{"_id":"e485565b985e726c7e42799ff660c0c1","slug":"presntation-of-raag-darbari-in-tarang-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धुनों में उतरा ‘राग दरबारी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धुनों में उतरा ‘राग दरबारी’
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 28 Oct 2014 03:28 PM IST
विज्ञापन
सितार, गिटार, नक्कारा और ऐसे ही वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी से देशप्रेम की जहां अलख जगाई गई, वहीं श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास ‘राग दरबारी’ में वर्णित सामाजिक कुरीतियों को धुनों में उतारा गया।
विज्ञापन
मौका था सोमवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियों के कार्यक्रम ‘तरंग’ का, जिसका निर्देशन तबला वादक शेख इब्राहिम ने किया।
विज्ञापन
वाद्य यंत्रों के जरिये जब ‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा...’ गीत सुनाया गया तो माहौल देशप्रेम से ओतप्रोत हो गया।
इससे पूर्व पेशकार में सभी कलाकारों ने बारी-बारी अपने वाद्य व उसकी शैली को पेश किया।
फिर एक रेला जुगलबंदी और लोक धुन ‘चलत मुसाफिर मोह लियो रे...’ पेश की गई। राग दरबारी में निबद्ध एक विशेष रचना के जरिये 16 मात्राओं में एक अलग रूप से प्रस्तुत किया गया।
विज्ञापन