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भाजपा में एक-दूसरे को निपटाने की सियासत भी बनी ढांचा विध्वंस की वजह, संघ में मतभेद रहे कारण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 01 Oct 2020 10:23 AM IST
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अयोध्या में 6 दिसंबर को जो कुछ घटा, उसकी पृष्ठभूमि में जाएं तो संघ परिवार की खींचतान भी इसका एक प्रमुख कारण नजर आती है। हालांकि सामान्य तौर पर अयोध्या में 9 जुलाई 1992 को शुरू हुए सर्वदेव अनुष्ठान और नींव भराई के काम पर तत्कालीन प्रधानमंत्री  पीवी नरसिम्हा राव का रवैया ढांचा ढहने की प्रमुख वजह दिखता है। पर, गहराई से देखें और सारे घटनाक्रमों को जोड़ें तो विश्व हिंदू परिषद और भाजपा की अलग-अलग चालें तथा भाजपा में एक-दूसरे को निपटाने के लिए इस मुद्दे को सियासी गोट के रूप में इस्तेमाल करना भी ढांचा ढहने की बड़ी वजह रही।
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अयोध्या के घटनाक्रम को लेकर लोकसभा व राज्यसभा में भी राव सरकार से कई तीखे सवाल हुए। एक याचिका दाखिल हुई जिसमें अधिगृहीत भूमि को लेकर न्यायालय में चल रही सुनवाई का हवाला देते हुए कारसेवा रोकने का आग्रह किया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने 15 जुलाई 1992 को कारसेवा को तत्काल रोकने का निर्देश दिया। पर, संत कारसेवा न रोकने पर अड़े थे। कल्याण सिंह ने भी बतौर मुख्यमंत्री अयोध्या के जिला प्रशासन को संतों से बात करके कारसेवा रुकवाने को कहा, लेकिन कारसेवा नहीं रुकी। मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय ने कारसेवा तत्काल न रोकने पर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। भाजपा में हड़कंप मच गया।
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