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चुनाव से पहले अमेठी में फेल हुए राहुल!

Mon, 03 Feb 2014 11:24 AM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 03 Feb 2014 11:24 AM IST
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rahul gandhi failed to deliver in amethi: survey

‘अमेठी, देश की राजनीति में वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र है। यहां से खुद कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी सांसद हैं। इसके बाद भी इस वीवीआईपी इलाके में विकास कोसों दूर है। गौरा तिलोई जैसे गांवों की लड़कियां आज भी पढ़ने नहीं जा पाती हैं, क्योंकि स्कूल गांव से दो किमी से ज्यादा दूर है।’

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यह तस्वीर पेश की है आईआईटी-आईआईएम ग्रेजुएट्स ने। लोक संग्रह अभियान के तहत देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों ने आमजन की जरूरतों को केंद्र में रखकर 400 गांवों में यहां सर्वे किया।

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एक साल तक की गई पड़ताल

rahul gandhi failed to deliver in amethi: survey

लोक संग्रह मंच के तहत पूरे देश में जनता से जुड़े मुद्दों की हकीकत की करीब एक साल से पड़ताल कर रहे युवाओं ने शनिवार को खबरनवीसों से बातचीत में अमेठी के विकास की तस्वीर पेश की।

टीम की अगुवाई कर रहे विनोद यादव ने बताया कि इसी के तहत अमेठी और रायबरेली में भी हमने सर्वे किया। सितंबर 2013 से अमेठी में शुरू हुए सर्वे में हम करीब 400 गांवों तक पहुंचे। ज्यादातर गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति खराब मिली।

गरीबों का नहीं कोई सुनने वाला

rahul gandhi failed to deliver in amethi: survey

कई गांव ऐसे थे जहां 15 किमी तक कोई अस्पताल नहीं है। आर्थिक रूप से पिछड़े इन लोगों की कोई सुनने वाला भी नहीं। कुछ ने तो कहा कि हमसे तो कोई वोट भी मांगने नहीं आया। वोट देना था, इसलिए दे दिया।

सिस्टम पर अटैक करते हुए आईआईटी रुड़की से ग्रेजुएट और आईआईएम बंगलूरू से पासआउट गौरव कुमार का कहना है कि यह उस संसदीय क्षेत्र की हालत है जहां का प्रतिनिधित्व खुद कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी करते हैं। इसके बाद भी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं।

वह सवाल उठाते हैं, बाकी संसदीय क्षेत्र की हालत क्या होगी? बकौल गौरव, ग्रेजुएशन के बाद बेरोजगार युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है।

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चंद लोगों तक सीमित डेमोक्रेसी

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युवाओं का कहना है कि भले ही संविधान में डेमोक्रेसी सभी के लिए होने का दावा किया गया हो। लेकिन हकीकत में यह चंद लोगों तक ही सीमित हो गई है।

कुमार विश्वास ने भी राहुल गांधी पर इस तरह के तमाम सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के विश्वास की बात भले ही राजनीतिक लगती रही हो, लेकिन इस सर्वे से भी साबित हो गया है कि राहुल गांधी के होने के बावजूद आज भी अमेठी हाशिए पर खड़ा एक पिछड़ा सा जिला है।

हालांकि, राहुल गांधी अक्सर अमेठी में विकास योजनाओं का हाल लेने पहुंचते हैं। उन्होंने गौरीगंज, रायबरेली और अमेठी में कई योजनाओं पर मुहर भी लगाई है, लेकिन इससे इन योजनाओं की असलियत पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। इन सबके बीच कोई कठघर में है, तो वह खुद राहुल गांधी हैं।

लोक संग्रह से बनेगा घोषणा पत्र

rahul gandhi failed to deliver in amethi: survey

लोक संग्रह अभियान के तहत युवाओं की टीम राजस्थान, बिहार के बाद अब यूपी में सर्वे कर रही है। अमेठी, रायबरेली, गाजियाबाद, मेरठ में यह अभियान शुरू किया गया है।

विनोद यादव का कहना है कि वे सर्वे में जो जन समस्याएं सामने आ रही हैं उन्हें संबंधित क्षेत्र के घोषणा पत्र में शामिल कर राजनीतिक दलों के सामने रखा जाएगा। राजनीतिक दलों को लोकतंत्र के मुताबिक नीति और नेतृत्व निर्धारण तय करना ही होगा।

लोक संग्रह अभियान के तहत युवाओं की टीम राजस्थान, बिहार के बाद अब यूपी में सर्वे कर रही है। अमेठी, रायबरेली, गाजियाबाद, मेरठ में यह अभियान शुरू किया गया है।

ये हैं छात्र, जिन्होंने खोली है पोल

rahul gandhi failed to deliver in amethi: survey

इरफान आलम (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, आईआईएम अहमदाबाद), घनश्याम तिवारी (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, इकोनॉमिस्ट), विनोद यादव (यूएसए से एमबीए, एनर्जी सेक्टर में इंजीनियर), शेफाली मिश्रा (यूनाइटेड नेशंस फैलोशिप, डीयू स्टूडेंट), समीना बानो (आईआईएम बंगलूरू), मेजर नाहुश मोहंती (आर्मी अफसर), आलोक सोमवंशी (एनर्जी स्पेशलिस्ट), शांतनु गुप्ता (एक्सएलआरआई), अरुण गौरव (आईआईटी कानपुर, आईआईएम लखनऊ), अमर सिंह (यूएनडीपी ट्रेनर), गौरव कुमार (आईआईटी रुड़की, आईआईएम बंगलूरू)।

यहां सबसे अहम बात यह है कि परेशानियों से घिरी कांग्रेस का इस सर्वे पर क्या जवाब होता है। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से इस सर्वे पर कोई आधिकारिक बयान अब तक नहीं आया है।

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