'आरएसएस के स्वयंसेवक की तरह काम कर रहे हैं यूपी के राज्यपाल'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने सोमवार को राज्यपाल राम नाईक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यपाल को वापस बुलाने की मांग की। कहा कि राज्यपाल को बयान देने का इतना शौक है तो उन्हें केंद्रीय मंत्री बना दिया जाए ताकि वह घूम-घूमकर सांप्रदायिक एजेंडे को पूरा कर सकें। उन्होंने राज्यपाल पर आरएसएस के स्वयंसेवक की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया।
रामगोपाल सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने रविवार को उरई में राज्यपाल के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा, यूपी को छोड़कर किसी भी प्रदेश के राज्यपाल कानून व्यवस्था पर नहीं बोलते। छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वोत्तर राज्यों में प्राय: घटनाएं होती रहती हैं लेकिन क्या वहां के राज्यपालों के बयान सुने हैं? यूपी, देश का चौथा-पांचवा हिस्सा है। यहां कोई भी घटना हो जाए तो राज्यपाल हर रोज बयान देते हैं।
लगता है, वह गृहमंत्री हैं और कानून व्यवस्था की समीक्षा करने वाले हैं। उनके क्रियाकलाप पद की गरिमा के खिलाफ हैं। सपा इसकी निंदा करती है। उन्होंने कहा, यदि कोई बात हो तो राज्यपाल को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाना चाहिए। मुख्यमंत्री समय-समय पर मिलकर उन्हें प्रदेश के हालात से अवगत कराते रहते हैं।
'सिर्फ बयान ही नहीं देते राजनीतिक रंग भी देते हैं'
सपा महासचिव ने कहा, संविधान का जानकार होने के बावजूद उन्हें विवश होकर राज्यपाल के खिलाफ बोलना पड़ रहा है। कोई दिन नहीं जो वह बयान न देते हों। बयान ही नहीं देते, उसे राजनीतिक रंग भी देते हैं। यह चिंता की बात है।
यही वजह है कि जिस राज्यपाल के बारे में कोई एक शब्द नहीं बोलता, उनके खिलाफ मजबूरन प्रेस में बोलना पड़ रहा है। उम्मीद है, राज्यपाल अपने अंदर झांकेंगे और सोचेंगे कि किस तरह का व्यवहार करें, शायद कुछ सुधार करें।
केंद्र के इशारे पर काम करने से इन्कार
रामगोपाल ने राज्यपाल को निशाने पर लिया लेकिन केंद्र सरकार के प्रति नरमी बरती। क्या वह केंद्र के इशारे पर कानून व्यवस्था की स्थिति पर रिपोर्ट भेजने को कह रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा, राज्यपाल कानून व्यवस्था पर रिपोर्ट भेजने के लिए स्वतंत्र हैं, उन्हें केंद्र के निर्देश की जरूरत नहीं होती।
कहा-‘हम नहीं समझते, केंद्र का इशारा है। ऐसा होता तो दूसरे राज्यों के गवर्नर भी ऐसी बातें करते’। कल्याण सिंह और केशरीनाथ त्रिपाठी का उदाहरण देते हुए कहा, कौन से राज्यपाल हैं जो ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं।
जिन राज्यों में गैर भाजपा दलों की सरकारें हैं वहां के राज्यपालों का व्यवहार भी ऐसा नहीं है। क्या राज्यपाल की शिकायत प्रधानमंत्री से करेंगे, इस पर उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। कहा कि यह सवाल नेताजी से पूछिये। वह दिल्ली गए हैं, वह मिल भी सकते हैं।
दादरी पर क्यों नहीं बोले एक शब्द
रामगोपाल ने सवाल उठाया कि दादरी कांड पर राज्यपाल एक शब्द क्यों नहीं बोले ? सारी दुनिया जानती है कि इसे करने वाले कौन लोग थे ? मूर्ति विसर्जन को लेकर बवाल पर राज्य सरकार सख्त हुई तो राज्यपाल कहने लगे कि कानून व्यवस्था ध्वस्त है। उन्होंने कहा, राज्यपाल विशुद्ध रूप से सांप्रदायिक जहर घोलने वाले संगठनों के कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे हैं। उनकी भाषा भी ऐसी हो जाती है, मानों वह राज्यपाल नहीं आरएसएस के स्वयंसेवक हों।
नहीं बरत रहे पद की गोपनीयता
रामगोपाल ने कहा, राज्यपाल अपने पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण करते हैं। आमतौर पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच हुई चर्चा को सार्वजनिक नहीं किया जाता लेकिन राम नाईक से यदि मुख्यमंत्री मिलने जाएं तो वह बताते हैं कि किन मुद्दे पर बात हुई है, उन पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं। वह पब्लिक और प्रेस के बीच भी इसी तरह की बातें करते हैं।
संविधान की भावना है, सीएम-गवर्नर में न हो टकराव
सपा महासचिव ने कहा, संविधान की ड्राफ्ट कमेटी में राज्यपाल की नियुक्ति पर दो तरह के विचार थे। पहला यह कि राज्यपाल जनता से चुना जाए और दूसरा यह कि उन्हें केंद्र सरकार नामित करे। पंडित नेहरू ने कहा था कि मुख्यमंत्री जनता से निर्वाचित होता है। यदि राज्यपाल भी जनता से चुना जाएगा तो उनके बीच टकराव होगा। संविधान की भावना है कि गवर्नर और मुख्यमंत्री के बीच टकराव न हो। राज्यपाल नाईक संविधान की भावना के विपरीत जाकर काम कर रहे हैं।
'कोई मुलायम की तारीफ करे तो मुंह बंद नहीं कर सकते'
रामगोपाल ने कहा, प्रदेश के उन जिलों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई जो आमतौर पर शांत रहते हैं। संवेदनशील वेस्ट यूपी में शांति रही। माहौल बिगाड़ने वाले वही लोग हो सकते हैं जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण कराया था। उन्हें ही ध्रुवीकरण का लाभ मिलता है और इसी नाते वे दिल्ली की सत्ता में हैं। मात्र पोस्टर फाड़ने पर हिंसा होना दिखाता है कि लोगों के मन में नफरत पैदा की गई है। यह उसी का नतीजा है।
उन्होंने इससे इन्कार किया कि वे भाजपा की आलोचना से बच रहे हैं। मोदी द्वारा मुलायम की तारीफ पर कहा, कोई प्रशंसा करे तो उसका मुंह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, जिन स्थानों पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है वहां स्थिति को और खराब करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ नेता माहौल को और बिगाड़ने के लिए ही घटनास्थल पर जाते हैं। ऐसे लोगों पर सख्ती होनी चाहिए।
तोताराम मंत्री नहीं, होगी कार्रवाई
उन्होंने कहा, तोताराम के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया है। उनके खिलाफ केस चलेगा। यदि पुलिस कार्रवाई न करती तो उन पर एफआईआर न होती। तोताराम मंत्री नहीं हैं। एक सवाल के जवाब में कहा कि मंत्रिपरिषद में फेरबदल हो भी सकता है और नहीं भी। इस बारे में मुख्यमंत्री से पूछिए।