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अतीत का झरोखा: दिन में अटल के खिलाफ प्रचार, शाम को उन्हीं के साथ भोजन
Thu, 06 Jan 2022 01:02 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 06 Jan 2022 01:02 PM IST
सार
जगदीश चंद्र दीक्षित अटल से बोले, ‘बड़ी देर कर दी। अम्मा इंतजार कर रही हैं। कह रही थीं कि तुमने कहीं ज्यादा तो नहीं कह दिया।’अटल जी ठहाका लगाकर हंसे... पढें यह रोचक वाक्या
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जगदीश चंद्र दीक्षित
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
यह बात कम ही लोगों को पता होगी कि विधान परिषद के सभापति रहे जगदीश चंद्र दीक्षित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की बुआ कृष्णा दीक्षित के पुत्र थे। दीक्षित 1957 से 1960 तक विधानपरिषद के सदस्य रहे। राज्यसभा और लोकसभा के भी सदस्य रहे। बाद में 1986 तक फिर विधान परिषद के सदस्य रहे। मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले अटल जी के फूफा लक्ष्मीनारायण दीक्षित डीएवी कॉलेज में अध्यापक थे।
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दीक्षित का जन्म लखनऊ के मकबूलगंज में हुआ था। अटल जी ने अपने संस्मरण में लिखा है, ‘जगदीश जी यद्यपि मुझसे एक वर्ष छोटे थे, लेकिन समवयस्क होने के नाते हम काफी गहरे मित्र थे। बावजूद इसके कि वह कांग्रेस में थे और मैं जनसंघ में। पर, इससे रिश्तों पर जरा भी असर नहीं पड़ा। मुझे जनसंघ से 1953 में लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़ने का आदेश मिला।’
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शिक्षक अमित पुरी बताते हैं कि अटल जी ने उन्हें एक बार बताया था कि यह उपचुनाव लखनऊ से सांसद चुनी गईं विजय लक्ष्मी पंडित के त्यागपत्र देने के कारण हो रहा था। उप चुनाव में कांग्रेस से पं. नेहरू के चचेरे भाई की पत्नी शिवराजवती नेहरू उम्मीदवार थीं। जगदीश जी उनके प्रचार में जनसंघ की खूब आलोचना करते और अटल जी कांग्रेस की। शाम को अटल जी का भोजन अक्सर बुआ के घर ही होता था। एक दिन उन्हें कुछ देरी हो गई। संयोग से उस दिन जगदीश जी ने जनसंघ के विरुद्ध काफी तीखे भाषण दिए थे।
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बाहर निकले तो देखा कि जगदीश जी जनसंघ के चुनाव कार्यालय के बाहर खड़े उनका इंतजार कर रहे थे। वे अटल से बोले, ‘बड़ी देर कर दी। अम्मा इंतजार कर रही हैं। कह रही थीं कि तुमने कहीं ज्यादा तो नहीं कह दिया।’अटल जी ठहाका लगाकर हंसे। फिर बोले, चलो भोजन किया जाए। कल फिर एक-दूसरे के खिलाफ हाथ आजमाना है।