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जूनियर हाईस्कूलों के प्राइमरी भी होंगे एडेड

Mon, 22 Sep 2014 02:25 PM IST
Updated Mon, 22 Sep 2014 02:25 PM IST
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primary schools shall also get aided status.

बेसिक शिक्षा निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में चल रहे प्राइमरी स्कूलों को अनुदान पर लेने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

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इसके दायरे में सूबे के करीब 200 प्राइमरी स्कूल आ सकते हैं। अनुदान सूची में आने के बाद इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के समान वेतनमान मिलने लगेगा।
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एक अनुमान के मुताबिक अनुदान पर आने वाले प्रत्येक प्राइमरी स्कूलों पर सालाना 28 लाख रुपये का खर्च आएगा।

यूपी में 3100 एडेड जूनियर हाईस्कूल

primary schools shall also get aided status.

राज्य सरकार निजी क्षेत्रों में 10 साल तक लगातार चलने वाले वित्तविहीन स्कूलों को अनुदान पर लेती है। इसके बाद इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के समान वेतनमान मिलने लगता है।

प्रदेश में मौजूदा समय करीब 3,100 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 1973 से पहले सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में चलने वाले बालिका प्राथमिक विद्यालयों को अनुदान सूची में शामिल कर लिया था लेकिन बालक प्राइमरी स्कूलों को छोड़ दिया गया।

ऐसे स्कूलों के प्रबंधकों ने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में सालों लड़ाई के बाद फैसला स्कूल प्रबंधकों के पक्ष में आया है।

राज्य सरकार को अब इसके आधार पर 1973 से पहले के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में चल रहे बालक प्राइमरी स्कूलों को अनुदान सूची पर लेना है। सूत्रों का कहना है कि बेसिक शिक्षा निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर बालक प्राइमरी स्कूलों को अनुदान सूची पर लेने के संबंध में परीक्षण शुरू कर दिया है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने भी मांगा ब्यौरा

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माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 10 अक्तूबर 1986 से पूर्व अनुमोदित व माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को अनुदान सूची में शामिल किए जाने के संबंध में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से ऐसे स्कूलों का ब्यौरा मांगा है।

अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा रमेश ने मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, फैजाबाद और चित्रकूट मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों से ऐसे स्कूलों का ब्यौरा मांगा है जो उस समय अनुदान सूची में शामिल होने से रह गए थे।

मंडलों से ब्यौरा मिलने के बाद ऐसे स्कूलों को अनुदान सूची में शामिल करने की कार्यवाही शुरू होगी।

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