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यहां घूसखोरी करने पर मिलता है प्रमोशन!

Mon, 18 Aug 2014 03:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 18 Aug 2014 03:24 AM IST
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promotion after bribery.

वर्ष 2004 में जेई से प्रमोशन पाने के बाद एई बनते ही एसडीओ अपट्रान के रूप में श्रीकृष्ण की तैनाती हुई। श्रीकृष्ण कॉमर्शियल कनेक्शन देने के नाम उपभोक्ता से 5000 रुपये की घूस लेते हुए पकड़े गए।

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भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने श्रीकृष्ण के खिलाफ आलमबाग थाने में मुकदमा दर्ज कराया। काफी समय तक श्रीकृष्ण जेल में रहे और बाद में जमानत पर रिहा हुए। पॉवर कॉर्पोरेशन काफी समय तक जांच चलती रही और इसी बीच श्रीकृष्ण रिटायर हो गए।
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इसी तरह वर्ष 2006 में पॉवर कॉर्पोरेशन की लेसा पुलिस प्रवर्तन टीम ने बिल्डर रफ्त अहमद के हरदोई रोड स्थित परिसर पर छापा मारा। बिल्डर को बिजली चोरी में फंसाए जाने की धमकी देकर लेन-देन की बातचीत शुरू हुई।
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इसी बीच बिल्डर ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन टीम को बुलाकर 30 हजार रुपये की घूस के साथ दो इंजीनियरों को पकड़ा दिया। प्रवर्तन दल इंस्पेक्टर एवं एई भाग गया। जो एई जेल में रहा वह लेसा में विश्वविद्यालय उपखंड का एसडीओ है।

नौ महीने में घूसखोरी की दूसरी घटना

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कनेक्शन के नाम पर घूस लेते जेई को रंगेहाथ पकड़े जाने जैसी घटनाएं लेसा के लिए कोई नई बात नहीं है। बृहस्पतिवार को डालीगंज के इक्का स्टैंड उपकेंद्र से भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जब जेई को पकड़ा था तो यह लेसा में नौ महीने के भीतर घूसखोरी की दूसरी घटना थी।

वैसे भी पुराने केस बताते हैं कि लेसा में कैसे रिश्वतखोर इंजीनियर और कर्मचारी कार्रवाई की मार से तो दूर कमाऊ कुर्सियों पर जमे हैं। एक दशक में ऐसे ही छह इंजीनियर और कर्मचारी लेसा की साख को बट्टा लगा चुके हैं।

वहीं, मध्यांचल निगम का दावा कि ऐसे घूसखोरों की तैनाती सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर गठित दो सीनियर आईएएस की समिति के अनुमोदन से की गई है।

हालांकि समिति को पोस्टिंग का जो प्रस्ताव भेजा था उसमें घूसखोरी का उल्लेख था या नहीं, इस मामले में लेसा के अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।

ये कहता है भ्रष्टाचार निवारण संगठन

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वैसे भ्रष्टाचार निवारण संगठन की मानें तो भ्रष्टाचार के प्रकरण की जब तक जांच चलती है तब तक अधिकारी-कर्मचारी की संवेदनशील पद पर तैनाती नहीं हो सकती है।

घूसखोरी का शिकार हुए एई (असिस्टेंट इंजीनियर) आरएस यादव जमानत पर छूटे तो मध्यांचल निगम के पूर्व एमडी बीवी सिंह ने उनका तबादला सीतापुर में टेस्ट इकाई में कर दिया।

प्रदेश में सपा की सरकार आई तो तो आरएस यादव की पोस्टिंग के लिए निगम के पूर्व एमडी आईएएस नीतीश्वर कुमार पर कई मंत्रियों का दबाव पड़ा।

नीतीश्वर कुमार ने लेसा में पोस्टिंग करने से इन्कार कर दिया। सितंबर 2012 में नीतीश्वर शिक्षण अवकाश पर गए और एमडी की कमान एपी मिश्रा ने संभाली।

आरोपों के बाद भी तैनाती

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मिश्रा ने आरएस यादव का सीतापुर से तबादला कर उन्हें लेसा मे एसडीओ लखनऊ विश्वविद्यालय पद पर तैनात कर दिया। आरएस यादव के साथ ही घूसखोरी में फंसे एई अब प्रमोशन पाकर एक्सईएन हो चुके।

इस एक्सईएन की भी इसी माह कमाई वाले खंड में तैनाती कर दी गई। मध्यांचल निगम ने इन इंजीनियरों की तैनाती के लिए सीनियर आईएएस की समिति को पोस्टिंग का जो प्रस्ताव भेजा था उसमें घूसखोरी का उल्लेख किया गया था या नहीं, यह जांच का विषय है।

इस सवाल पर निगम के एक अफसर का दावा कि घूसखोरी के इस प्रकरण को सरकार ने वापस ले लिया, जबकि एसडीओ आरएस यादव ने इससे इन्कार किया।

लिपिक राम प्रकाश ऊपरी संरक्षण के चलते भ्रष्टाचार करते हुए घूसखोरी मे पकड़ा गया तो उसको निलंबित करके लेसा में ही अटैच कर दिया गया।

कमाऊ कुर्सी के लिए तीन तबादले

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लेसा में एक घूसखोर ऐसा है, जिसके तब तक तीन तबादले हुए जब तक उसको कमाऊ कुर्सी नहीं मिल गई।

एक्सईएन स्तर के इस इंजीनियर का लेसा में सबसे अधिक कार्यकाल है। इससे पूर्व कानपुर में घूसखोरी पकड़ा गया था।

इस इंजीनियर का पूर्व एमडी नीतीश्वर कुमार एवं एक एपी मिश्र ने तबादला किया। कमाऊ कुसी तीसरे तबादले में हासिल हुई।

इसकी साठगांठ का आलम यह कि निगम में अटैच होने के दौरान कैंट जैसे महत्वपूर्ण उपखंड की एसडीओ की कुर्सी पर विराजमान रह चुका। इस घूसखोर ने उद्यमी से घूस लेकर सरकारी खर्चे पर बिजनेस प्लान में फैक्ट्री के ऊपर हाईटेंशन लाइन हटा दी।

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