फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   reason behind raising dalit issues by political parties in uttar pradesh.

भाजपा ही नहीं सपा-बसपा भी दलित एजेंडे पर बेचैन, 2019 चुनाव के लिए ये है असली मकसद

Sun, 08 Apr 2018 01:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 08 Apr 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
reason behind raising dalit issues by political parties in uttar pradesh.
अखिलेश यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व मायावती - फोटो : amar ujala

दलितों के एजेंडे पर भाजपा ही नहीं, बल्कि सपा और बसपा भी बेचैन दिख रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सांसदों को दो दिन गांवों में और उनमें भी एक रात किसी दलित के घर गुजारने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह पूछना कि अखिलेश यादव क्यों कांशीराम और मायावती की प्रतिमाओं को तुड़वाना चाहते थे।

विज्ञापन


सपा और बसपा के साथ कांग्रेस भी भाजपा पर दलितों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो दलितों के हितों की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी तक देने का एलान कर दिया है। राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो दलित एजेंडे पर पक्ष व विपक्ष की सक्रियता की वजह सरोकार कम, सियासी ज्यादा है।
विज्ञापन


बेचैनी की असली वजह प्रदेश की 24 प्रतिशत एससी-एसटी आबादी है। इनका रुझान देश और प्रदेश की सियासत का रुख तय करता रहा है। वर्ष 1996, 1998, 1999 और 2014 में भाजपा इन सीटों पर अव्वल रही तो केंद्र में उसकी सरकार बनी। जब भाजपा इन सीटों पर पिछड़ी तो उसके हाथ से केंद्र की सत्ता भी फिसल गई। चूंकि ये सीटें दलित बहुल आबादी वाली हैं, इसलिए राजनीतिक दलों को कभी अगड़ों के साथ तो कभी पिछड़ों के साथ वोटों का समीकरण बैठाकर सफलता मिल जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर कहा जाए कि यूपी की सुरक्षित सीटें भाजपा का भविष्य तय करने वाली हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उदाहरण के लिए इस समय यूपी से लोकसभा की सभी सुरक्षित 17 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। विधानसभा की 86 सुरक्षित सीटों में भाजपा 76 पर काबिज है। इससे साफ है कि भगवा टोली के रणनीतिकारों ने 2014 और 2017 में दलितों को किस मजबूती से अपने साथ जोड़ा है।

विपक्ष की कोशिश, भाजपा की दावेदारी कमजोर करने पर

reason behind raising dalit issues by political parties in uttar pradesh.

विपक्ष, खास तौर से बसपा की कोशिश दिखती है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दलितों की भाजपा के साथ लामबंदी को तोड़कर अगर इन सीटों का गणित गड़बड़ा दिया जाए तो केंद्र की सत्ता पर भगवा टोली की दावेदारी को कमजोर किया जा सकता है। वैसे भी बसपा की टीस रही है कि दलित बहुल इन सीटों पर उसे कभी वैसी बड़ी सफलता नहीं मिली जैसी भाजपा को मिलती रही है।

बसपा के रणनीतिकारों को शायद लग रहा है कि सपा के साथ होने का लाभ उठाकर अगर लोकसभा चुनाव में वह दलितों के मुद्दे को धार देकर इन सीटों में अधिकतर पर झंडा फहरा लेती है तो दलितों का प्रतिनिधित्व करने का उसका दावा और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा। साथ ही सत्ता तक भाजपा की पहुंच कमजोर करने में सफलता मिल जाएगी।

कारण यह भी
बीते तीन दशक में लोकसभा के सात चुनाव में इन सीटों पर बसपा की जीत का अधिकतम आंकड़ा पांच रहा है जबकि सपा का आंकड़ा 10 रहा है। सबसे ज्यादा सीटें जीतने की बात की जाए तो भी भाजपा ही नंबर एक रही है और अकेली पार्टी के रूप में उसने दो चुनाव को छोड़कर पांच में अन्य किसी एक दल से अधिक सीटें जीतकर अपनी पकड़ साबित की है।

लोकसभा की सुरक्षित 18 सीटों का नतीजा (1999 तक)

reason behind raising dalit issues by political parties in uttar pradesh.

वर्ष--भाजपा--बसपा--कांग्रेस--सपा--अन्य
1991--09--00--01--00--08                
1996--14--02--00--02--00
1998--11--02--00--05--00
1999--07--05--00--05--01

उत्तराखंड अलग होने के बाद 17 सीटों का हाल
2004--03--05--01--07--01
2009--02--02--02--10--01
2014--17--00--00--00--00

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed