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अतीत का झरोखा: सादे कागज की मदद से चुनाव जीत गए थे बाबू जगजीवन राम, पढ़ें ये मजेदार किस्सा
Tue, 18 Jan 2022 12:36 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 18 Jan 2022 12:36 PM IST
सार
ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने एक सादा कागज हाथ में लिया और बोलना शुरू किया, बाबू जी नहीं आ पाए हैं, लेकिन...
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बाबू जगजीवन राम (फाइल फोटो)
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विस्तार
राजनीति में कभी-कभार मजेदार प्रसंग आते हैं। आपातकाल के बाद बाबू जगजीवन राम ने कांग्रेस से अलग होकर ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ बना ली थी। जगजीवन राम यूपी में चुनावी दौरे पर थे। जौनपुर से राजकेशर सिंह जनता पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे। जगजीवन राम की फूलपुर में सभा थी, वहां से उन्हें जौनपुर के बादशाहपुर में सभा करने के बाद अमेठी में सभा के लिए जाना था।
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वरिष्ठ समाजवादी नेता सूर्यकुमार बताते हैं, ‘कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी’ के एक नेता ने जानबूझकर जगजीवन राम का कार्यक्रम बादशाहपुर में नहीं लगाया। फूलपुर से अमेठी जाने का रास्ता जौनपुर के जिस मोड़ से जाता था, वहां से बादशाहपुर पांच किलोमीटर ही था। बकौल सूर्यकुमार, मैंने वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश श्रीवास्तव, उमानाथ सिंह के साथ जगजीवन राम को रास्ते में रोककर सभा में लाने की योजना बनाई।
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मोड़ पर जब जगजीवन राम आए तो उनसे सभा में चलने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहा, कार्यक्रम लगे बिना नहीं जाऊंगा और गाड़ी आगे बढ़ा दी। ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने तेजी से कार आगे बढ़ाकर जगजीवन राम की गाड़ी के आगे लगा दी। मजबूरन जगजीवन राम के ड्राइवर को गाड़ी रोकनी पड़ी। उनसे आग्रह किया गया तो बोले, कार्यक्रम लगे बिना तो मैं नहीं जाऊंगा।
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ओमप्रकाश श्रीवास्तव, मैं और उमानाथ सिंह सड़क पर जगजीवन राम की गाड़ी के आगे बैठ गए। जगजीवन राम की पत्नी भी उनके साथ थीं। उन्होंने कहा, जब पांच किलोमीटर ही है तो चले चलिए। ये लोग इतना आग्रह कर रहे हैं। जगजीवन राम बोले, तू ही चली जा। इतना कहना था कि ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने उनकी पत्नी से कहा, माता जी आप ही चली चलिए। उन्होंने बाबू जगजीवन राम से पूछा, मैं जाऊं...। जगजीवन राम बोले, चली जा...।
ओमप्रकाश ने तुरंत माता जी को अपनी गाड़ी में बैठाया और हम लोग सभा में आ गए। जगजीवन राम की पत्नी को लेकर हम लोग मंच पर पहुंचे। ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने एक सादा कागज हाथ में लिया और बोलना शुरू किया, बाबू जी नहीं आ पाए हैं, लेकिन उन्होंने माता जी यानी अपनी पत्नी को भेजा है। साथ ही एक अपील भेजी है। जो मैं पढ़ रहा हूं। ओमप्रकाश ने सादा कागज हाथ में लिए हुए ही राजकेशर सिंह के समर्थन में जगजीवन राम की अपील सुनाई।
उन्होंने अंत में कहा, अब माता जी संबोधित करेंगी। माता जी ने खड़ी होकर कहा, बाबू जी ने मुझे आप लोगों के पास अपील के लिए भेजा है। आप लोग हलधर चुनाव चिह्न पर मुहर लगाकार राजकेशर सिंह को जिताइए। सूर्यकुमार बताते हैं, राजकेशर चुनाव जीत गए।