बाराबंकी: हवा के रुख से अलग वोटिंग करता रहा है हैदरगढ़ का मतदाता
बाराबंकी के हैदरगढ़ के मतदाता का मूड भांपना आसान नहीं है। हर दिन कयासबाजी हो रही है। पार्टियां डैमेज कंट्रोल करने का पूरा प्रयास कर रही हैं।
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मुख्यमंत्री तक चुनने वाली हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मूड भांपना आसान नहीं। यहां राम लहर में भी कांग्रेस जीती। वहीं सपा बसपा का जातीय गठबंधन फेल हुआ और कमल खिला था। कई बार यह सीट भाजपा तो कभी कांग्रेस जीतती रही। इस बार सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने विधायक का टिकट काटकर नए चेहरे पर दांव लगाया है तो डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें जारी है। जबकि सपा ने पुराने चेहरे पर दांव लगाया है। कांग्रेस व बसपा भी अपने कैडर वोटर के सहारे चुनाव मैदान है। कयासबाजी भी हर दिन बदल रही है मगर हैदरगढ़ के मतदाताओं का मूड भांपने में कोई भी सक्षम साबित नहीं हो पा रहा है।
औसानेश्वर महादेव व टीकारामन जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों वाले हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख 49 हजार 498 मतदाता हैं। जिसमें 183014 पुरुष व 166476 महिला मतदाता हैं। यहां का मतदाता कभी किसी हवा या लहर में नहीं बहा। 1962 में निर्दलीय रामकिशोर त्रिपाठी व 1977 में निर्दलीय सुंदरलाल दीक्षित को जिताकर मतदाताओं ने सभी पार्टियों को भी दरकिनार कर दिया। 1991 में जब रामलहर थी तो अप्रत्याशित परिणाम आए और कांग्रेस के सुरेंद्र नाथ अवस्थी विधायक बने। इसके बाद जब सपा बसपा का जातीय गठबंधन हुआ मतदाताओं ने सारे कयास छोड़कर भाजपा के सुंदरलाल दीक्षित को जिताया।
1977 के बाद तो यह सीट सुंदरलाल दीक्षित व सुरेंद्र नाथ अवस्थी के बीच ही इधर-उधर होती रही। 1985 में कांग्रेस से सुरेंद्र नाथ अवस्थी, 1989 में भाजपा से फिर सुंदरलाल दीक्षित, 1991 में फिर कांग्रेस से सुरेंद्र नाथ अवस्थी और 1993 में फिर भाजपा से सुंदरलाल दीक्षित और 1996 में फिर सुरेंद्र नाथ अवस्थी विधायक रहे। 2000 के उपचुनाव में राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए यहां से जीत हासिल की।
इस बार के चुनाव में भाजपा विधायक बैजनाथ रावत का टिकट कटने के बाद उनकी नाराजगी देखते हुए पार्टी ने उनके पुत्र को जिला उपाध्यक्ष बना दिया है। मगर, क्या इतना पर्याप्त है। क्या उनके समर्थक मनोयोग से काम करेंगे, यह बड़ा सवाल है। भाजपा उम्मीदवार दिनेश रावत इसी चुनाव से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू कर रहे हैं।
सपा ने ये उतारे उम्मीदवार
उधर, सपा ने पार्टी के संस्थापक सदस्य रामसागर रावत के पुत्र व यहां से पार्टी विधायक रह चुके राममगन रावत को उतारा है। राममगन पिछली बार हारे थे। बसपा श्रीचंद रावत को प्रत्याशी बनाकर कैडर वोटों के सहारे सीट हथियाना चाहती है। जबकि कांग्रेस ने अवधी फिल्म की अभिनेत्री निर्मला देवी को उतार कर नए चेहरे पर दांव लगाया है।
दिनेश व निर्मला व राममगन तीनों उम्मीदवार सिद्धौर ब्लॉक के निवासी है। मतदाताओं का रुख क्या है इसे लेकर चर्चाएं तो हो रही हैं मगर निगाहें किसी एक पर नहीं टिक रही हैं।