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नए राम मंदिर ट्रस्ट को रामलला देंगे 10 करोड़, मंडलायुक्त ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट
Sat, 16 Nov 2019 03:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा
धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 16 Nov 2019 03:44 AM IST
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टेंट में रामलला
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विराजमान रामलला की संपूर्ण संपत्तियां सरकार की ओर से बनने वाले नए राम मंदिर ट्रस्ट को मिलेंगी। केंद्र सरकार को इस आशय की रिपोर्ट मंडलायुक्त/रिसीवर की ओर से भेजी गई है।
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अब तक रामलला को मिल रहे चढ़ावे का हिसाब-किताब मंडलायुक्त के बैंक खाते से ही होता था। रामलला नाबालिग हैं, इसलिए नया ट्रस्ट ही उनके नाम पर मिलने वाले दान, दक्षिणा-चढ़ावा आदि के लिए बैंक खाता खोलकर आय-व्यय का संचालन करेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर के अपने ऐतिहासिक फैसले में रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपते हुए मंदिर निर्माण के लिए सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था।
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शीर्ष प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में विराजमान रामलला की संपूर्ण व्यवस्था के लिए नियुक्त रिसीवर/मंडलायुक्त मनोज मिश्र से रामलला की संपूर्ण संपत्तियों का ब्योरा मांगा।
मंडलायुक्त कार्यालय ने शुक्रवार को इसे तैयार कर गृह मंत्रालय को भेज दिया है। इसके मुताबिक रामलला को प्राप्त चढ़ावे व दान के रूप में करीब 10 करोड़ की नकदी कमिश्नर अयोध्या के खाते में जमा है।
रामलला के नाम से भू-संपत्ति दर्ज नहीं है, भूमि नजूल के खाते में है। रिपोर्ट में प्रस्तावित किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 2.77 एकड़ भूमि समेत भव्य राम मंदिर के लिए अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि की देखरेख भी सरकार की ओर से बनने वाला ट्रस्ट करे।
ट्रस्ट का स्वरूप कैसा होगा, इसे लेकर भी धीरे-धीरे प्रशासनिक हलकों में स्थिति स्पष्ट नजर आने लगी है। दो तरह की संभावना जताई जा रही है। पहला राष्ट्रपति की ओर से सीधे आर्डिनेंस के जरिए और दूसरा संसद में नया बिल लाकर।
सूत्रों का यहां तक कहना है कि जो तीन निजी ट्रस्ट आपस में मंदिर निर्माण का अधिकार जताने जैसी बातें करते हैं, कोर्ट के फैसले के बाद उनका कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। अलबत्ता राम मंदिर के नाम पर जुटाई गई उनकी समस्त संपत्तियां व बैंक खाते सरकार मंदिर निर्माण के लिए जब्त कर सकती है।
नए ट्रस्ट का स्वरूप जल्द आएगा सामने
मंडलायुक्त मनोज मिश्र बताते हैं कि विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने अयोध्या एक्ट के जरिए 1993 में ही मालिकाना हक के लिए लड़ी जा रही 2.77 एकड़ भूमि और पर्यटन विभाग की ओर से पट्टे पर न्यास को दी गई भूमि समेत आसपास के मंदिर की कुल 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था।
इसी में सुरक्षा संबंधी सारे इंतजाम संचालित हैं। रामलला को लेकर केंद्र सरकार को समस्त विवरण भेजा जा रहा है। सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक है। राम मंदिर के लिए नए ट्रस्ट का स्वरूप जल्द सामने आ जाएगा और रामलला की समस्त संपत्तियां उसमें समाहित हो जाएंगी।
...नहीं करनी होगी पूजा-पाठ, राग-भोग की चिंता
विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि राम मंदिर का नया ट्रस्ट बने, सारा नियंत्रण सरकार का हो, इससे अच्छा कुछ नहीं होगा। रामलला ने टाट में रहकर 10 करोड़ सरकार को दिए हैं, जब भव्य मंदिर बनेगा तो यह रकम कई गुना बढ़ जाएगी। तब पुजारी से लेकर पूजा-पाठ, राग-भोग, वस्त्र आदि की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।
अफसर-जजों की टीम करती रहेगी परिसर का निरीक्षण
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहले हर दूसरे रविवार को विवादित परिसर का निरीक्षण होता था। अब अंतिम फैसले के बाद हालात बदल गए हैं। प्रशासन का कहना है कि विराजमान रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर समेत आसपास की साफ-सफाई, खोदाई में मिली ऐतिहासिक सामग्री, सुरक्षा आदि को लेकर दो जजों, कमिश्नर, एएसआई आदि अफसरों की टीम अब भी उसी तरह निरीक्षण करेगी।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों को खारिज कर दिया है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान अब पक्षकारों या उनके प्रतिनिधियों की जरूरत नहीं होगी। जब केंद्र सरकार ट्रस्ट व उसके कार्य का स्वरूप तय कर देगी, तब उसके अनुरूप व्यवस्थाएं लागू होंगी।
रामलला के पुजारियों के दिन बहुरने के आसार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब विराजमान रामलला का मंदिर भव्य व दिव्य बनेगा ही, उनके पुजारियों के पारिश्रमिक समेत राग-भोग में भी कोई कमी नहीं आएगी। अब तक कोर्ट के निर्देशानुसार साल-दर-साल महंगाई से तुलना करके बजट बनाना पड़ता था।
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ आदि किसी भी मंदिर की तुलना में यहां का खर्च बहुत कम था। जैसे-तैसे राग-भोग और पुजारियों का जीवन यापन होता रहा है।
मुख्य पुजारी के रूप में उन्हें 13 हजार रुपये मासिक मिलता है, जबकि चार अन्य पुजारियों को आठ-आठ हजार रुपये मासिक दिया जाता है। इसके अलावा कार्यरत 4 कर्मचारियों को तो मात्र छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। पुजारियों का यह पारिश्रमिक सरकार के न्यूनतम वेतन अधिनियम की तुलना में भी कम था।
उन्होंने बताया कि राग-भोग के लिए भी हर माह मात्र 30 हजार रुपये मिलता था। रामलला समेत अन्य विराजमान विग्रहों के वस्त्र आदि के लिए इस बार रामनवमी पर 51 हजार रुपये मिला था, जबकि वस्त्र से लेकर पंचमेवा, पांच तरह की पंजीरी, पंचामृत आदि में खर्च 56 हजार हुआ था।
रामनवमी पर इसके पहले 42 हजार ही मिलता था। ऐसे में हर दिन के लिए तय अलग-अलग सात वस्त्र बनवाना, फटने पर उसे बदलते रहना मुश्किल होता था। कई बार पुराने वस्त्र फट जाते थे। वहीं, अयोध्या के तमाम मंदिर हैं, जहां भगवान को रोज नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
सतेंद्र दास कहते हैं कि राम मंदिर का दावा करने वाले तमाम लोग आज ट्रस्ट के नाम पर हक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी ध्यान नहीं आया कि रामलला को वस्त्र आदि का दान करें।
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ आदि किसी भी मंदिर की तुलना में यहां का खर्च बहुत कम था। जैसे-तैसे राग-भोग और पुजारियों का जीवन यापन होता रहा है।
मुख्य पुजारी के रूप में उन्हें 13 हजार रुपये मासिक मिलता है, जबकि चार अन्य पुजारियों को आठ-आठ हजार रुपये मासिक दिया जाता है। इसके अलावा कार्यरत 4 कर्मचारियों को तो मात्र छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। पुजारियों का यह पारिश्रमिक सरकार के न्यूनतम वेतन अधिनियम की तुलना में भी कम था।
उन्होंने बताया कि राग-भोग के लिए भी हर माह मात्र 30 हजार रुपये मिलता था। रामलला समेत अन्य विराजमान विग्रहों के वस्त्र आदि के लिए इस बार रामनवमी पर 51 हजार रुपये मिला था, जबकि वस्त्र से लेकर पंचमेवा, पांच तरह की पंजीरी, पंचामृत आदि में खर्च 56 हजार हुआ था।
रामनवमी पर इसके पहले 42 हजार ही मिलता था। ऐसे में हर दिन के लिए तय अलग-अलग सात वस्त्र बनवाना, फटने पर उसे बदलते रहना मुश्किल होता था। कई बार पुराने वस्त्र फट जाते थे। वहीं, अयोध्या के तमाम मंदिर हैं, जहां भगवान को रोज नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
सतेंद्र दास कहते हैं कि राम मंदिर का दावा करने वाले तमाम लोग आज ट्रस्ट के नाम पर हक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी ध्यान नहीं आया कि रामलला को वस्त्र आदि का दान करें।