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लखनऊ पूरा करेगा मोदी का 'बुलेट ट्रेन ड्रीम'

Fri, 11 Jul 2014 01:02 PM IST
Updated Fri, 11 Jul 2014 01:02 PM IST
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RDSO to conduct research on MODI's bullet train

रेल बजट में भले ही लखनऊ में हाईस्पीड ट्रेन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन देश के अन्य महत्वपूर्ण रेलखंडों पर बुलेट और हाईस्पीड ट्रेन के सपने को साकार करने का जिम्मा इसी शहर को दिया गया है।

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लखनऊ स्थित अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) बुलेट ट्रेन के लिए एयरो डॉयनामिक डिजाइन के साथ उसकी पटरियों और रोलिंग स्टॉक पर अनुसंधान करेगा।

रेल बजट में आरडीएसओ को कई नए शोध के लिए टोकन मनी आवंटित हुई है। अगले बजट में इन परियोजनाओं पर पर्याप्त मात्रा में धन मिलने की उम्मीद है।

RDSO तकनीकी खराबी का भी करेगा अध्ययन

RDSO to conduct research on MODI's bullet train

आरडीएसओ हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए एलएचबी बोगियों के एक्सल में आ रही तकनीकी खराबी का भी अध्ययन करेगा। इसके लिए वह विदेशी रेलवे के अधिकारियों से परामर्श लेगा।

कानपुर से नई दिल्ली सहित देश के सात प्रमुख रेलखंडों पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हाईस्पीड ट्रेन चलाने की घोषणा हुई है।

अभी देश में एलएचबी श्रेणी की बोगियों की अधिकतम क्षमता 160 किलोमीटर प्रति घंटे ही स्वीकृत है। इसमें राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और डबल डेकर ट्रेनों की एलएचबी बोगियां 160 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ती हैं।

इन बोगियों के एक्सल का परीक्षण और अनुसंधान कर उसे 200 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ाने के लिए फिट किया जाएगा।

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खुलेगी एक नई लैब

RDSO to conduct research on MODI's bullet train

ट्रेनों की बोगियों में शार्ट सर्किट या अन्य कारणों से लगने वाली आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए आरडीएसओ में प्रयोग होंगे। इसके लिए एक नई लैब खुलेगी।

जिसमें आग की घटनाओं के रोकथाम के लिए आवश्यक संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन में टक्कर रोधी प्रणाली के विकास के लिए भी यहां अध्ययन होगा।

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पानी का होगा शोधन

RDSO to conduct research on MODI's bullet train

रेलवे में पेयजल किल्लत को देखते हुए अब इस्तेमाल पानी का शोधन कर उसे दोबारा पीने योग्य बनाया जाएगा।

इस्तेमाल पानी के शोधन पर अनुसंधान की तैयारी है। इसके लिए आरडीएसओ को नया प्रोजेक्ट दिया गया है।

आरडीएसओ एक नई लैब बनाकर इस्तेमाल पानी पर अनुसंधान करेगा। ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाला हजारों लीटर पानी पटरियों पर गिर जाता है। अब बायोटॉयलेट से उन पानी को एकत्र कर दोबारा इस्तेमाल की तैयारी है।

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