayam Singh Yadav.

यूपी का सियासी शो बनी अखिलेश-मुलायम की 'मजबूरी'

Thu, 06 Aug 2015 11:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 06 Aug 2015 11:12 PM IST
विज्ञापन
Reason behind the anger of Mulayam Singh Yadav.

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जनेश्वर मिश्र की जयंती पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, उनकी सरकार के मंत्रियों और संगठन के प्रति नाराजगी पहली बार नहीं जताई। बंद कमरे की बैठकों से लेकर सार्वजनिक समारोहों तक में वे मंत्रियों, विधायकों, अध्यक्षों को नसीहत देते रहते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक को नहीं बख्शते। उनके गुस्सा होने के कुछ वाजिब कारण भी हैं।

विज्ञापन


दरअसल, उनके निर्देशों पर प्रभावी अमल नहीं हो पाता। समाजवादी पार्टी को प्रदेश की सत्ता में पूर्ण बहुमत के मुकाम तक पहुंचाने के बावजूद संगठन का ढुलमुलपन, मंत्रियों का जनता व कार्यकर्ताओं से कटा होना, उनके खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई न होना उन्हें खलता है।
विज्ञापन


सपा मुखिया मुलायम सिंह का साधारण किसान परिवार से निकलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सफर संघर्षों से होकर गुजरा है। 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी बनाई थी। वे संवेदनशील हैं, लेकिन फैसले लेने में सख्त भी हैं। जब भी वे पार्टी कार्यक्रमों में होते हैं, अपने मन की बात कहने से नहीं चूकते। जहां भी उन्हें खामी नजर आती है, बताते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुधार के लिए खरी-खरी सुनाते हैं। फिर चाहें वह मुख्यमंत्री हों, मंत्री, विधायक, अध्यक्ष या दूसरे नेता। पिछले तीन-चार कार्यक्रमों में उन्होंने मंत्रियों के कामकाज के तौर-तरीकों पर ऐतराज जताया था।

कहा था कि उन्हें सब जानकारी है कि कौन क्या कर रहा है। उन्होंने मंत्रियों को सुधरने की हिदायत भी दी थी लेकिन कोई बदलाव नहीं दिखा। लिहाजा बुधवार को उन्होंने कहा कि यही हाल रहा तो ज्यादातर मंत्री चुनाव हार जाएंगे।

अभी तक लोकसभा चुनाव में हार की रिपोर्ट ही नहीं दी गई

Reason behind the anger of Mulayam Singh Yadav.

सपा को लोकसभा चुनाव में बड़ी ताकत के साथ दिल्ली पहुंचने की उम्मीद थी। गैर भाजपा सरकार बनने पर मुलायम सिंह यादव (नेताजी) तीसरे मोर्चे से प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन नतीजा उम्मीदों के अनुकूल नहीं रहा।

नेताजी कई बार कह चुके थे कि हार के कारणों की समीक्षा कर उन्हें रिपोर्ट दी जाए लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह थी कि उन्होंने जनेश्वर मिश्र जयंती समारोह में अपने बेटे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नाराजगी जताई।

मंत्रियों पर नहीं होता एक्शन
मुलायम मान रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में हार की एक वजह कुछ मंत्रियों की नॉन परफारमेंस, आचरण और व्यवहार है। उनके प्रति क्षेत्रों में नाराजगी थी, जो विरोधी प्रत्याशियों को वोट के रूप में सामने आई। वे कई मौकों पर ऐसे मंत्रियों पर कार्रवाई के लिए कह चुके हैं, पर मुख्यमंत्री ने किसी मंत्री के खिलाफ एक्शन नहीं लिया। यह भी उनकी नाराजगी की एक वजह है।

अध्यक्षों के कामकाज से नाखुश
नेताजी को सूचनाएं मिल रही हैं कि कुछ जिलाध्यक्ष पार्टी गतिविधियों से इतर दूसरे कामों में लगे हुए हैं। वे ऐसे लोगों में बदलाव चाहते हैं। अध्यक्षों की पिछली बैठक में उन्होंने निष्क्रिय और दूसरे धंधों में लगे लोगों को हटाने का इशारा किया था। हालांकि एक दर्जन जिलाध्यक्ष बदले गए हैं लेकिन कई ऐसे लोगों को नहीं हटाया गया जिनके बारे में नेताजी को शिकायतें मिल रही थीं।

...पर सीएम कैसे करें पिता के सहयोगियों पर कार्रवाई

Reason behind the anger of Mulayam Singh Yadav.

एक तरफ जहां सपा मुखिया मुलायम सिंह की नाराजगी की अपनी वजह हैं, वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अपनी विवशताएं हैं। वे मुख्यमंत्री और सपा के प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ ही नेताजी के पुत्र भी हैं। पिता के सहयोगी उनकी कैबिनेट में शामिल हैं। उन पर कार्रवाई करना तो दूर, वे उनके कामकाज का हिसाब तक नहीं ले पा रहे।

अखिलेश सपा की सेकंड जनरेशन के नेता हैं। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, लोकदल, जनता पार्टी, दमकिपा, लोकदल(ब) और सजपा आदि से गुजरते हुए मुलायम ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया। उस समय अखिलेश यादव राजनीतिक तौर पर सक्रिय नहीं थे।

मुलायम के 70, 80 और 90 के दशक के सहयोगी अब भी सक्रिय हैं। उनमें से कुछ कैबिनेट में शामिल हैं। ऐसे में शिष्टाचार का तकाजा अखिलेश यादव को उनके प्रति पुराने व्यवहार में ज्यादा बदलाव नहीं करने देता।

आजम खां, शिवपाल सिंह यादव, अहमद हसन, बलराम सिंह यादव, अवधेश प्रसाद, अंबिका चौधरी, रामगोविंद चौधरी जैसे कैबिनेट मंत्रियों के साथ अखिलेश यादव सरकार के आधे से ज्यादा चेहरे मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में रह चुके हैं। ऐसे में सीएम की सीमाएं सीमित हो जाती हैं।

अखिलेश बोले, कौन पिता अपने बेटे को नहीं डांटता

Reason behind the anger of Mulayam Singh Yadav.

सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की डांट पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि कौन पिता अपने बेटे को नहीं डांटता। मुलायम ने बुधवार को जनेश्वर मिश्र पार्क में सीएम अखिलेश यादव को डांट लगाई थी।

बृहस्पतिवार को अखिलेश यादव ने कहा कि टीवी चैनल पिता-पुत्र (उनका और मुलायम सिंह) का मामला दिखा रहे हैं। बिना पैकेज दिए फ्री में ही पब्लिसिटी मिल रही है। उन्होंने मीडियाकर्मियों से मुखातिब होकर कहा, बताइए किसके पिता ने उन्हें नहीं डांटा, कौन पिता बेटे को नहीं डांटता।

वहीं, इस पर कैबिनेट मंत्री व प्रवक्त राजेंद्र चौधरी कहते है कि नेताजी गुस्सा नहीं करते, वे कार्यकर्ताओं, नेताओं और मंत्रियों को हिदायत देते रहते हैं। पार्टी के सभी लोग उनकी हिदायतों को सकारात्मक रूप में लेते हैं और उन पर अमल करते हैं। नेताजी का जोर इस बात पर रहता है कि सपा से जुड़े लोगों का आचरण और व्यवहार दूसरे लोगों से अलग होना चाहिए। उन्हें जनहित के कामों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed