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'केवल सच कह देने से ही कविता नहीं बनती'
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 02 Sep 2013 08:42 AM IST
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केवल सच कह देने से कविता नही बनती। सत्य वो है जो दिखता है, यथार्य वह है
जो छिपा है, लेकिन सच उसमें भी है।
जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंदी विभाग के अध्यक्ष व वरिष्ठ कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह ने रविवार को गोमती नगर स्थित एक फूड सेंटर में ये बात कही।
वह प्रगतिशील लेखक संघ लखनऊ की जिला इकाई की ओर से ‘हिन्दी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य में युवा पीढ़ी का भविष्य’ विषय पर हुई मासिक गोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी के लेखकों में नई सोच एवं नवीनता है। हमारे समय में पत्रिकाएं कम थीं, जो थीं वे नए लोगों को घास नही डालती थीं।
गोष्ठी में कहानीकार नवनीत मिश्र ने अब्दुल बिस्मिल्लाह की कविता ‘लड़कियां बारात देखती हैं’ का पाठ किया। गोष्ठी में चंद्रेश्वर, दयानंद पांडेय, इंदु, सुमन श्रीवास्तव, प्रज्ञा पांडेय, सुभाष कुशवाहा, नसीम साकेती, देवेन्द्र, वंदना मिश्र, केके वत्स समेत तमाम साहित्यकारों ने चर्चा को गति दी।
जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंदी विभाग के अध्यक्ष व वरिष्ठ कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह ने रविवार को गोमती नगर स्थित एक फूड सेंटर में ये बात कही।
वह प्रगतिशील लेखक संघ लखनऊ की जिला इकाई की ओर से ‘हिन्दी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य में युवा पीढ़ी का भविष्य’ विषय पर हुई मासिक गोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी के लेखकों में नई सोच एवं नवीनता है। हमारे समय में पत्रिकाएं कम थीं, जो थीं वे नए लोगों को घास नही डालती थीं।
गोष्ठी में कहानीकार नवनीत मिश्र ने अब्दुल बिस्मिल्लाह की कविता ‘लड़कियां बारात देखती हैं’ का पाठ किया। गोष्ठी में चंद्रेश्वर, दयानंद पांडेय, इंदु, सुमन श्रीवास्तव, प्रज्ञा पांडेय, सुभाष कुशवाहा, नसीम साकेती, देवेन्द्र, वंदना मिश्र, केके वत्स समेत तमाम साहित्यकारों ने चर्चा को गति दी।