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एक कैंसर से हुई खून की कमी तो दूसरे से अधिकता
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एक कैंसर से रक्त की कमी तो दूसरे में निकलवाना पड़ रहा ब्लड
पहले 4 ग्राम प्रति डेसीलीटर था हीमोग्लोबिन, अब 20.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंचा
केजीएमयू में एक ऐसा मरीज सामने आया है, जिसे ब्लड कैंसर होने से हीमोग्लोबिन चार ग्राम प्रति डीएल पहुंच गया, लेकिन इलाज के बाद हीमोग्लोबिन इस कदर बढ़ा कि अब उसे हर दूसरे माह खून निकलवाना पड़ रहा है। यह समस्या एक दूसरे ब्लड कैंसर पोलीसाइथीमिया की वजह से हुई है। अभी मरीज पूरी तरह से ठीक है, लेकिन उसका इलाज लगातार चल रहा है।
केजीएमयू हेमेटोलॉजी विभाग के डॉ. एसपी वर्मा एवं सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में उनके पास करीब 60 साल का मरीज आया, जिसका हीमोग्लोबिन चार ग्राम प्रति डीएल आ गया था। उसकी चार चरण की कीमोथेरेपी के बाद उसका हीमोग्लोबिन 14 पर आ गया। इसके बाद कीमो के दौरान उसका हीमोग्लोबिन अचानक बढ़ने लगा और 21 पर पहुंच गया।
डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह अप्रत्याशित था। इस तरह का केस मेडिकल जर्नल में नहीं है। कई चरणों की जांच के दौरान पता चला कि पहले वाला कैंसर पूरी तरह से खत्म हो गया है और अब उस मरीज में नए तरह से पोलीसाइथीमिया हो गया है। यह सामान्य होता है। इसमें बहुत कम दवाओं की जरूरत पड़ती है, लेकिन हीमोग्लोबिन अधिक होने की वजह से हर दो माह पर मरीज का ब्लड निकलवाया जाता जाता है।
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ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में मिली जगह
फिलहाल इस केस को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में जगह मिली है। डॉ. एसपी वर्मा ने बताया कि लिम्फोमा में रक्त बढ़ने के केस कुछ जगह रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन लिम्फोप्लाजमोसिटिक लिम्फोमा में रक्त बढ़ने का यह पहला केस है।
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पहले 4 ग्राम प्रति डेसीलीटर था हीमोग्लोबिन, अब 20.4 ग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंचा
केजीएमयू में एक ऐसा मरीज सामने आया है, जिसे ब्लड कैंसर होने से हीमोग्लोबिन चार ग्राम प्रति डीएल पहुंच गया, लेकिन इलाज के बाद हीमोग्लोबिन इस कदर बढ़ा कि अब उसे हर दूसरे माह खून निकलवाना पड़ रहा है। यह समस्या एक दूसरे ब्लड कैंसर पोलीसाइथीमिया की वजह से हुई है। अभी मरीज पूरी तरह से ठीक है, लेकिन उसका इलाज लगातार चल रहा है।
केजीएमयू हेमेटोलॉजी विभाग के डॉ. एसपी वर्मा एवं सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में उनके पास करीब 60 साल का मरीज आया, जिसका हीमोग्लोबिन चार ग्राम प्रति डीएल आ गया था। उसकी चार चरण की कीमोथेरेपी के बाद उसका हीमोग्लोबिन 14 पर आ गया। इसके बाद कीमो के दौरान उसका हीमोग्लोबिन अचानक बढ़ने लगा और 21 पर पहुंच गया।
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डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह अप्रत्याशित था। इस तरह का केस मेडिकल जर्नल में नहीं है। कई चरणों की जांच के दौरान पता चला कि पहले वाला कैंसर पूरी तरह से खत्म हो गया है और अब उस मरीज में नए तरह से पोलीसाइथीमिया हो गया है। यह सामान्य होता है। इसमें बहुत कम दवाओं की जरूरत पड़ती है, लेकिन हीमोग्लोबिन अधिक होने की वजह से हर दो माह पर मरीज का ब्लड निकलवाया जाता जाता है।
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ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में मिली जगह
फिलहाल इस केस को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में जगह मिली है। डॉ. एसपी वर्मा ने बताया कि लिम्फोमा में रक्त बढ़ने के केस कुछ जगह रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन लिम्फोप्लाजमोसिटिक लिम्फोमा में रक्त बढ़ने का यह पहला केस है।