प्रमोशन में आरक्षण बिल पास करने के लिए केंद्र सरकार को कर देंगे मजबूर, 28 को आर-पार की लड़ाई
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आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने कहा है कि प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक मोदी सरकार को पदोन्नति में आरक्षण बिल पास करने के लिए मजबूर करेंगे। सभी आरक्षण समर्थक करो या मरो की तर्ज पर हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। समिति ने सोमवार को पूना पैक्ट दिवस पर उद्यान भवन सभागार में आयोजित एक बैठक में बाबा साहब को याद किया।
कहा गया कि पूना पैक्ट बाबा साहब ने मजबूरी में किया था। अब उनके अनुयायी बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलकर संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमें पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना है ताकि मोदी सरकार मजबूर होकर पदोन्नति में आरक्षण पर 117वां लम्बित बिल पास कराए।
समिति के सदस्यों ने कहा, यह दुर्भाग्य की बात है कि एससी-एसटी एक्ट पुन: पारित होने के बाद भी आरक्षण विरोधी उसका विरोध कर रहे हैं। इससे सिद्ध होता है कि कोई भी दलितों को अधिकार देना नहीं चाहता। ऐसे में आरक्षण समर्थक कार्मिकों को करो या मरो की तर्ज पर हर कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना है। 28 सितंबर की सुबह आरक्षण समर्थक लखनऊ की धरती पर इतिहास रचने के लिए कमर कस चुके हैं। बैठक में समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, डॉ. राम शब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार आदि ने कहा, दलित व पिछड़े समाज को एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आना होगा।
दलितों को अधिकार दिलाने में पूना पैक्ट का अहम रोल
दलितों और पिछड़ों को लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने में पूना पैक्ट का रोल बेहद अहम रहा है। पूर्व न्यायाधीश जस्टिस खेमकरन ने सोमवार को अंबेडकर महासभा में हुए कार्यक्रम में ये विचार व्यक्त किए।
पूना पैक्ट दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो.राम नरेश चौधरी ने कहा, 1928 में जब भारत में संवैधानिक सुधार के मकसद से साइमन कमीशन आया तो उस समय देश के दलित व पिछड़ों के अत्याचार, उत्पीड़न एवं अन्याय की तरफ उसका ध्यान आकर्षित किया गया।
अंग्रेजों ने बाबा साहब द्वारा पेश किए तथ्यों को सही मानते हुए दलितों को पृथक निर्वाचन प्रणाली यानी दोहरे मत की घोषणा की। इस मौके पर डॉ. लालजी प्रसाद, बीना मौर्या उपस्थित रहे।