{"_id":"65d3ffa1afcad9f785073384","slug":"rahul-gandhi-s-politics-started-with-ram-and-shiva-now-trying-to-create-an-environment-for-social-justice-2024-02-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहुल गांधी की राजनीति: राम और शिव से हुई शुरुआत, अब सामाजिक न्याय को लेकर माहौल बनाने की है कोशिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहुल गांधी की राजनीति: राम और शिव से हुई शुरुआत, अब सामाजिक न्याय को लेकर माहौल बनाने की है कोशिश
Tue, 20 Feb 2024 06:58 AM IST
रोहित मिश्र
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 20 Feb 2024 06:58 AM IST
सार
Bharat Jodo Nyaya Yatra: राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा में यूपी में हैं। उनके मुद्दे शहर दर शहर बदल रहे हैं। धर्म, अर्थ और सामाजिक समीकरण से सियासी माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
विज्ञापन
Rahul Gandhi Bharat Jodo Nyay Yatra
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सामाजिक न्याय यात्रा के जरिये यूपी में कांग्रेस की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने की कोशिश में हैं। वह काशी में धर्म की बात करते हैं तो प्रयागराज में आर्थिक विकास की। अमेठी पहुंचने पर उनका फोकस सामाजिक न्याय हो जाता है। वह भीड़ को भागीदारी का सपना दिखाकर अपना बनाने की कोशिश करते हैं। अब उनकी आगे की यात्रा भी सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
विज्ञापन
राहुल की यात्रा यूपी में बहुरंगी है। वह वाराणसी में राम को याद करते हैं, खुद को शिवभक्त बताते हैं। शिव मंदिर में तस्वीर न लेने की बात बार-बार दोहराते हैं। राम मंदिर के उद्घाटन के बहाने भाजपा को घेरते हैं और राष्ट्रपति को नहीं बुलाने के बहाने दलितों के प्रति भेदभाव का मुद्दा उठाते हैं। प्रयागराज में किसानों के बकाया, कर्जमाफी का जिक्र करते हुए भगोड़े उद्योगपतियों की याद दिलाते हैं। सोमवार को प्रतापगढ़ और अमेठी में वह पूरी तरह सामाजिक न्याय की बात करने लगते हैं। समर्थन में जुटी भीड़ को भरोसा दिलाते हैं कि पिछड़ों और दलितों को उनकी हिस्सेदारी के आधार पर नौकरी से लेकर हर जगह भागीदारी दी जाएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि यह अनायास नहीं है। राहुल सोची समझी रणनीति के तहत भीड़ का मिजाज देकर अपनी बात रख रहे हैं। धर्म, अर्थ और सामाजिक न्याय के कॉकटेल के जरिये सियासी पकड़ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
विज्ञापन
वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश सिंह कहते हैं कि राहुल सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना के जरिये नए सिरे से मंडल बनाम कमंडल की लड़ाई को धार देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके तरकश में अब सिर्फ सामाजिक न्याय का तीर ही बचा है। अमेठी और रायबरेली की सियासत पर निरंतर नजरें रखने वाले पत्रकार राज खन्ना का मानना है कि राहुल मतदाताओं के मिजाज को समझ रहे हैं। पिछले 40 साल में गांधी परिवार ने अमेठी और रायबरेली के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन यहां के मतदाताओं से संवाद कायम करने में चूक गए। अब राहुल सामाजिक न्याय के बहाने पिछड़ों एवं दलितों को खुद की ओर आकर्षित करने की कोशिश में जुटे हैं।
विज्ञापन