20 की उम्र से ही रखिए दिल का खयाल, ऐसे बचे हार्ट अटैक से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
23 साल के रोहित को सीने में तेज दर्द की शिकायत पर घरवाले उसे एसजीपीआई लेकर पहुंचे। यहां के कार्डियोलॉजी व थोरैसिक सर्जरी विभाग में उनके हृदय की सर्जरी की गई, लेकिन वे बच नहीं सके।
रोहित का इलाज करने वाले प्रो. निर्मल गुप्ता बताते हैं कि उनके अब तक के कॅरिअर में रोहित सबसे कम उम्र का हार्ट पेशेंट था। वह कहते हैं कि उनके पास आ रहे हार्ट अटैक के मरीजों में 10 प्रतिशत मरीजों की उम्र 30 वर्ष से भी कम है।
यह हकीकत आपको डराने के लिए नहीं बल्कि सचेत करने के लिए। नोएडा में उधमसिंहनगर के डीएम की सिर्फ 39 साल की उम्र में हार्ट अटैक से मौत की घटना के बाद ‘अमर उजाला’ ने राजधानी के हृदय रोग विशेषज्ञों से बात की तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
राजधानी के प्रमुख अस्पतालों में 30 साल तक के हृदय रोगी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कार्डियोसर्जन डॉ. निर्मल गुप्ता कहते हैं कि 60 साल की उम्र से पहले तो हार्ट अटैक होना ही नहीं चाहिए, लेकिन अब आम हो चला है।
वह दावा करते हैं कि उनके पास आने वाले 100 मरीजों से 90 की उम्र 60 वर्ष से कम होती है। उनका कहना है कि यूं तो बचपन से ही बच्चों में सेहतमंद रहने की आदत डालनी होगी, लेकिन 20 वर्ष की उम्र से ही युवाओं को अपने दिल का ख्याल रखना होगा।
जानलेवा स्थिति तक पहुंचने का कारण है लापरवाही
युवाओं में हृदय रोग का जानलेवा स्थिति तक पहुंचने की एक बड़ी वजह लापरवाही बरतना भी है। सीने में दर्द को अक्सर गैस या एसिडिटी के कारण मान लिया जाता है।
अगर दर्द जबड़े से नाभि तक (हाथों समेत) 15 मिनट से अधिक होता रहे तो यह हल्के हार्ट अटैक या हृदय रोग का लक्षण है। खुद निर्णय न करने लगें कि यह हार्ट अटैक का दर्द है या एसिडिटी का, बल्कि डॉक्टर को दिखाएं।
युवा मरीजों के मामले में अक्सर यह देखने में आता है कि मरीज को लाने में देरी की गई और उसके हृदय व धमनियों को नुकसान बढ़ चुका था।
अगर युवा हृदय रोग की ओर बढ़ रहे हैं, इसका सबसे पक्का संकेत जरा सी मेहनत के बाद सांस फूलना। सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर यह समस्या हो सकती है। दूसरी ओर मोटापा, थका हुआ महसूस करना, ऊर्जा की कमी, सिर घूमना और आंखों के आगे अचानक अंधेरा छा जाना भी प्रमुख लक्षण हैं।
...तो ये है युवाओं के हार्ट पेशेंट होने का कारण
फल, सब्जियों जैसे पौष्टिक भोजन के बजाय प्रोसेस्ड व फास्ट फूड अपनाना
धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन
व्यायाम का समय नहीं मिलना, जॉगिंग भी नहीं
बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ना, देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना
12 घंटे से अधिक स्ट्रैस से भरा काम करना
दिल को रखना है दुरश्त तो कम करें तनाव
अगर दिल को दुरश्त रखना है तो तनाव कम करें। साथ ही बदलती जीवनशैली और बिगड़ा खानपान भी युवाओं को दिल का रोगी बना रहा है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भुवनचंद्र तिवारी बताते हैं कि युवाओं की जीवनशैली बदल चुकी है, जो उन्हें हृदय रोगों की ओर ढकेल रही है।
काम का तनाव और खानपान की बिगड़ी हुई आदतें उन्हें इस रोग की चपेट में ले जा रही हैं। प्रो. गुप्ता भी इससे सहमति जताते हैं और कहते हैं कि हमारा शरीर विकसित होने में करीब छह लाख साल का समय लगा।
हमारी जीवन शैली जैसी बनी और खाने पीने की जो आदतें हमने विकसित कीं, उनमें धीरे धीरे बदलाव आए हैं। अब ऐसा नहीं है, पिछले 100 वर्षों में ही सब कुछ बदल चुका है। इसका असर हमारे शरीर पर हो रहा है और अब शरीर इसका जवाब दे रहा है।
युवाओं में बढ़े हृदय रोगों के लिए प्रो. गुप्ता भारतीयों में अनुवांशिक रूप से इसकी चपेट में आने की शारीरिक कमजोरी प्रमुख वजह है। इस वजह के रहते हुए हमें ज्यादा सजग रहना चाहिए, लेकिन इसके उलट हम ज्यादा असजग है।
रोजाना 35 मिनट जरूर करें व्यायाम
खाने-पीने से लेकर आराम तलब जीवन शैली को ही जीने का ढंग मार चुके हैं।
युवाओं में हार्ट अटैक की आशंका
30 वर्ष से कम उम्र - 10 प्रतिशत
31 से 40 - 15 प्रतिशत
41 से 60 वर्ष - 65 प्रतिशत
60 वर्ष से अधिक - 10 प्रतिशत
-(प्रमुख चिकित्सकों के पास आ रहे मामलों पर आधारित)
प्रो. गुप्ता कहते हैं कि बदलती लाइफ स्टाइल युवाओं में हृदय रोग की वजह बन रही है। वे फास्ट फूड खाते हैं, शारीरिक गतिविधियां नाम की रह गई हैं।
12-15 घंटे तक तनाव में जी रहे हैं। प्रोसेस्ड फूड यानी डिब्बाबंद खाना। इसमें शुगर है, प्रिजर्वेटिव्ज हैं और ऐसे तत्व हैं जो हृदय और धमनियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जरूरी है इन पर निर्भरता कम करें और साग-सब्जियों को खाने में शामिल करें।
डॉक्टर सुझाव देते हैं कि रोजाना 35 मिनट व्यायाम जरूर करें। याद रखिए मोटा होना सेहतमंद होने की निशानी नहीं। बच्चों के मोटे होने पर खुश न हों। बढ़ती उम्र के साथ उनका वजन कम करने के लिए उन्हें प्रेरित करें।
साइकिल चलाना, व्यायाम करना, तैराकी से बच्चों को जोड़ें। ताकि वे युवा होने तक शारीरिक व मानसिक तौर पर मजबूत हो सकें। बच्चों में वीडियोगेम, इंटरनेट व सोशल मीडिया और टीवी से कुछ दूर करने की जरूरत
राजधानी में हार्ट पेशेंट
- 10 प्रतिशत कुल आबादी हृदय रोगों की चपेट में
- 500 से 600 हृदय रोगी औसतन रोजाना पहुंच रहे अस्पतालों में
- 120 एंजियोप्लास्टी रोजाना की जा रही, जिनमें 40 प्रतिशत की उम्र 45 से कम