सोनिया के गढ़ के लिए प्रियंका ने झोंकी पूरी ताकत
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माली परिवार से ताल्लकु रखने वाले 90 साल की फूलदुलारी फूले नहीं समा रहीं। खुश भी क्यों न हों, प्रियंका गांधी ने बुधवार को उनसे बेहद आत्मीयता जो दिखाई।
हैवतपुर खुर्द स्थित उनकी झोपड़ी में तख्त पर बैठकर गांव की महिलाओं की समस्याएं सुनीं। दरअसल, रायबरेली के गढ़ को सलामत रखने के लिए प्रियंका ने तपती दुपहरी में दो दर्जन गांवों के दौरे की शुरुआत हैवतपुर में फुलदुलारी के घर से ही की।
सोनिया गांधी के दौरे से ठीक एक दिन पहले प्रियंका ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र के तूफानी जनसंपर्क में चिर-परिचित अंदाज में लोगों से सीधा संवाद किया और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति इरानी पर सधा हुआ वार भी किया।
रायबरेली को गांधी, नेहरू परिवार का मजबूत किला माना जाता है। अपवाद को छोड़ दें तो आजादी के बाद से इस सीट पर गांधी, नेहरू परिवार का कोई सदस्य या उनका कृपा पात्र जीत हासिल करता रहा है। अब भाजपा उनकी घेराबंदी कर रही है।
रायबरेली के प्रति संदेश देना भी एक मकसद
अमेठी में राहुल गांधी के घेरने के बाद निशाने पर रायबरेली है। इसी को भांपते हुए गांधी परिवार अपने गढ़ को बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।
सोनिया गांधी बृहस्पतिवार को अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आ रही हैं। उनके यहां कई कार्यक्रम हैं। जैसा कि पहले होता रहा है, मां सोनिया के आने से एक दिन पहले बेटी प्रियंका ने उन दो विधानसभा क्षेत्रों सरेनी और ऊंचाहार के गांवों का सघन दौरा किया जहां उनकी पार्टी के विधायक नहीं हैं।
उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी। उन्हें हल कराने का आश्वासन भी दिया। वह अपना फीडबैक सोनिया को देंगी। माना जा रहा है कि उनका यह दौरा राजनीतिक तौर पर कमजोर क्षेत्रों को मजबूती बनाने की मंशा के साथ ही यह संदेश देने के लिए भी है कि सत्ता रहे, ना रहे, रायबरेली के प्रति उनका अनुराग कम नहीं हुआ है। क्षेत्र की समस्याएं उनकी आंखों से ओझिल नहीं हैं।
पुराना अंदाज, टारगेट पर महिलाएं
अंदाज पुराना लेकिन कारगर है। शायद इसीलिए प्रियंका ने बिना शोर-शराबे के कई गांवों में जाकर लोगों, खासतौर पर महिलाओं से सीधा संपर्क किया। अन्य लोगों के साथ ही दलित, अति पिछड़ों के घरों में जाकर समस्याएं सुनने को तरजीह दी।
वजह साफ है, आने वाले समय में इन जातियों के वोटों में सेंधमारी रोकने की आशंका है। हैवतपुर खुर्द गांव में उन्होंने सबसे ज्यादा वक्त लगाया। वह गांव में छह लोगों के घरों में गई। खुद महिलाओं, बच्चों का हाथ पकड़कर कहा, अपने घर लेकर चलों, वहीं समस्याएं सुनेंगे। किसी महिला के बच्चों का का नाम पूछा तो किसी का हाथ पकड़कर चलीं।
पैरों से लाचार बुजुर्ग फूलदुलारी को न केवल उन्होंने खड़ा किया, उन्हें गले लगाया, उनके गाल थपथपाएं और आशीर्वाद भी लिया। इस गांव में वह राजकुमार माली, शिवशंकर उर्फ शुद्धु दर्जी, भुंदल पासी, विशंभर सोनी और संतोष सोनी के घर भी गईं।
चिंताखेड़ा में स्वतंत्रता सेनानी स्व.गोकरन प्रसाद तिवारी की पुत्रवधुओं रामा देवी व आशा देवी और अन्य महिलाओं से मिलकर सीधे दलित बस्ती में चली गईं और वहां काफी देर तक रहीं। सामाजिक समीकरणों के जरिये राजनीति तो साधने के लिए कमोबेश दूसरे गांवों में भी उन्होंने इसी तरह से घरों पर जाकर लोगों से बातचीत की।
पहली बार गई कई गांवों में
रायबरेली में सियासी वजूद को कोई चुनौती न मिले इसलिए प्रियंका ने अपने जनसंपर्क के लिए उन गांवों चुना जहां पहले उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।
उन्होंने कहा- ‘मैं वहां जा रही हूं, जहां कम काम हुआ है। मैं सोनिया जी को फीडबैक दूंगी, इन क्षेत्रों के विकास का प्रयास करेंगे’।
उनके दौरे की शुरुआत उन्नाव-रायबरेली सीमा पर सरेनी हल्के के चन्द्रमणि खेड़ा से हुई है। वह गांव के बाहर बने गेट पर दो मिनट रुकीं और हैवतपुर के लिए बढ़ गईं। चन्द्रमणि खेड़ा के बुजुर्ग देवनारायण शुक्ल और चन्द्र प्रकाश पांडेय बताते हैं कि सोनियां गांधी तो गांव में पहले आई हैं लेकिन प्रियंका नहीं आई थी।
हैवतपुर के राजकुमार चौहान और चिंताखेड़ा के रामेश्वर दयाल मिश्र भी कहते हैं कि प्रियंका के रोड शो तो पहले हुए है लेकिन इस तरह घरों में जाकर महिलाओं व अन्य लोगों से समस्याएं उन्होंने पहली बार सुनी हैं।
ये भी है प्रियंका की सक्रियता का बड़ा कारण
पड़ोस के अमेठी लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की सक्रियता ने गांधी परिवार की चिंता बढ़ाई है। पिछले दिनों स्मृति के दौरे के बाद राहुल गांधी तीन दिन के दौरे पर अमेठी पहुंचे थे।
रायबरेली में किसी तरह की चुनौती न मिले और अमेठी का गणित भी सध जाए इसके लिए प्रियंका का दौरा कराया गया है। क्षेत्र के लोग मानते हैं कि जिस तरह की हाजिर जवाबी और तीखा हमला स्मृति के दौरे में देखने को मिलता है, उसका काउंटर प्रियंका ही कर सकती है।
इंदिरा गांधी की पौत्री और सोनिया की बेटी होने के साथ ही उनके पब्लिक कनेक्ट और सटीक जवाबों को कांग्रेस समर्थक काफी पसंद करते हैं।
सोनिया के दौरे से पहले होमवर्क
प्रियंका गांधी ने दर्जनों गांवों का दौरा करके सोनिया गांधी के आने से पहले क्षेत्र के मिजाज को पढ़ लिया है। अधिकांश जगह वे महिलाओं से घरों में अकेले मिली हैं। मीडिया को इन मुलाकातों से दूर रखा गया। शायद सही फीडबैक लेने के लिए ऐसा किया गया।
क्षेत्र के लोगों से प्रियंका की मुलाकात में स्थानीय कांग्रेसी भी नहीं रहे। ऐसे में समस्याओं के साथ ही नेताओ के गिले-शिकवे करने में किसी को असहज नहीं लगा।