{"_id":"603ff2368ebc3ee97b52a090","slug":"project-of-300-crore-is-seeming-to-fail-lko-city-news-lko5677839136","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम के 300 करोड़ के प्रोजेक्ट पर रास्ते का अड़ंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम के 300 करोड़ के प्रोजेक्ट पर रास्ते का अड़ंगा
विज्ञापन
नगर निगम के प्रोजेक्ट में रास्ते का विवाद।
- फोटो : ??? ?????
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली रोड स्थित नगर निगम की पहली मल्टीस्टोरी आवासीय योजना का प्रोजेक्ट रास्ते के विवाद में फेल होता दिख रहा है।
इसी योजना के नाम पर निगम ने म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर 195 करोड़ रुपये जुुुुुटाए हैं। हालांकि, तीन साल से अधूरी योजना का भविष्य अंधेरे में है, क्योंकि इस तक आने-जाने वाले रास्ते का विवाद कचहरी के चक्कर में और उलझ गया है।
अब यह कब निपटेगा, इसे लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में नगर निगम के लिए जुटाई रकम लौटाना मुश्किल हो जाएगा।
नगर निगम ने 2016 में औरंगाबाद खालसा नाम से मल्टीस्टोरी योजना लॉन्च की। इसमें अलग-अलग श्रेणी के 684 फ्लैट बनाए जाने थे।
योजना पर शुरू हुआ काम एक साल बाद रास्ते के विवाद और बजट के चलते अटक गया। करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यह आगे नहीं बढ़ा।
ऐसे में 2017 में खोला गया पंजीकरण फंस गया और निगम को इसकी प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। फिर बजट की कमी दूर करने के लिए म्यूनिसपल बॉन्ड लॉन्च किए गए।
तीन साल की तैयारी बाद बीते साल दीपावली पर बॉन्ड जारी कर निवेशकों से 195 करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि, अब तक न तो काम शुरू हो पाया और न ही रास्ते का विवाद हल हो सका।
इस कारण फंस गई योजना
रायबरेली रोड पर ओमेक्स सिटी है। इसके बीचों-बीच निगम की भी जमीन थी। इसके बदले ओमेक्स सिटी के पास 50 हजार वर्गमीटर जमीन दी गई। इस तक पहुंचने के लिए 18 मीटर का रास्ता भी बताया गया। जब निगम ने जमीन पर काम शुरू किया तो विवाद शुरू हो गया। रास्ते को योजना तक खोलने को सुरक्षा का हवाला देते हुए ओमेक्स वालों ने रोक दिया। साथ ही योजना के गेट के सामने दीवार खड़ी कर दी। इसे हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता गया। एफआईआर और कानूूनी लड़ाई शुरू होने के बाद अब तक मामला विवाद में है। ऐसे में योजना तक जाने के लिए अभी कोई रास्ता ही नहीं है।
विज्ञापन
योजना से प्रमुख स्थानों की दूरी
एयरपोर्ट - 4.5 किमी
चारबाग स्टेशन- 8 किमी
पीजीआई- 2.5 किमी
एक किमी के दायरे में चार सीबीएसई-आईसीएसई स्कूल
डेढ़ किमी में बीबीएयू केंद्रीय विवि, चिकित्सा महाविद्यालय व पीजी कॉलेज
योजना पर एक नजर
5.7 एकड़ है योजना का क्षेत्रफल
800 गाड़ियों की भूमिगत पार्किंग
कम्यूनिटी सेंटर व शॉपिंग सेंटर
15 मीटर की मुख्य, व आंतरिक रोड नौ व छह मीटर की
कुछ लोग स्वार्थ के लिए कर रहे विवाद
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए रास्ते का विवाद कर रहे हैं। इसका असर मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है। विवाद दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कानूूनी तौर पर रास्ता है। इसके बाद भी इसे बंद करने के लिए अड़ंगा डाला जा रहा है, जिसे दूर करने के प्रयास जारी हैं।
विज्ञापन
इसी योजना के नाम पर निगम ने म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर 195 करोड़ रुपये जुुुुुटाए हैं। हालांकि, तीन साल से अधूरी योजना का भविष्य अंधेरे में है, क्योंकि इस तक आने-जाने वाले रास्ते का विवाद कचहरी के चक्कर में और उलझ गया है।
अब यह कब निपटेगा, इसे लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में नगर निगम के लिए जुटाई रकम लौटाना मुश्किल हो जाएगा।
नगर निगम ने 2016 में औरंगाबाद खालसा नाम से मल्टीस्टोरी योजना लॉन्च की। इसमें अलग-अलग श्रेणी के 684 फ्लैट बनाए जाने थे।
योजना पर शुरू हुआ काम एक साल बाद रास्ते के विवाद और बजट के चलते अटक गया। करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यह आगे नहीं बढ़ा।
ऐसे में 2017 में खोला गया पंजीकरण फंस गया और निगम को इसकी प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। फिर बजट की कमी दूर करने के लिए म्यूनिसपल बॉन्ड लॉन्च किए गए।
तीन साल की तैयारी बाद बीते साल दीपावली पर बॉन्ड जारी कर निवेशकों से 195 करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि, अब तक न तो काम शुरू हो पाया और न ही रास्ते का विवाद हल हो सका।
विज्ञापन
इस कारण फंस गई योजना
रायबरेली रोड पर ओमेक्स सिटी है। इसके बीचों-बीच निगम की भी जमीन थी। इसके बदले ओमेक्स सिटी के पास 50 हजार वर्गमीटर जमीन दी गई। इस तक पहुंचने के लिए 18 मीटर का रास्ता भी बताया गया। जब निगम ने जमीन पर काम शुरू किया तो विवाद शुरू हो गया। रास्ते को योजना तक खोलने को सुरक्षा का हवाला देते हुए ओमेक्स वालों ने रोक दिया। साथ ही योजना के गेट के सामने दीवार खड़ी कर दी। इसे हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता गया। एफआईआर और कानूूनी लड़ाई शुरू होने के बाद अब तक मामला विवाद में है। ऐसे में योजना तक जाने के लिए अभी कोई रास्ता ही नहीं है।
विज्ञापन
योजना से प्रमुख स्थानों की दूरी
एयरपोर्ट - 4.5 किमी
चारबाग स्टेशन- 8 किमी
पीजीआई- 2.5 किमी
एक किमी के दायरे में चार सीबीएसई-आईसीएसई स्कूल
डेढ़ किमी में बीबीएयू केंद्रीय विवि, चिकित्सा महाविद्यालय व पीजी कॉलेज
योजना पर एक नजर
5.7 एकड़ है योजना का क्षेत्रफल
800 गाड़ियों की भूमिगत पार्किंग
कम्यूनिटी सेंटर व शॉपिंग सेंटर
15 मीटर की मुख्य, व आंतरिक रोड नौ व छह मीटर की
कुछ लोग स्वार्थ के लिए कर रहे विवाद
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए रास्ते का विवाद कर रहे हैं। इसका असर मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है। विवाद दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कानूूनी तौर पर रास्ता है। इसके बाद भी इसे बंद करने के लिए अड़ंगा डाला जा रहा है, जिसे दूर करने के प्रयास जारी हैं।