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रायबरेली से कर्नाटक तक को सियासी संदेश देंगे शाह, 21 अप्रैल को कांग्रेस के गढ़ में दिखाएंगे ताकत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:37 AM IST
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Amit shah
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मौसम का पारा तेजी से ऊपर चढ़ने के साथ ही प्रदेश का राजनीतिक तापमान भी उतनी तेज गति से ही ऊपर चढ़ने लगा है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बुधवार को रायबरेली दौरे के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भी 21 अप्रैल को कांग्रेस के इस गढ़ में आकर रैली का फैसला इसका प्रमाण है।
जिस समय रायबरेली के कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के घर ‘पंचवटी’ के अब कांग्रेस की न रहने का खत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उनके भाजपा में जाने की चर्चा हो रही है। उसी बीच शाह का रायबरेली में रैली का फैसला अपने भीतर बड़े राजनीतिक संदेश छिपाए है।
शाह, उत्तर भारत के कांग्रेस के इस प्रमुख गढ़ रायबरेली में रैली करके और वहां के इस प्रमुख कांग्रेसी परिवार के लोगों को भाजपा में शामिल कराकर चुनावी राज्य कर्नाटक तक को राजनीतिक संदेश दे देना चाहते हैं।
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वह यह बताना चाहते हैं कि जब कांग्रेस की कर्ता-धर्ता सोनिया और राहुल के क्षेत्र में आम लोगों में ही नहीं खुद प्रमुख कांग्रेसियों में मौजूदा नेतृत्व को लेकर हताशा है तो उस कांग्रेस और उसके ये नेता कर्नाटक या देश के अन्य राज्यों का क्या भला करेंगे।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक का यह कहना कि कांग्रेस का किला दरक रहा है। राहुल और सोनिया को यह बताना चाहिए कि इतने लंबे समय तक सत्ता संचालन के केंद्र रहे परिवार के प्रति निष्ठावान रहे रायबरेली और अमेठी का विकास क्यों नहीं हुआ?
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जिस समय रायबरेली के कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के घर ‘पंचवटी’ के अब कांग्रेस की न रहने का खत सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उनके भाजपा में जाने की चर्चा हो रही है। उसी बीच शाह का रायबरेली में रैली का फैसला अपने भीतर बड़े राजनीतिक संदेश छिपाए है।
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शाह, उत्तर भारत के कांग्रेस के इस प्रमुख गढ़ रायबरेली में रैली करके और वहां के इस प्रमुख कांग्रेसी परिवार के लोगों को भाजपा में शामिल कराकर चुनावी राज्य कर्नाटक तक को राजनीतिक संदेश दे देना चाहते हैं।
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वह यह बताना चाहते हैं कि जब कांग्रेस की कर्ता-धर्ता सोनिया और राहुल के क्षेत्र में आम लोगों में ही नहीं खुद प्रमुख कांग्रेसियों में मौजूदा नेतृत्व को लेकर हताशा है तो उस कांग्रेस और उसके ये नेता कर्नाटक या देश के अन्य राज्यों का क्या भला करेंगे।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक का यह कहना कि कांग्रेस का किला दरक रहा है। राहुल और सोनिया को यह बताना चाहिए कि इतने लंबे समय तक सत्ता संचालन के केंद्र रहे परिवार के प्रति निष्ठावान रहे रायबरेली और अमेठी का विकास क्यों नहीं हुआ?
कोशिश यह बताने की
bjp-congress
दरअसल, अमेठी और रायबरेली की पराजय मोदी और शाह को ही नहीं भगवा टोली के रणनीतिकारों को भी लगातार कचोटती रही है। स्मृति ईरानी की अमेठी में लगातार सक्रियता और अब शाह की रायबरेली में रैली का कार्यक्रम इस कसक को दूर करने की तैयारी दिख रही है।
भले ही दिनेश प्रताप सिंह और उनके भाइयों ने अभी तक भाजपा में जाने की अधिकृत घोषणा न की हो लेकिन सूत्रों की मानें तो उनके भाई हरचंदपुर से कांग्रेस के विधायक राकेश सिंह भले ही तकनीकी तौर पर भाजपा में अधिकृत रूप से न शामिल हों लेकिन एक तरह से यह परिवार शाह की रैली में भाजपाई हो जाएगा।
इस रैली को लेकर भाजपा की तरफ से ही नहीं बल्कि एमएलसी के परिवार की तरफ से भी तैयारी की जा रही है। भाजपा और एमएलसी की कोशिश इस बहाने अपनी ताकत दिखाने की नजर आ रही है। भाजपा के रायबरेली प्रभारी हीरो वाजपेयी ने बुधवार को वहां दौरा कर रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। क्षेत्र संगठन मंत्री बृजबहादुर भी रायबरेली का दौरा कर चुके हैं।
भले ही दिनेश प्रताप सिंह और उनके भाइयों ने अभी तक भाजपा में जाने की अधिकृत घोषणा न की हो लेकिन सूत्रों की मानें तो उनके भाई हरचंदपुर से कांग्रेस के विधायक राकेश सिंह भले ही तकनीकी तौर पर भाजपा में अधिकृत रूप से न शामिल हों लेकिन एक तरह से यह परिवार शाह की रैली में भाजपाई हो जाएगा।
इस रैली को लेकर भाजपा की तरफ से ही नहीं बल्कि एमएलसी के परिवार की तरफ से भी तैयारी की जा रही है। भाजपा और एमएलसी की कोशिश इस बहाने अपनी ताकत दिखाने की नजर आ रही है। भाजपा के रायबरेली प्रभारी हीरो वाजपेयी ने बुधवार को वहां दौरा कर रैली की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। क्षेत्र संगठन मंत्री बृजबहादुर भी रायबरेली का दौरा कर चुके हैं।