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निजी स्कूलों ने फीस न बढ़ाने के आदेश को दी चुनौती, दाखिल की याचिका
Wed, 20 May 2020 12:32 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 20 May 2020 12:32 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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निजी स्कूलों ने प्रदेश सरकार के फीस न बढ़ाने के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की है। इसमें उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 को असांविधानिक घोषित करने की मांग भी की गई है। कोर्ट ने महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब तलब किया है।
इस मामले में अदालत ने अभी कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है।
याचिका में माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के 27 अप्रैल व अपर मुख्य सचिव के एक मई 2020 के आदेशों को चुनौती देते हुए दलील दी है कि इन आदेशों के जरिए गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में इस वर्ष फीस वृद्धि पर रोक लगा दी गई है।
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इस मामले में अदालत ने अभी कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है।
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याचिका में माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के 27 अप्रैल व अपर मुख्य सचिव के एक मई 2020 के आदेशों को चुनौती देते हुए दलील दी है कि इन आदेशों के जरिए गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में इस वर्ष फीस वृद्धि पर रोक लगा दी गई है।
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फीस वृद्धि की जा सकती है इस एक्ट के तहत
याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उत्तर प्रदेश सेल्फ फिनान्स इंडिपेंडेंट स्कूल्स (फी रेगुलेशन) एक्ट 2018 का हवाला देते हुए दलील दी कि इस एक्ट के तहत फीस वृद्धि की जा सकती है।
अगर फीस वृद्धि से कोई शिकायत होती है तो अभिभावक फी रेग्युलेट्री समिति के समक्ष जा सकते हैं। याचिका में यूपी आपदा प्रबंधन अधिनियम को केंद्रीय अधिनियम का अतिक्रमण करने वाला बताते हुए, इसे भी असांविधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
अगर फीस वृद्धि से कोई शिकायत होती है तो अभिभावक फी रेग्युलेट्री समिति के समक्ष जा सकते हैं। याचिका में यूपी आपदा प्रबंधन अधिनियम को केंद्रीय अधिनियम का अतिक्रमण करने वाला बताते हुए, इसे भी असांविधानिक घोषित करने की मांग की गई है।