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अयोध्या में राम मंदिर होगा भाजपा सरकार के लिए नई चुनौती

Mon, 13 Mar 2017 10:26 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 13 Mar 2017 10:26 AM IST
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ram temple is a new challenge for BJP in Uttar Pradesh.
- फोटो : amar ujala

तीन चौथाई के प्रचंड बहुमत से सूबे की सत्ता में आई भाजपा के लिए अयोध्या में मंदिर निर्माण का मुद्दा भी चुनौती बनकर खड़ा होगा। वैसे तो भगवा ब्रिगेड या विश्व हिंदू परिषद अथवा साधु-संत इस मुद्दे पर प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार के सामने जल्दी कोई समस्या या दुविधा खड़ी करने के मूड में नहीं हैं।

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पर, मानना इनका भी है कि जनता ने इतनी बड़ी जीत दी है तो तमाम वजहों के साथ इसके पीछे कहीं न कहीं इस मुद्दे पर भी सरकार से रास्ता निकालने की आकांक्षाएं भी शामिल है। इसलिए इस मामले में एक सीमा के बाद सभी की अपेक्षा होगी कि मंदिर का निर्माण शुरू हो।
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दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान कई जगह भाजपा नेताओं ने अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए प्रदेश में सरकार और राज्यसभा में बहुमत की कमी का हवाला दिया है।
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पर, जिस तरह उत्तर प्रदेश में भाजपा को तीन चौथाई से ज्यादा सीटों पर जीत मिली है, उसके बाद भाजपा के लिए राज्यसभा में भी बहुमत मिलना निश्चित हो गया है।

भाजपा के लिए नहीं होगा राम मंदिर मुद्दे पर जवाब

ram temple is a new challenge for BJP in Uttar Pradesh.

जाहिर है कि भाजपा नेताओं के पास इस तरह का कोई बहाना अब नहीं रह गया है। स्वाभाविक रूप से अभी नहीं तो आगे इस मुद्दे पर भी नई सरकार से सवाल भी होंगे और समाधान निकालने की अपेक्षा भी। जिनका उत्तर देना बहुत आसान नहीं होगा।

कारण, यह मामला बहुत आसानी से हल हो जाएगा, इसकी दूर-दूर तक संभावना नहीं है।

वैसे भी तीन चौथाई बहुमत से जीतकर आई भाजपा के रणनीतिकार नहीं चाहेंगे कि 14 वर्षों के वनवास के बाद लौटी भाजपा की सरकार के सामने तुंरत इस मुद्दे पर कोई विवाद खड़ा हो जाए।

यह भी है वजह

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राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे पूर्व सांसद डॉ. राम विलास दास वेदांती के मुताबिक, भाजपा को मिले बहुमत के पीछे पार्टी की तरफ से घोषणा पत्र में शामिल किया गया यह वादा भी रहा है कि वह संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं को तलाशेगी।

यह सरकार सिर्फ बहुसंख्यकों की ताकत पर आई है। यह साबित हो गया कि तुष्टीकरण की नीतियों के बिना भी सूबे में सरकार बन सकती है। वेदांती के अनुसार, ‘केंद्र में सरकार बनने के बाद हम लोगों से भी इस मुद्दे पर सवाल शुरू हो गए हैं कि मंदिर निर्माण कब होगा। अभी तक हम लोग यूपी में सरकार नहीं है और राज्यसभा में बहुमत भी नहीं है। इसके कारण कुछ दिक्कतें हैं। पर, अब ऐसा नहीं है।

2018 में राज्यसभा में भी भाजपा का बहुमत हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेंगे। मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाएगा।’ कहते हैं कि काफी दिनों बाद ऐसी सरकार बनने जा रही है जिसके राज्य में हिंदू दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं रहेगा।

इसलिए सरकार बनने के साथ ही हम लोग इस तरह का कोई सवाल सरकार के सामने नहीं खड़ा करने वाले जिससे उसे कोई समस्या हो। वैसे भी पूरा भरोसा है कि मंदिर निर्माण अगले साल शुरू हो जाएगा।

मंदिर निर्माण के लिए अनुकूल बन रहे हालात

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श्री राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य और अयोध्या आंदोलन का केंद्र रहे दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास भी कहते हैं, ‘प्रदेश में इतना बड़ा बहुमत राम मंदिर पर घोषणा पत्र में किए गए वादे के कारण आया है। वैसे भी केंद्र के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना हम सभी लोगों के लिए बड़ी उपलब्थि भी है और उम्मीद भी।

इससे केंद्र में राज्यसभा में अगले साल भाजपा के पास बहुमत हो जाएगा। स्वाभाविक रूप से यह सारी परिस्थितियां मंदिर निर्माण के लिए अनुकूलता की स्थिति पैदा करने वाली है। रही बात प्रदेश की नई सरकार के सामने यह मु्ददा उठाने की तो इसकी जरूरत ही नहीं है। जब रामभक्तों की सरकार बन रही है।

केंद्र में पहले से ही रामभक्त प्रधानमंत्री और रामभक्तों की सरकार है तो फिर इस मुद्दे पर किंतु, परंतु या लेकिन जैसे शब्दों की आवश्यकता ही नहीं है। विश्वास है कि दोनों सरकारें मिलकर खुद रास्ता निकालेंगी। उन्हें भी लोगों की भावनाएं पता हैं।’

विहिप नहीं चाहती राज्य सरकार के सामने हो मुश्किल

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हालांकि, विहिप इस मुद्दे पर भाजपा की नई प्रदेश सरकार के लिए कोई दुविधा नहीं खड़ी करना चाहती। पर, लंबे समय तक उसके लिए भी इस मुद्दे पर चुप रहना संभव नहीं होगा।

विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा स्वीकार भी करते हैं, ‘इतनी बड़ी जीत के बाद जनता ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के रास्ते के तमाम अवरोध दूर कर दिए हैं। इसलिए मंदिर निर्माण को लेकर हमारे सामने लोगों की आकांक्षाएं आना स्वाभाविक है।’

हालांकि वह यह भी जोड़ते हैं कि भाजपा नेतृत्व के दिमाग में भी यह बात होगी। इसलिए वह खुद ही कोई न कोई रास्ता निकालेंगे। रही बात नई सरकार से अपेक्षा की तो अभी पहले गठन हो जाए। अपेक्षा नहीं विश्वास है कि मंदिर निर्माण का रास्ता निकलेगा।

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