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सांप्रदायिकता पर वार, 'भारत केवल हिंदुओं की जागीर नही है'

Tue, 24 Nov 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 24 Nov 2015 12:32 AM IST
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Rajendra Sachchar says India is not only for Hindus.

सच्चर कमेटी के अध्यक्ष रहे पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर ने कई सवाल खड़े करते हुए कहा कि  देश में मुसलमानों को ही क्यों राष्ट्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी, हिन्दुओं को क्यों नहीं ऐसा करना चाहिए? उन्होंने कहा कि हमें समझ लेना चाहिए कि यह देश केवल हिन्दुओं की जागीर नहीं है। सांप्रदायिकता के आधार पर अगर भेदभाव होता है तो यह देश के साथ गद्दारी होगी, जो बर्दाश्त नहीं होगी।

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सोमवार को यूपी हिन्दी संस्थान में सांप्रदायिक सद्भाव सोसाइटी के क्षेत्रीय सम्मेलन के तहत देश में बढ़ रही असहिष्णुता पर पूर्व न्यायाधीश सच्चर बोल रहे थे। उनका कहना था कि एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खां तक ने यह माना कि हिन्दू और मुस्लिम देश की दो आंखें हैं। एक को भी तकलीफ हुई तो नुकसान पूरे देश को होगा। खुद महात्मा गांधी भी इस बात से सहमत थे और कई बार उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात कही।
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सर्वधर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने खुद माना कि देश की तरक्की हिन्दू राज्य के तौर पर नहीं हो सकती। मेरा खुद का मानना है कि देश का विकास तभी हो सकता है, जबकि हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर काम करें।
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मुझे दु:ख होता है कि हिन्दुस्तान में सांप्रदायिकता जैसे विषय पर सेमिनार करना पड़ता है। संविधान में धर्मनिरपेक्षता को बुनियादी तत्व माना गया है। अगर कोई धर्म के आधार पर भेदभाव करता है तो यह संविधान को गलत बताना है।

मुस्लिमों को प्रवेश नहीं देती हैं शिक्षण संस्‍थाएं

Rajendra Sachchar says India is not only for Hindus.

सम्मेलन में मुख्य वक्ता जस्टिस सच्चर ने कहा कि अल्पसंख्यकों की शैक्षिक संस्थाओं को सुप्रीम कोर्ट के आरटीआई के लिए आदेश को स्वत: ही मानकर 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों की मुफ्त शिक्षा के लिए छोड़ देनी चाहिए। वैसे, यह आदेश पर उन पर लागू नहीं होता। हालांकि, इस पहल को शुरू करने का प्रयास तो किया ही जाना चाहिए।

मेरी जानकारी में है कि मुस्लिम बच्चों को ऐसी सीटों पर मुफ्त प्रवेश देने की जगह यह संस्थाएं गैर-मुस्लिमों को प्रवेश देने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाती हैं।

धर्मनिरपेक्षता छोड़ी तो सरकार खारिज

1992 का जिक्र करते हुए जस्टिस सच्चर ने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हम सुप्रीम कोर्ट गए। भाजपा सरकार के खिलाफ याचिका की सुनवाई के बाद कई राज्यों में उनकी चयनित सरकार को खारिज कर दिया गया था।

हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की सरकार ने दलील दी कि उनके यहां सांप्रदायिक हालात नहीं बने। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि आपकी पार्टी ने धर्मनिरपेक्षता की भावना को तोड़ा है। किसी को भी राहत नहीं मिली। यूपी सरकार भी इसमें शामिल थी।

'सम्राट अशोक ने अपने भाइयों को ही मार डाला था'

Rajendra Sachchar says India is not only for Hindus.

हमेशा पुरानी बातों को आधार बनाकर सांप्रदायिक माहौल बनाया जाता है। मेरा कहना है कि सम्राट अशोक जब बदला तो उसके पहले उसने अपने ही भाइयों का कत्ल किया था। इसके बाद भी उसको अहिंसा के लिए जाना जाता है। इतिहास के नाम पर प्रोपगेंडा बंद होना चाहिए। इसका कोई मतलब नहीं है।

यह केवल राजनीतिक चाल है जिसे हम सभी को समझ लेना चाहिए। असांप्रदायिक शक्तियों को तय करना होगा कि वे फिरकापरस्तों को आगे नहीं बढ़ने देंगे।

भगवा आतंकवाद पर कोई बात नहीं
जस्टिस सच्चर ने कहा कि दिल्ली में मुस्लिम लड़के पकड़े गए। 5-7 साल तक उनको जेल में रहना पड़ा। स्थानीय प्रशासन से लेकर मीडिया तक में खूब हल्ला मचा। क्या भगवा आतंकवाद पर इतनी बात होती है। असीमानंद, प्रज्ञा ठाकुर जैसे आतंकवादी जेल में हैं। इस पर कोई क्यों खुलकर नहीं बोलता?

गौ मांस के निर्यातक यूपी में 90 प्रतिशत हिन्दू

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उन्होंने कहा कि आंकड़े देख लीजिए। गौ मांस का सबसे बड़ा निर्यातक यूपी है। यहां भी सबसे 90 प्रतिशत मालिक हिन्दू हैं। एक भाजपा सांसद अपना बचाव करते हैं कि उन्होंने जमीन बेची। अब कोई क्या उपयोग करता है? इससे वह अंजान थे।

क्या वह इतना भी पता नहीं कर पाए कि कंपनी एक्ट में कंपनी बनाए जाने का उद्देश्य भी लिखा होता है। अपने फायदे केलिए बीफ फैक्ट्री के लिए जमीन बेच दी।

आज समान कानून, कल समान खाना-पहनावा की बात करेंगे
जस्टिस सच्चर ने कहा कि पर्सनल लॉ समाप्त कर एक समान कानून की वकाल होती है, मैं इसके खिलाफ हूं। क्यों पर्सनल लॉ खत्म कर दिया जाए? आज एक समान कानून की बात करते हैं। कल एक जैसा खाना, एक जैसे कपड़े पहनने को मजबूर किया जाएगा।

अगर पर्सनल लॉ से कोई समस्या है तो उस समुदाय के लोगों को उस हल निकालने का मौका दिया जाना चाहिए। सच्चर कमेटी की सिफारिशों के लागू करने पर उन्होंने कहा कि कई लोगों को मुगालता है कि यह मुसलमानों के लिए रिपोर्ट थी। इसमें मुसलमानों के हालात को केवल दूसरे समुदायों से तुलना की गई थी।

देश में सर्वमान्य चेहरों की कमी

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सोसाइटी के संस्थापक सदस्य और आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. बिपिन त्रिपाठी ने कहा कि गठन के समय एक सर्वमान्य व्यक्तित्व की तलाश थी। गोपाल गांधी ने अपने सिद्धांतों की वजह से मना कर दिया। हमें अध्यक्ष के लिए कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जोकि सर्वमान्य हो। इसके बाद पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को चुना गया।

हालांकि, वह अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से शांति निकेतन में रह रहे हैं और सोसाइटी की नियमित बैठकों में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। कार्यक्रम में एलयू की पूर्व वीसी प्रो. रूपरेखा वर्मा, राज्यसभा सदस्य मो. अदीब, विधायक रीता बहुगुणा जोशी, सोशल एक्टिविस्ट डॉ. इरफान इंजीनियर मौजूद रहे।

‘लोहिया को बदनाम कर रहे मुलायम’

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर सैफई में भव्य आयोजन पर पूर्व जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने नाराजगी दिखाई है। लखनऊ में जस्टिस सच्चर ने कहा ‘बर्थडे बैश’ से लोहिया की बदनामी कर रहे हैं। एक तरफ वह लोहिया का नाम लेते हैं तो दूसरी तरफ जन्मदिन के भव्य कार्यक्रम होते हैं। उनका इशारा एक दिन पहले ही सैफई में हुए भव्य आयोजन की तरफ था।

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