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रायबरेली : प्रियंका के सामने महिलाओं और छात्राओं ने रखी अपनी पीड़ा

Sun, 19 Dec 2021 07:57 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 19 Dec 2021 07:57 PM IST
सार

इस दौरान सभी ने मौजूद महिलाओं और छात्राओं में जोश भरा और आह्वान किया कि अब हम किसी से कम नहीं।

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Rae Bareli: Women and girls put their pain in front of Priyanka
प्रियंका गांधी, कांग्रेस महासचिव - फोटो : ANI

विस्तार

रिफार्म क्लब में आयोजित शक्ति संवाद कार्यक्रम में महिलाओं और छात्राओं ने प्रियंका गांधी के सामने अपनी पीड़ा रखी और बताया कि उन्हें घरों में आज भी किस तरह उनके साथ भेदभाव किया जाता है। इस दौरान सभी ने मौजूद महिलाओं और छात्राओं में जोश भरा और आह्वान किया कि अब हम किसी से कम नहीं। बस जरूरत है कि हिम्मत से अपनी लड़ाई लड़ें। कहा कि लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान से उत्साहित हूं। इससे निश्चित तौर से बेटियां जागरूक होंगी।

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पॉलीटेक्निक की छात्रा रुचि सिंह ने कहा कि घरों पर बच्चियों को आगे बढने के लिए रोका जाता है। उन्हें भी स्कूल नहीं भेजा जाता था। उनकी मां ने उन्हें आगे बढ़ाया और स्कूल भेजा। आज जिस भी मुकाम पर हूं, वह उनकी मां की देन है। मैं अपनी मां का तहे दिल से सलाम करती हूं। खीरों ब्लॉक क्षेत्र के खंडेपुर गांव की रहने वाली अंजली रावत ने कहा है कि बेटियों को पढने लिखने से ना रोका जाए। उन्हें भी कठिनाइयां झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ती रही। बेटियां अब किसी से कम नहीं। बस उनका हौसलाआफजाई किया जाना चाहिए।
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नूर ने कहा कि वह मदर टेरेसा स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। बेटियों को घरों में चूल्हा बर्तन सिखाने की बात कही जाती है। उनसे भी यही करने के लिए कहा गया था, लेकिन उनकी मां ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। उनकी मां ने उन्हें पढ़ाया और आज वह शिक्षिका एक तौर पर बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। मेरी अभिभावकों से गुजारिश है कि बेटियों को घर तक सीमित न रखा जाए। उन्हें स्कूूल भेजा जाए। बेटों की तरह उन्हें सुविधाएं दी जाएं। नेहा सिंह कहती हैं कि गांवों में बेटियों के साथ भेदभाव किया जाता है।
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बेटियां देर से घर जाती हैं तो लोग उनके माता-पिता से शिकायत करते हैं कि आपकी बेटी आवारा हो गई है। बेेटियों के बारे में इस तरह कहना गलत है। बेटियों को आगे बढने दिया जाए। उन्हें खूब शिक्षित किया जाए। आशा बहू संगठन की जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा कि उन्हें भी शुरुआती दौर में कठिनाइयां झेलनी पड़ी। सरकार हमारी उपेक्षा कर रही है। अब हम हक के लिए एकजुट हुए हैं। बेटियों को अच्छी शिक्षा दी जाए। उनका अच्छे स्कूल में दाखिल कराया जाए। बेटियां अब किसी काम नहीं हैं। बस उनका हौसलाआफजाई करने की जरूूरत है। सावित्री पासी, उम्मे हबीबिया भी कहती हैं कि बेटियों के साथ भेदभाव न किया जाए।

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