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निगम की करोड़ों की जमीन निजी योजनाओं में फंसी

Thu, 18 Mar 2021 01:52 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 01:52 AM IST
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Private builder occupy land of nagar nigam
नगर निगम की जमीनों पर कब्जा। - फोटो : ??? ?????
जानकीपुरम में सहारा स्टेट कॉलोनी के अंदर निगम की करीब दस बीघा जमीन सालों से फंसी है। इसकी कीमत इस वक्त एक अरब रुपये से अधिक है। फिर भी निगम प्रशासन चुप्पी साधे है।
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कानपुर रोड पर पिकेडली होटल के पीछे रोहतास बिल्डर की मल्टीस्टोरी योजना के बीच निगम की करीब तीन बीघा जमीन फंसी है। इसकी कीमत भी बीस करोड़ रुपये से अधिक है।
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नगर निगम की लापरवाही से उसकी करोड़ों रुपये की जमीन निजी योजनाओं और कॉलोनियों में फंसी हुई है। वहीं, छोटे कब्जे हटाकर संपत्ति विभाग अपनी गड़बड़ियों पर पर्दा डालने में जुटा हुआ है।
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निगम की जमीनों की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी संपत्ति विभाग की है। इसमें प्रतिनियुक्ति पर दो तहसीलदार तैनात हैं। इसके अलावा 12 से अधिक लेखपाल हैं।
कार्यदायी संस्था के जरिए एक सेवानिवृत्त कानूनगो भी तैनात हैं। फिर भी जमीनों पर कब्जा नहीं लिया जा रहा है।
सदन में पार्षद कई बार संपत्ति विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगाकर हंगामा भी कर चुके हैं।
किस वार्ड में निगम की कितनी जमीन है? उसमें कितने पर कब्जा है, कितनी फंसी हुई है और कितनी मुक्त कराई गई है, इसकी रिपोर्ट निगम कई साल से तैयार कर रहा है।
पर अब तक रिपोर्ट बन नहीं पाई है। जमीनों का रिकॉर्ड डिजिटलाइज्ड करने को लेकर कई साल पहले सदन में प्रस्ताव भी पास हुआ था, पर उस पर भी काम नहीं हुआ। क्योंकि ऐसा होने पर संपत्ति विभाग की पोल खुल सकती है।
सीमा से लगे वार्डों में कब्जे का ज्यादा खेल
जमीनों पर कब्जे का सबसे ज्यादा खेल नगर निगम की सीमा से लगे वार्डों में है। इसमें इलाके के नेता से लेकर संपत्ति विभाग के कुछ जिम्मेदाराें की मिलीभगत रहती है। कब्जा कैसे होगा और कैसे बचेगा, इसका रास्ता भी वही बताते हैं और बाद में कानूनी विवाद बताकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
यहां भी फंसी जमीन
- इंदिरानगर की मानस सिटी कॉलोनी के अंदर निगम की एक बीघा से अधिक जमीन है। इसकी कीमत कई करोड़ रुपये है। यह जमीन भी नगर निगम छोड़े बैठा है जबकि बिल्डर कॉलोनी बसाकर मकान प्लॉट बेच रहा है।

- जानकीपुरम क्षेत्र में ही आने वाली ओरो सिटी कॉलोनी में भी नगर निगम ने बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी जमीन को चकरोड के नाम पर छोड़ दिया है।
तय की जाएगी जिम्मेदारी
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि जो जमीनें फंसी हैं, उनकी पूरी रिपोर्ट संपत्ति विभाग से ली जाएगी। जमीन क्यों वापस नहीं ली जा रही है। इस बारे में भी पता किया जाएगा। इसमें जिसकी लापरवाही सामने आएगी, उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
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